Silver Price Hike: चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी, 1 से 2 लाख में लगे 14 महीने, सिर्फ एक माह में 3 लाख पार
MCX पर 3.17 लाख रुपये प्रति किलो, 2025 में 170% की जबरदस्त उछाल
Silver Price Hike: भारतीय कमोडिटी बाजार में चांदी की कीमतों ने एक नया इतिहास रच दिया है। मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत 3.17 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई। यह उछाल इतना तीव्र रहा कि पिछले दो कारोबारी दिनों में ही चांदी लगभग 30,000 रुपये महंगी हो गई। सोमवार को चांदी ने पहली बार 3 लाख रुपये का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया था और मंगलवार को इसमें 7,000 रुपये से अधिक की और तेजी दर्ज की गई।
चांदी की इस रॉकेट गति को देखते हुए निवेशक और व्यापारी दोनों ही हैरान हैं। साल 2025 में चांदी में करीब 170 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चांदी को 2 लाख रुपये से बढ़कर 3 लाख रुपये तक पहुंचने में मात्र एक महीने का ही समय लगा। यह तेजी दुर्लभ है और बाजार विशेषज्ञों के लिए भी आश्चर्यजनक साबित हुई है।
Silver Price Hike: धीमी शुरुआत, फिर रफ्तार पकड़ी चांदी ने

चांदी की कीमतों (Silver Price Hike) की यात्रा को समझें तो यह काफी दिलचस्प है। अक्टूबर 2024 में चांदी की कीमत बढ़कर 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हुई थी। उस समय यह एक बड़ी उपलब्धि मानी गई थी। इसके बाद चांदी में लगातार तेजी का दौर शुरू हुआ। कई दिन ऐसे रहे जब चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। निवेशक और व्यापारी इस तेजी का फायदा उठाने में लगे रहे।
लगभग 14 महीने की लंबी यात्रा के बाद दिसंबर 2025 में चांदी ने 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा छू लिया। यह वृद्धि धीरे-धीरे हुई और बाजार को इसके लिए तैयार होने का पर्याप्त समय मिला। 1 लाख से 2 लाख तक पहुंचने में चांदी को पूरे 14 महीने का समय लगा। इस दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन समग्र दिशा ऊपर की ओर ही रही।
बाजार विशेषज्ञों का मानना था कि यह गति बनी रहेगी और चांदी धीरे-धीरे आगे बढ़ेगी। लेकिन जो हुआ वह सबकी उम्मीदों से परे था। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच चांदी ने अभूतपूर्व रफ्तार पकड़ी और मात्र एक महीने में 1 लाख रुपये की छलांग लगा दी।
मात्र 30 दिनों में 1 लाख रुपये की छलांग
यहां सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि चांदी (Silver Price Hike) को 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये तक पहुंचने में सिर्फ एक महीने का समय लगा। दिसंबर 2025 के अंत में चांदी 2 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी। 19 जनवरी 2026 को यह 3 लाख रुपये को पार कर गई। यानी करीब 30 दिनों में 1 लाख रुपये की बढ़ोतरी। यह वृद्धि दर 50 प्रतिशत से भी अधिक है, जो किसी भी कमोडिटी के लिए असाधारण मानी जाती है।
इस तीव्र वृद्धि ने पूरे बाजार को चौंका दिया है। जो निवेशक धीरे-धीरे मुनाफा कमाने की योजना बना रहे थे, उन्हें अचानक भारी लाभ मिल गया। वहीं जो लोग चांदी में निवेश करने से पहले सोच रहे थे, वे इस तेजी को देखकर पछता रहे हैं। बाजार में हर कोई इस बात की चर्चा कर रहा है कि आखिर चांदी में इतनी जबरदस्त तेजी क्यों आ रही है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो 1 लाख से 2 लाख तक पहुंचने में 14 महीने लगे, जबकि 2 लाख से 3 लाख तक पहुंचने में मात्र 1 महीना। यह अंतर दर्शाता है कि चांदी की मांग में कितनी तीव्रता आई है और बाजार में इसे लेकर कितना उत्साह है।
Silver Price Hike: वैश्विक तनाव और औद्योगिक मांग बढ़ाने वाले कारक
