Telegram पर सरकार का बड़ा एक्शन, पाइरेसी के 3142 चैनल्स पर गिरेगी गाज, JioCinema और Amazon Prime की शिकायत पर हुई कार्रवाई, करोड़ों यूजर्स पर पड़ेगा असर

पाइरेसी के खिलाफ बड़ा कदम, IT Act के तहत Telegram को 3142 अवैध चैनल हटाने का नोटिस

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Telegram: अगर आप भी उन लाखों लोगों में से हैं जो नई फिल्में और वेब सीरीज देखने के लिए Telegram के किसी चैनल का सहारा लेते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय यानी MIB ने लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप Telegram को एक सख्त नोटिस जारी किया है। यह नोटिस Telegram पर बड़े पैमाने पर हो रही फिल्मों और वेब सीरीज की पाइरेसी को लेकर भेजा गया है। सरकार ने 3142 ऐसे Telegram चैनल्स की पहचान की है जो कॉपीराइट कंटेंट को अवैध तरीके से बांट रहे थे। अगर Telegram ने इस नोटिस का सही जवाब नहीं दिया और अवैध कंटेंट नहीं हटाया तो कंपनी को भारत में अपनी कानूनी सुरक्षा खोनी पड़ सकती है।

क्यों आया Telegram सरकार के रडार पर

Telegram एक मैसेजिंग ऐप है जो अपनी प्राइवेसी, बड़े ग्रुप्स और चैनल फीचर के लिए जाना जाता है। भारत में इसके करोड़ों यूजर हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इस प्लेटफॉर्म पर एक गंभीर समस्या उभरी है। कई बड़े Telegram चैनल OTT प्लेटफॉर्म्स की फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होते ही मुफ्त में उपलब्ध करा देते हैं।

यह पाइरेसी इतने बड़े पैमाने पर हो रही थी कि JioCinema, Amazon Prime Video और अन्य प्रमुख OTT प्लेटफॉर्म्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। इन कंपनियों ने करोड़ों रुपये खर्च करके कंटेंट बनाया और उसके अधिकार खरीदे लेकिन Telegram पर उनका वही कंटेंट मुफ्त में बंट रहा था। इससे OTT सब्सक्रिप्शन की बिक्री पर सीधा असर पड़ रहा था।

अंततः JioCinema, Amazon Prime Video समेत कई बड़े OTT प्लेटफॉर्म्स ने सरकार के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की और अब कार्रवाई की दिशा में कदम उठाया गया है।

3142 चैनल्स की पहचान: लाखों सब्सक्राइबर्स

मंत्रालय की जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं वे चौंकाने वाले हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार शिकायतों की विस्तृत जांच के बाद कुल 3142 Telegram चैनल्स की पहचान की गई है जो धड़ल्ले से कॉपीराइट फिल्में, वेब सीरीज और अन्य वीडियो कंटेंट अवैध तरीके से बांट रहे थे। इन चैनल्स पर लाखों की संख्या में सब्सक्राइबर्स हैं जो इस पाइरेटेड कंटेंट का मुफ्त में लुत्फ उठा रहे थे।

विवरण आंकड़ा
पहचाने गए अवैध चैनल्स 3,142
कार्रवाई का आधार IT Act 2000
शिकायतकर्ता JioCinema, Amazon Prime Video और अन्य OTT
नोटिस जारीकर्ता सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB)
मांग तत्काल कंटेंट हटाना

IT Act 2000 के तहत क्या है कार्रवाई का आधार

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने Telegram को जो नोटिस भेजा है वह आईटी एक्ट 2000 के तहत भेजा गया है। भारत में डिजिटल कंटेंट से जुड़े नियम बेहद सख्त हैं। IT Act की विभिन्न धाराओं के तहत किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की यह जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि उसके माध्यम से किसी के कॉपीराइट का उल्लंघन न हो।

नोटिस में Telegram को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वह इन 3142 अवैध चैनल्स और उन पर मौजूद कॉपीराइट उल्लंघन करने वाले सभी कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाए।

