NCERT ने मांगी माफी, कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ वाला अध्याय हटाया, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद किताब वेबसाइट से हटाई और वितरण रोका

NCERT कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, NCERT ने माफी मांगी

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Supreme Court News: देश की शीर्ष शिक्षा संस्था राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT को एक बड़ी और अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ा जब सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठ की एक पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट की तीखी नाराजगी के बाद NCERT ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और स्वीकार किया कि यह गलती अनजाने में हुई। संस्था ने न केवल अपनी वेबसाइट से उस पाठ्यपुस्तक को हटाया बल्कि उसका वितरण भी तत्काल प्रभाव से रोक दिया। अब इस किताब को पूरी तरह नए सिरे से लिखा जाएगा और शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में संशोधित पुस्तक छात्रों तक पहुंचाई जाएगी। यह मामला न केवल शैक्षिक जगत बल्कि न्यायिक और संवैधानिक परिदृश्य के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण।

कक्षा 8 की किताब में क्या था आपत्तिजनक?

NCERT की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार यानी judicial corruption से संबंधित एक अध्याय शामिल किया गया था। इस अध्याय में न्यायपालिका के बारे में ऐसी सामग्री और टिप्पणियां थीं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने आपत्तिजनक और न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध माना। देश के करोड़ों स्कूली बच्चों को पढ़ाई जाने वाली किताब में इस तरह की सामग्री होना एक अत्यंत गंभीर मसला है क्योंकि बचपन में पढ़ी गई बातें बच्चों के मन पर गहरी छाप छोड़ती हैं। न्यायपालिका के बारे में बच्चों के मन में नकारात्मक धारणा बनाना संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिहाज से हानिकारक हो सकता है।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की अहम भूमिका रही। दोनों वकीलों ने इस मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष उल्लेख किया। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को अपने हाथ में लिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक भ्रष्टाचार से जुड़े उस अध्याय पर अत्यंत कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आज यानी गुरुवार को भी इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

अनजाने में हुई चूक, न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद NCERT के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सार्वजनिक बयान जारी किया। अधिकारी ने कहा कि कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक के संबंधित अध्याय में कुछ अनुचित सामग्री और निर्णय की त्रुटि अनजाने में शामिल हो गई। NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्था न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देती है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानती है। NCERT ने जोर देकर कहा कि नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक साक्षरता बढ़ाना, सरकारी संस्थाओं के प्रति सम्मान का भाव जगाना और लोकतांत्रिक भागीदारी की समझ को मजबूत करना है। किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाने या उसे कमजोर दिखाने का कोई इरादा नहीं था।

Supreme Court News: वेबसाइट से हटाई किताब, वितरण भी रोका

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के तुरंत बाद NCERT ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट से कक्षा आठ की उस विवादित पाठ्यपुस्तक को हटा दिया। इसके कुछ ही घंटों बाद संस्था ने उस किताब का वितरण भी पूरी तरह रोक दिया। यह कदम दिखाता है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद NCERT ने बिना किसी देरी के सुधारात्मक कार्रवाई की।

2026-27 से नई और संशोधित किताब आएगी

NCERT ने यह भी घोषणा की कि संबंधित पाठ्य सामग्री को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श और मार्गदर्शन में पूरी तरह नए सिरे से लिखा जाएगा। यह संशोधित पुस्तक शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। संस्था ने यह भी कहा कि वह अपनी सतत समीक्षा प्रक्रिया के तहत रचनात्मक सुझावों का हमेशा स्वागत करती है और भविष्य में इस तरह की चूक न हो इसके लिए पूरी सावधानी बरती जाएगी।

Supreme Court News: यह मामला क्यों है महत्वपूर्ण?

यह विवाद कई कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पहली बात यह है कि स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल सामग्री देश के भावी नागरिकों की सोच और दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित करती है। दूसरी बात यह है कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है और उसकी साख और विश्वसनीयता को बनाए रखना हर नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी है। तीसरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान लेना और फटकार देना दर्शाता है कि न्यायपालिका अपनी गरिमा की रक्षा के प्रति कितनी सतर्क है।

कुल मिलाकर यह मामला शिक्षा नीति निर्माण में सावधानी और जिम्मेदारी की जरूरत को रेखांकित करता है। NCERT की माफी और सुधारात्मक कदम सकारात्मक हैं लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर इस तरह की सामग्री पाठ्यपुस्तक में कैसे शामिल हो गई और इसकी समीक्षा प्रक्रिया में क्या कमियां रहीं।

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