शिखर धवन को कोर्ट से बड़ी राहत, दिल्ली फैमिली कोर्ट ने एक्स-वाइफ को 5.72 करोड़ लौटाने का आदेश दिया, धमकी और जबरन वसूली के आरोप भी साबित

शिखर धवन को दिल्ली फैमिली कोर्ट से बड़ी जीत, एक्स-वाइफ को 5.72 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश, ऑस्ट्रेलियन कोर्ट का फैसला भारत में अमान्य

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Shikhar Dhawan: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन को उनके वैवाहिक विवाद में एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी जीत मिली है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट की फैमिली कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धवन की पूर्व पत्नी को लगभग 5.72 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया की एक फैमिली कोर्ट द्वारा दिया गया प्रॉपर्टी सेटलमेंट का आदेश भारतीय कानूनों के विपरीत है और इसलिए भारत में लागू नहीं किया जा सकता। पटियाला हाउस कोर्ट के फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार गर्ग ने यह अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय दिया।

इसके साथ ही न्यायाधीश ने धवन की पूर्व पत्नी को यह भी निर्देश दिया कि वे ऑस्ट्रेलियन फैमिली कोर्ट के आदेश के आधार पर 16.9 करोड़ रुपये की मांग नहीं करेंगी। यह फैसला न केवल शिखर धवन के लिए बल्कि भारतीय कानूनी इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है क्योंकि इसमें विदेशी अदालतों के फैसलों की भारत में मान्यता के प्रश्न पर गहराई से विचार किया गया है।

क्या था पूरा विवाद और ऑस्ट्रेलियन कोर्ट ने क्या आदेश दिया था

शिखर धवन और उनकी पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी के बीच तलाक के बाद संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। इस विवाद में ऑस्ट्रेलिया की एक फैमिली कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियन फैमिली लॉ एक्ट 1975 की धारा 79 के तहत एक आदेश पारित किया था। इस आदेश के तहत ऑस्ट्रेलियन कोर्ट ने प्रॉपर्टी सेटलमेंट के नाम पर धवन को अपनी ऑस्ट्रेलिया स्थित दो संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि अपनी पूर्व पत्नी को देने का निर्देश दिया था। ऑस्ट्रेलियन कानून के तहत प्रॉपर्टी सेटलमेंट की अवधारणा यह है कि शादी के दौरान पति की सारी संपत्तियां एक मैरिटल पूल में आ जाती हैं और कोर्ट को अधिकार होता है कि वह भारत और विदेश दोनों जगह की कुल संपत्ति का 60 प्रतिशत तक पत्नी को दिलाने का आदेश दे सके।

Shikhar Dhawan: धमकी और जबरन वसूली का गंभीर आरोप

इस मामले में एक और बेहद गंभीर और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। शिखर धवन ने कोर्ट को बताया कि वे ऑस्ट्रेलियन कोर्ट के सामने अपनी इच्छा से नहीं गए थे। उनका कहना था कि उनकी पूर्व पत्नी ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर वे उनकी शर्तें नहीं मानेंगे तो वे उनके खिलाफ ऐसी बदनाम करने वाली सामग्री सार्वजनिक कर देंगी जिससे न केवल उनका क्रिकेट करियर बर्बाद होगा बल्कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी नष्ट हो जाएगी। यह एक अत्यंत संगीन आरोप था। न्यायाधीश ने धवन के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए माना कि ऑस्ट्रेलियन कोर्ट में उनकी उपस्थिति स्वेच्छा से नहीं थी बल्कि जबरदस्ती और धमकी के दबाव में थी।

भारतीय कानूनों से टकराता है ऑस्ट्रेलियन फैसला

दिल्ली फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार गर्ग ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलियन फैमिली लॉ एक्ट 1975 का प्रॉपर्टी सेटलमेंट का प्रावधान भारत की सार्वजनिक नीति के विपरीत है। न्यायाधीश ने कहा कि यह कानून न केवल हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों से टकराता है बल्कि पंजीकरण अधिनियम, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम और भारत के अन्य महत्वपूर्ण कानूनों के भी अनुरूप नहीं है। न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी विदेशी अदालत में किसी भारतीय नागरिक के उपस्थित होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि उसने उस अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार कर लिया है। खासकर तब जब उपस्थिति धमकी और दबाव के कारण हो।

Shikhar Dhawan: पूर्व पत्नी कोर्ट से रहीं अनुपस्थित

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि धवन की पूर्व पत्नी ने दिल्ली की फैमिली कोर्ट के सामने पेश होने का फैसला नहीं किया। उनके इस निर्णय की वजह से यह मामला एकतरफा यानी पूरी तरह धवन के पक्ष में सुनवाई के आधार पर आगे बढ़ा। कोर्ट ने माना कि चूंकि पूर्व पत्नी ने भारतीय अदालत में अपना पक्ष रखने से मना कर दिया इसलिए धवन का पक्ष बिना किसी चुनौती के स्थापित हो गया।

5.72 करोड़ वापसी और 9 प्रतिशत ब्याज का आदेश

न्यायाधीश गर्ग ने अपने आदेश में धवन की पूर्व पत्नी को निर्देश दिया कि वे ऑस्ट्रेलिया में 10 पेजब्रुक रोड, बेरविक स्थित संपत्ति की बिक्री से प्राप्त AU $ 812,397/50 की पूरी राशि शिखर धवन को वापस करें जो इंटरिम प्रॉपर्टी सेटलमेंट के नाम पर ली गई थी। इसके अलावा 6 फॉरेस्ट ड्राइव, क्लाइड नॉर्थ ऑस्ट्रेलिया स्थित दूसरी संपत्ति की बिक्री से जबरदस्ती अपने पास रखे गए AU $ 82,000 भी लौटाने होंगे। यह कुल रकम भारतीय मुद्रा में लगभग 5.72 करोड़ रुपये बनती है। न्यायाधीश ने यह भी आदेश दिया कि इस पूरी राशि पर मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर अंतिम भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

Shikhar Dhawan: कानूनी दृष्टि से यह फैसला क्यों है महत्वपूर्ण

यह फैसला केवल शिखर धवन के व्यक्तिगत मामले तक सीमित नहीं है। यह निर्णय भारतीय कानून की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण नजीर स्थापित करता है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किसी विदेशी अदालत का फैसला भारत में तभी लागू होगा जब वह भारतीय कानूनों, संविधान और सार्वजनिक नीति के अनुरूप हो। अगर विदेशी फैसला भारतीय कानूनी ढांचे से टकराता है तो उसे भारत में मान्यता नहीं दी जाएगी। इस फैसले से उन सभी लोगों को राहत मिलेगी जो विदेशी अदालतों के एकतरफा या दबाव में दिए गए फैसलों के खिलाफ भारत में लड़ाई लड़ रहे हैं।

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