6 दशक के इंतजार के बाद आज बनेगा इतिहास, वैष्णो देवी मंदिर के पास त्रिकुटा पहाड़ियों पर शंकराचार्य मंदिर का शिलान्यास करेंगे LG मनोज सिन्हा

LG मनोज सिन्हा 31.51 करोड़ की लागत से त्रिकुटा पहाड़ियों पर करेंगे शिलान्यास, 41 कनाल जमीन पर भव्य परिसर, 1967 से चली आ रही योजना

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Shri Shankaracharya Temple: जम्मू-कश्मीर में आज एक ऐतिहासिक दिन है। छह दशकों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आदि शंकराचार्य को समर्पित श्री शंकराचार्य मंदिर कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास होने जा रहा है। लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा बुधवार को रियासी जिले की प्रसिद्ध त्रिकुटा पहाड़ियों में इस भव्य मंदिर की नींव रखेंगे। यह वही पहाड़ियां हैं जहां माता वैष्णो देवी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। 1967 में पहली बार इस मंदिर के निर्माण का विचार आया था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह योजना लगभग 60 वर्षों तक धूल फांकती रही। अब जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से इस सपने को साकार करने की दिशा में पहला कदम उठाया जा रहा है।

Shri Shankaracharya Temple: 1967 से चली आ रही योजना का होगा साकार

श्री शंकराचार्य मंदिर के निर्माण का विचार सबसे पहले 1967 में आया था। उस समय यह प्रस्ताव रखा गया था कि त्रिकुटा पहाड़ियों पर, जहां पहले से ही माता वैष्णो देवी का पवित्र मंदिर विराजमान है, वहां आदि शंकराचार्य को समर्पित एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाए।

आदि शंकराचार्य भारतीय दर्शन और अद्वैत वेदांत के महान प्रवर्तक थे। उन्होंने पूरे भारत में चार पीठों (चार धाम) की स्थापना की थी और सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई थी। जम्मू-कश्मीर से भी उनका गहरा संबंध रहा है, विशेष रूप से श्रीनगर में स्थित शंकराचार्य पहाड़ी और मंदिर उनकी यात्रा और ध्यान की याद दिलाते हैं।

लेकिन विभिन्न राजनीतिक, प्रशासनिक और भौगोलिक चुनौतियों के कारण यह योजना लगभग छह दशकों तक अटकी रही। अब लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस सपने को पूरा करने का संकल्प लिया है।

41 कनाल जमीन पर बनेगा मंदिर परिसर

अधिकारियों ने बताया कि यह मंदिर स्थानीय जमीन मालिकों द्वारा दान की गई 41 कनाल भूमि पर बनाया जाएगा। यह भूमि दान जम्मू-कश्मीर की धार्मिक सौहार्द और आस्था की परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। स्थानीय लोगों ने अपनी भूमि को इस पवित्र उद्देश्य के लिए स्वेच्छा से दान किया है।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) और संबंधित जमीन मालिकों के बीच 2025 में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत न केवल मंदिर निर्माण बल्कि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास का भी प्रावधान किया गया है।

दान की गई जमीन पर मंदिर परिसर के साथ-साथ एक मोटरेबल एक्सेस रोड भी बनाया जाएगा। यह सड़क तीर्थयात्रियों को आसानी से मंदिर तक पहुंचने में सहायता करेगी। इसके अलावा, शौचालय, पीने के पानी के पॉइंट और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

Shri Shankaracharya Temple: 31.51 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा परिसर

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने श्री शंकराचार्य मंदिर के साथ-साथ संबंधित सार्वजनिक सुविधाओं और जमीन मालिकों के लिए 50 व्यावसायिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। इस संपूर्ण परियोजना की अनुमानित लागत 31.51 करोड़ रुपये है।

यह परियोजना केवल एक मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक धार्मिक और सांस्कृतिक परिसर के विकास की योजना है। इसमें शामिल होंगे:

  • मुख्य मंदिर भवन जो आदि शंकराचार्य को समर्पित होगा और जिसमें भक्तों के पूजा-अर्चना के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं होंगी।

  • एक्सेस रोड जो मुख्य मार्ग से मंदिर तक तीर्थयात्रियों को सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा प्रदान करेगी।

  • सार्वजनिक सुविधाएं जैसे शौचालय, पीने के पानी के स्थान, विश्राम कक्ष आदि।

  • 50 व्यावसायिक दुकानें जो स्थानीय जमीन मालिकों को दी जाएंगी, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा।