इंटरमीडियरी स्टेटस का खतरा: Telegram के लिए बड़ी मुसीबत

अगर Telegram सरकार के इस नोटिस का सही जवाब नहीं देता या अवैध कंटेंट नहीं हटाता है तो सरकार उसके खिलाफ और कड़ा रुख अपना सकती है। सबसे बड़ा खतरा है इंटरमीडियरी स्टेटस खोने का।

भारतीय कानून के तहत सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को इंटरमीडियरी का दर्जा मिलता है। इस दर्जे के तहत प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा शेयर किए जाने वाले कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं माना जाता। लेकिन अगर यह दर्जा छिन जाए तो Telegram को उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद हर कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इससे कंपनी पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

Telegram का इतिहास: पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

Telegram दुनिया के कई देशों में कानूनी मुसीबतों का सामना कर चुका है। फ्रांस में Telegram के संस्थापक Pavel Durov को पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उनका प्लेटफॉर्म अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है और कंपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रही है। उसके बाद Telegram ने अपनी नीतियों में कुछ बदलाव किए और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग का वादा किया।

भारत में भी Telegram पर इससे पहले कई बार सवाल उठते रहे हैं। ड्रग ट्रैफिकिंग, फर्जी खबरें फैलाना और अब कॉपीराइट उल्लंघन ये सभी मुद्दे Telegram के लिए भारत में मुश्किलें खड़ी करते रहे हैं।

OTT उद्योग को कितना नुकसान

पाइरेसी से भारत के मनोरंजन उद्योग को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होता है। OTT प्लेटफॉर्म्स एक बड़ी फिल्म या वेब सीरीज बनाने में सैकड़ों करोड़ रुपये लगाते हैं। अगर वही कंटेंट रिलीज होते ही Telegram पर मुफ्त में मिल जाए तो सब्सक्राइबर उसके लिए OTT की सदस्यता क्यों लेगा।

JioCinema, Amazon Prime Video, Netflix, Disney+Hotstar जैसे प्लेटफॉर्म्स अपने कंटेंट की सुरक्षा के लिए पहले से ही तकनीकी उपाय करते हैं। लेकिन पाइरेट्स किसी न किसी तरह कंटेंट को रिकॉर्ड करके Telegram पर अपलोड कर देते हैं।

यूजर्स पर क्या होगा असर

Telegram पर होने वाली इस सरकारी कार्रवाई का सबसे बड़ा असर उन करोड़ों यूजर्स पर पड़ेगा जो पाइरेटेड कंटेंट के लिए इन चैनल्स से जुड़े हैं। आने वाले दिनों में पाइरेसी से जुड़े हजारों ग्रुप्स और चैनल्स एक झटके में डिलीट हो सकते हैं।

हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि Telegram एक मैसेजिंग ऐप के तौर पर पूरी तरह बंद नहीं होगा। सिर्फ अवैध कंटेंट शेयर करने वाले चैनल्स और ग्रुप्स पर कार्रवाई होगी। Telegram का इस्तेमाल व्यक्तिगत चैटिंग, वैध ग्रुप्स और चैनल्स के लिए पहले की तरह जारी रहेगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

डिजिटल कानून के जानकारों का कहना है कि सरकार का यह कदम बिल्कुल सही दिशा में है। पाइरेसी को बढ़ावा देना या पाइरेटेड कंटेंट देखना भी कानूनी अपराध है। भारत में कॉपीराइट अधिनियम के तहत पाइरेसी के लिए जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।

एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि सरकार अब डिजिटल पाइरेसी पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। OTT उद्योग भारत में तेजी से बढ़ रहा है और इसे संरक्षित करना देश के रचनात्मक उद्योग और लाखों रोजगारों की रक्षा के लिए जरूरी है।

 

आने वाले हफ्तों में Telegram की तरफ से सरकार के नोटिस का जवाब आने की उम्मीद है। अगर Telegram ने तेजी से कार्रवाई की और चैनल्स हटाए तो मामला यहीं खत्म हो सकता है। लेकिन अगर कंपनी ने असहयोग का रवैया अपनाया तो भारत सरकार और कड़े कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएगी।

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