SIP vs Lumpsum: उतार-चढ़ाव भरे बाजार में कौन सी निवेश रणनीति देगी ज्यादा रिटर्न? उदाहरण से समझें पूरा गणित, जानें कब चुनें SIP और कब करें एकमुश्त निवेश

शेयर बाजार में हर महीने थोड़ा निवेश करें या एकमुश्त? रुपी कॉस्ट एवरेजिंग, जोखिम, उदाहरण और अस्थिर बाजार में कौन सा तरीका ज्यादा फायदेमंद

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SIP vs Lumpsum: शेयर बाजार में निवेश करने की सोच रखने वाले हर व्यक्ति के मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम लगाई जाए या एक बार में बड़ी राशि का निवेश किया जाए। यह सवाल और भी जरूरी हो जाता है जब बाजार में लगातार उथल-पुथल मची हो और हर दिन सेंसेक्स-निफ्टी के नंबर ऊपर-नीचे होते दिखें। एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान और एकमुश्त यानी Lumpsum निवेश दोनों ही तरीकों के अपने-अपने फायदे और अपने-अपने जोखिम हैं। लेकिन अस्थिर बाजार में इन दोनों का असर एकदम अलग-अलग होता है। अगर आप भी इस उलझन में हैं कि अपनी मेहनत की कमाई किस तरीके से बाजार में लगाएं तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए आसान भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों से समझते हैं कि कौन सी रणनीति कब और किसके लिए ज्यादा फायदेमंद है।

SIP vs Lumpsum: SIP क्या है और यह कैसे काम करती है?

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें निवेशक हर महीने एक निश्चित तारीख को एक तय राशि म्यूचुअल फंड में लगाता है। यह रकम 500 रुपये से भी शुरू हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि निवेशक को यह सोचने की जरूरत नहीं होती कि बाजार ऊपर है या नीचे। हर महीने अपने आप पैसा कटता है और निवेश होता रहता है। इस तरीके का सबसे महत्वपूर्ण फायदा है रुपी कॉस्ट एवरेजिंग। इसे सरल भाषा में समझें तो जब बाजार नीचे होता है और शेयर या म्यूचुअल फंड की यूनिट सस्ती होती हैं तब उसी तय राशि में ज्यादा यूनिट मिलती हैं। और जब बाजार ऊपर होता है तब कम यूनिट मिलती हैं। लंबे समय में यह प्रक्रिया खरीद की औसत कीमत को संतुलित कर देती है जिससे जोखिम कम होता है।

SIP का व्यावहारिक उदाहरण

मान लीजिए आपके पास सालभर में 1.20 लाख रुपये निवेश करने हैं। आपने तय किया कि हर महीने 10,000 रुपये SIP के जरिए लगाएंगे। अब मान लीजिए कि साल के बीच में बाजार 10 प्रतिशत गिर गया। इस दौरान आपकी 10,000 रुपये की किस्त में पहले से ज्यादा यूनिट आ जाएंगी क्योंकि यूनिट की कीमत गिर गई है। अब साल के अंत में बाजार ने रिकवरी की और 12 प्रतिशत का रिटर्न दिया। इस स्थिति में SIP निवेशक को एकमुश्त निवेश की तुलना में बेहतर औसत खरीद मूल्य मिला होगा और कुल मुनाफा भी अधिक होगा। यही SIP की असली ताकत है।

SIP vs Lumpsum: Lumpsum यानी एकमुश्त निवेश क्या है?

Lumpsum यानी एकमुश्त निवेश वह तरीका है जिसमें निवेशक एक ही बार में एक बड़ी राशि बाजार में लगा देता है। इस तरीके में समय का सटीक चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर आपने सही समय पर यानी जब बाजार अपने निचले स्तर पर हो तब एकमुश्त निवेश किया और उसके बाद बाजार में तेज उछाल आया तो आप पूरी रिकवरी का पूरा-पूरा फायदा उठा सकते हैं। यह तरीका उन लोगों के लिए है जो बाजार की दिशा का अनुमान लगाने में माहिर हों और जिनके पास एक साथ निवेश के लिए बड़ी रकम उपलब्ध हो।

Lumpsum का व्यावहारिक उदाहरण

मान लीजिए बाजार पहले से 15 प्रतिशत गिर चुका है और विशेषज्ञों का मानना है कि अब तेजी आने वाली है। ऐसे में अगर आपने 1 लाख रुपये एकमुश्त लगाए और अगले 12 महीनों में बाजार 20 प्रतिशत चढ़ गया तो आपका निवेश सीधे 1.20 लाख रुपये हो जाएगा। यानी 20,000 रुपये का शुद्ध लाभ। अगर यही 1 लाख रुपये SIP के जरिए 12 किस्तों में लगाए होते तो शुरुआती तेज उछाल का पूरा फायदा नहीं मिल पाता क्योंकि शुरुआत में बाजार जितना चढ़ा उस दौरान आपका केवल एक ही किस्त का पैसा लगा हुआ था। इसलिए Lumpsum में पूरा पैसा पहले से ही काम कर रहा होता है।

SIP vs Lumpsum: अस्थिर बाजार में दोनों की तुलना

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब बाजार की दिशा स्पष्ट न हो और हर हफ्ते ऊपर-नीचे के बड़े झटके लग रहे हों तब SIP ज्यादा सुरक्षित और समझदारी वाला विकल्प है। इस स्थिति में SIP जोखिम को अलग-अलग समय में बांट देती है जिससे किसी एक बड़े झटके का असर पूरे निवेश पर नहीं पड़ता। दूसरी तरफ अगर बाजार में बड़ी गिरावट के बाद मजबूत रिकवरी के स्पष्ट संकेत हों और अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत हो तब Lumpsum निवेश अधिक लाभकारी साबित हो सकता है। लेकिन यह दांव सही समय का सटीक अनुमान लगाने पर निर्भर करता है जो हर निवेशक के लिए संभव नहीं होता।

कौन किसे चुने?

अगर आप नौकरीपेशा हैं और हर महीने नियमित आय होती है तो SIP आपके लिए सबसे उपयुक्त तरीका है। यह आपकी बचत को बिना किसी तनाव के धीरे-धीरे बढ़ाता रहता है। अगर आपके पास बोनस, विरासत या किसी संपत्ति की बिक्री से एकमुश्त बड़ी रकम आई है और बाजार उस समय अपने निचले स्तर पर दिख रहा है तो Lumpsum पर विचार करें। लेकिन एकमुश्त निवेश से पहले किसी अनुभवी वित्तीय सलाहकार से जरूर परामर्श लें। कई निवेशक दोनों तरीकों को मिलाकर भी चलते हैं जिसे हाइब्रिड रणनीति कहते हैं जिसमें एक बड़ी रकम एकमुश्त और बाकी SIP के जरिए लगाई जाती है।

SIP vs Lumpsum: याद रखने वाली जरूरी बातें

निवेश की किसी भी रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण है अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझना। SIP में भले ही जोखिम फैला हुआ हो लेकिन बाजार के लंबे समय तक गिरे रहने पर नुकसान हो सकता है। Lumpsum में समय का चुनाव गलत हुआ तो नुकसान की संभावना ज्यादा होती है। दोनों ही तरीकों में लंबी अवधि यानी कम से कम 5 से 7 साल का नजरिया रखना जरूरी है। शेयर बाजार में कोई भी निवेश जोखिम से मुक्त नहीं होता इसलिए निवेश से पहले पूरी जानकारी लें और विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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