यह व्यावसायिक दुकानें तीर्थयात्रियों को प्रसाद, धार्मिक सामग्री, खाद्य पदार्थ और स्मृति चिह्न प्रदान करेंगी। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

कटरा में देवियों का संग्रहालय भी बनेगा

अधिकारियों ने बताया कि लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें एक अनूठी परियोजना है – देवियों का संग्रहालय (Museum of Goddesses)।

यह संग्रहालय माता वैष्णो देवी के बेस कैंप कटरा में बनाया जाएगा। इस संग्रहालय में पूरे भारत के प्रमुख देवी तीर्थ स्थलों की प्रतिकृतियां (Replicas) और प्रतिनिधित्व (Representations) प्रदर्शित किए जाएंगे।

इस संग्रहालय का उद्देश्य तीर्थयात्रियों को भारत के विभिन्न शक्ति पीठों और देवी मंदिरों की जानकारी एक ही स्थान पर प्रदान करना है। यह न केवल एक धार्मिक शिक्षा केंद्र होगा बल्कि भारत की समृद्ध देवी उपासना परंपरा का एक जीवंत प्रदर्शन भी होगा।

यह पहल जम्मू-कश्मीर को न केवल एक धार्मिक स्थल बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा का केंद्र भी बनाएगी।

Shri Shankaracharya Temple: त्रिकुटा पहाड़ियों का महत्व

त्रिकुटा पहाड़ियां जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित हैं। ये पहाड़ियां हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती हैं क्योंकि यहीं माता वैष्णो देवी का पवित्र गुफा मंदिर स्थित है।

प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु इन पहाड़ियों पर चढ़कर माता वैष्णो देवी के दर्शन करते हैं। यह भारत के सबसे अधिक दर्शनार्थियों वाले तीर्थ स्थलों में से एक है। कटरा से शुरू होकर लगभग 13 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद भक्त माता के दरबार में पहुंचते हैं।

इन्हीं पवित्र पहाड़ियों पर अब आदि शंकराचार्य को समर्पित मंदिर का निर्माण होने से यह क्षेत्र और भी महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन जाएगा। शैव और शाक्त परंपराओं का यह संगम भारतीय आध्यात्मिकता की समन्वय परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण होगा।

आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर

अधिकारियों ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। जब मंदिर बनकर तैयार होगा और श्रद्धालुओं का आना शुरू होगा, तो स्थानीय लोगों को रोजगार के कई अवसर मिलेंगे।

निर्माण कार्य के दौरान भी सैकड़ों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। मंदिर बन जाने के बाद इसके रखरखाव, संचालन और तीर्थयात्रियों की सेवा में भी बड़ी संख्या में लोगों को काम मिलेगा। होटल, रेस्तरां, दुकानें, परिवहन सेवाएं – ये सभी क्षेत्र विकसित होंगे।

50 व्यावसायिक दुकानों का निर्माण विशेष रूप से स्थानीय जमीन दानकर्ताओं के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक स्रोत होगा। उन्हें अपनी जमीन दान करने के बदले में दीर्घकालिक आय का स्रोत मिलेगा।

Shri Shankaracharya Temple: भक्तों के आध्यात्मिक अनुभव में होगा सुधार

अधिकारियों ने कहा कि इस परियोजना से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक अनुभव में काफी बढ़ोतरी होगी। अब भक्त न केवल माता के दर्शन करेंगे बल्कि आदि शंकराचार्य के मंदिर में भी पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

बेहतर सड़कें, स्वच्छ शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था और अन्य आधुनिक सुविधाएं यात्रा को अधिक सुखद और सुविधाजनक बनाएंगी। यह सुनिश्चित करेगा कि तीर्थयात्री अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें।

यह परियोजना यह भी पक्का करेगी कि यह आध्यात्मिक केंद्र जीवंत और प्रासंगिक बना रहे, जिसमें तीर्थयात्रियों की भलाई और स्थानीय समुदायों के समावेशी विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

छह दशकों की प्रतीक्षा के बाद आज का यह ऐतिहासिक शिलान्यास न केवल एक धार्मिक आकांक्षा की पूर्ति है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के विकास और समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। यह परियोजना आस्था, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण का एक अनूठा संगम बनने जा रही है।

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