ममता को SC की दो टूक! SIR याचिका पर CJI भड़के, अवमानना नोटिस की चेतावनी, जानें पूरा मामला

SIR प्रक्रिया पर TMC की याचिका पर CJI सूर्यकांत की कड़ी फटकार, "खराब ड्राफ्टिंग का उदाहरण", अवमानना की चेतावनी, EC को अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश

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Supreme Court of India: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल तीखे सवाल उठाए बल्कि अवमानना नोटिस जारी करने की चेतावनी भी दे डाली। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश भी दिया।

Supreme Court of India: क्या है SIR और क्यों है विवाद

SIR यानी स्पेशल समरी रिवीजन वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसमें दर्ज जानकारी सही और अद्यतन हो। इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से संबंधित आपत्तियां और दावे स्वीकार किए जाते हैं और उनकी जांच न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जाती है। पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद से किया जा रहा है और इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा सकते हैं।

Supreme Court of India: सुप्रीम कोर्ट ने दिया अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश

आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि चुनाव आयोग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श करके एक अधिसूचना जारी करे। इस अधिसूचना के तहत एक पूर्व चीफ जस्टिस और अन्य न्यायाधीशों को मिलाकर एक अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाए। यह ट्रिब्यूनल उन मामलों पर सुनवाई करेगा जहां न्यायिक अधिकारियों ने किसी व्यक्ति की अर्जी खारिज की हो। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब भी कोई न्यायिक अधिकारी किसी अर्जी को अस्वीकार करे तो उसे अस्वीकृति का कारण भी लिखित रूप में देना होगा।

Supreme Court of India: 63 लाख मामलों में से 10 लाख निपटाए गए

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि न्यायिक अधिकारियों ने अब तक करीब 7 लाख मामलों का निपटारा किया है। उन्होंने बताया कि कुल 63 लाख मामले हैं जिनमें से अभी करीब 57 लाख मामले निपटाए जाने बाकी हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने 10 मार्च को दिए संवाद के जरिए बताया है कि अब तक 10 लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में 500 से अधिक और ओडिशा तथा झारखंड से 200 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है।

Supreme Court of India: CJI सूर्यकांत ने जताई कड़ी नाराजगी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि इस तरह की एडवांस पिटीशन से गलत संदेश जाता है कि याचिकाकर्ताओं को सिस्टम पर भरोसा ही नहीं है। उन्होंने सख्त लहजे में पूछा कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत कैसे की गई और याचिकाकर्ताओं को ऐसी अर्जी दाखिल करने की हिम्मत कैसे हुई। CJI ने यहां तक कहा कि अदालत इस आवेदन पर अवमानना का नोटिस जारी कर सकती है और यह भी कहा कि जो भाषा याचिकाकर्ताओं ने इस्तेमाल की है उसका जवाब उसी भाषा में देना पड़ सकता है।

Supreme Court of India: दोनों पक्षों पर जताया शक

CJI सूर्यकांत ने एक और अहम बात कही जो इस पूरे विवाद की जटिलता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा मोड़ आ गया है जहां अदालत को दोनों पक्षों की बातों पर शक होने लगा है। उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों ओर से जो जानकारियां आ रही हैं उनकी सत्यता पर सवाल उठाए जा सकते हैं। यह बयान इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।

Supreme Court of India: न्यायिक अधिकारियों के बलिदान की सराहना

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के परिश्रम और समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों को पहले ही आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं और उनकी छुट्टियां तक रद्द कर दी गई हैं। CJI ने कहा कि अपने न्यायिक अधिकारियों से और अधिक बलिदान की उम्मीद नहीं की जा सकती और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यात्रा के दौरान इन अधिकारियों के कार्य का प्रत्यक्ष अनुभव भी किया है।

Supreme Court of India: चुनाव आयोग और राज्य को दिए गए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि न्यायिक अधिकारियों को उनके कार्य के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह भी निर्देश दिया कि कोई भी ऐसा नियम लागू नहीं किया जाए जिससे न्यायिक अधिकारियों के काम में रुकावट आए। यह भी तय किया गया कि जब भी किसी न्यायिक अधिकारी को नई लॉगिन आईडी की जरूरत पड़े तो वह तुरंत उपलब्ध कराई जाए।

निष्कर्ष

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ है कि SIR प्रक्रिया को सुचारू रूप से और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए और इसमें किसी भी तरह की राजनीतिक बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ममता बनर्जी और TMC के लिए यह सुनवाई किसी राहत से कम नहीं बल्कि और अधिक सतर्क रहने की चेतावनी लेकर आई है।

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