चांदी की कीमतों (Silver Price Hike) में इस असाधारण तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक विवाद लगातार बढ़ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इस तरह की अनिश्चितता में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश करते हैं और चांदी तथा सोना जैसी कीमती धातुएं ऐसे समय में पसंदीदा विकल्प बन जाती हैं।
बाजार में यह भी चर्चा है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकता है। ऐसी किसी भी कार्रवाई से डॉलर की स्थिति प्रभावित हो सकती है और कीमती धातुओं में तेजी आ सकती है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदें भी चांदी की कीमतों को बढ़ावा दे रही हैं। जब ब्याज दरें कम होती हैं तो बैंक में पैसा रखने का रिटर्न घट जाता है और लोग सोना-चांदी जैसे वैकल्पिक निवेश की ओर रुख करते हैं।
औद्योगिक मांग भी चांदी की कीमतों को ऊपर धकेल रही है। चांदी का व्यापक उपयोग सौर ऊर्जा उद्योग में होता है। सोलर पैनल बनाने में चांदी एक महत्वपूर्ण घटक है। दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने के साथ सोलर पैनलों की मांग तेजी से बढ़ी है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन में भी चांदी का उपयोग होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में भी चांदी की भारी मांग है। इन सभी क्षेत्रों में विस्तार से चांदी की औद्योगिक खपत बढ़ी है।
आपूर्ति में कमी ने बढ़ाई समस्या
मांग बढ़ने के साथ ही आपूर्ति में कमी भी चांदी की कीमतों (Silver Price Hike) को ऊपर धकेल रही है। चांदी की खदानों से उत्पादन में वृद्धि उतनी तेज नहीं हो पा रही है जितनी तेजी से मांग बढ़ रही है। कई प्रमुख चांदी उत्पादक देशों में खनन में चुनौतियां हैं। पर्यावरणीय नियमों के कारण भी नई खदानें खोलना मुश्किल हो गया है।
बढ़ती मांग और घटती आपूर्ति का यह असंतुलन किसी भी वस्तु की कीमत बढ़ाने के लिए पर्याप्त है। चांदी के मामले में यह असंतुलन विशेष रूप से तीव्र है क्योंकि इसकी मांग कई क्षेत्रों से एक साथ आ रही है – आभूषण उद्योग, निवेश, औद्योगिक उपयोग। जब सप्लाई कम हो और डिमांड ज्यादा, तो कीमतें स्वाभाविक रूप से ऊपर जाती हैं।
Silver Price Hike: आगे क्या होगा, क्या गिरेगी कीमत
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों (Silver Price Hike) में आगे कुछ सुधार आ सकता है। ऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गई है कि व्यापारी मुनाफावसूली कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चांदी 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर सकती है। यह वर्तमान स्तर से एक बड़ा सुधार होगा।
हालांकि विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि यह गिरावट अस्थायी होगी। इसके बाद कीमतें फिर से बढ़ने की उम्मीद है। लंबी अवधि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। आपूर्ति की लगातार चिंताएं और बढ़ती औद्योगिक खपत के बीच कीमती धातुओं का व्यापक दृष्टिकोण मजबूत है।
कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतनी तेजी से हो रही वृद्धि से अचानक तीव्र मुनाफावसूली हो सकती है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं तो निवेशक मुनाफा बुक करने लगते हैं। यह अल्पकालिक दबाव पैदा कर सकता है। लेकिन मध्यम से लंबी अवधि में चांदी की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सावधानी बरतें। अगर आपने पहले से चांदी में निवेश किया है तो कुछ मुनाफा बुक करना समझदारी हो सकती है। नए निवेशकों को थोड़ा इंतजार करने और कीमतों में सुधार आने पर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। किसी भी स्थिति में, चांदी दीर्घकालिक निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी।
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