Sheetala Saptami 2026: 10 मार्च को है शीतला सातम, जानें सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और बासी भोजन की अनोखी परंपरा
पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि का आरंभ 9 मार्च 2026 को रात 11 बजकर 27 मिनट पर होगा और इसका समापन 11 मार्च 2026 को रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा।
Sheetala Saptami 2026: होली के रंगों की खुमारी अभी उतरी भी नहीं है कि एक और महत्वपूर्ण पर्व दस्तक दे रहा है। शीतला सप्तमी 2026 इस बार 10 मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी। यह पर्व चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है और इसे शीतला सातम के नाम से भी जाना जाता है। माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली और शुद्धता प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से माता की पूजा करने से चेचक, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों से परिवार की रक्षा होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाएं रखती हैं और पूरे भाव-भक्ति के साथ माता की आराधना करती हैं।
शीतला सप्तमी 2026 की सही तारीख और मुहूर्त
इस साल शीतला सप्तमी को लेकर लोगों के मन में भ्रम है कि यह 10 मार्च को है या 11 मार्च को। तो आइए इसे स्पष्ट कर देते हैं। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि का आरंभ 9 मार्च 2026 को रात 11 बजकर 27 मिनट पर होगा और इसका समापन 11 मार्च 2026 को रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि हो उसी दिन यह पर्व मनाया जाता है। इस हिसाब से शीतला सप्तमी 10 मार्च 2026 मंगलवार को मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 4 मिनट से शाम 5 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। यानी पूरे दिन माता की पूजा-अर्चना की जा सकती है।
Sheetala Saptami 2026: माता शीतला कौन हैं और क्यों होती है इनकी पूजा?
हिंदू धर्म में माता शीतला को अत्यंत महत्वपूर्ण देवी माना गया है। शीतला का अर्थ ही है शीतलता देने वाली यानी जो ताप और रोग से मुक्ति दिलाए। पुराणों के अनुसार माता शीतला गधे पर सवार होती हैं, उनके हाथ में कलश, सूप, झाड़ू और नीम की पत्तियां होती हैं। यह सभी चीजें स्वच्छता और रोग निवारण की प्रतीक हैं। प्राचीन काल में जब चेचक और खसरा जैसी महामारियां फैलती थीं तो माता शीतला की पूजा से लोग सुरक्षा मांगते थे। आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह परंपरा जीवित है और लाखों श्रद्धालु इस दिन माता के मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं।
बासी भोजन की अनोखी परंपरा
शीतला सप्तमी की सबसे अनोखी और विशेष परंपरा बासी भोजन खाने की है। यह इस पर्व को बाकी सभी त्योहारों से बिल्कुल अलग बनाती है। शीतला सप्तमी से एक दिन पहले यानी 9 मार्च को घर में भोजन पका लिया जाता है। इस भोजन में रोटी, पूरी, मीठे चावल, दही, गुड़ और बाजरे की रोटी शामिल होती है। फिर 10 मार्च को यानी शीतला सप्तमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता और यही पहले से बना बासी भोजन माता को अर्पित किया जाता है और परिवार के सभी सदस्य भी यही खाते हैं। इस परंपरा के पीछे मान्यता है कि इस दिन ठंडा और बासी भोजन खाने से शरीर को शीतलता मिलती है और गर्मी के मौसम की शुरुआत में शरीर को इसके लिए तैयार किया जाता है।
Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी की पूजा विधि
शीतला सप्तमी के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान के जल में नीम की पत्तियां डालने का विधान है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके माता शीतला की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन नीम की पत्तियों से माता का अभिषेक करने की विशेष परंपरा है क्योंकि नीम को औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है। पूजा में माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इसके बाद शीतला माता की कथा सुनी जाती है और अंत में माता की आरती की जाती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अनाज दान करने से माता प्रसन्न होती हैं।
शीतला अष्टमी और बासोड़ा पूजा
शीतला सप्तमी के ठीक अगले दिन यानी 11 मार्च 2026 को शीतला अष्टमी मनाई जाएगी। इसे बासोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व उत्तर भारत के राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। बासोड़ा में भी बासी भोजन की परंपरा होती है और माता शीतला की विशेष पूजा की जाती है। कुछ स्थानों पर शीतला सप्तमी की जगह अष्टमी को ही यह पर्व मनाया जाता है। दोनों दिन मिलकर शीतला पूजन का यह पर्व पूरे उत्तर भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
Sheetala Saptami 2026: किन राज्यों में होती है विशेष पूजा
शीतला माता की पूजा पूरे भारत में होती है लेकिन उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन राज्यों में माता शीतला के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान के सांभर में माता शीतला का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। गुजरात में इसे शीतला सातम के नाम से जाना जाता है और यहां इस दिन विशेष मेले भी लगते हैं। उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में महिलाएं सामूहिक रूप से माता की पूजा करती हैं और व्रत रखती हैं।
माता शीतला का यह पर्व न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि इसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी छिपा है। होली के बाद गर्मी की शुरुआत में बासी भोजन खाने और नीम के उपयोग की परंपरा शरीर को मौसम परिवर्तन के लिए तैयार करने का पारंपरिक तरीका है। 10 मार्च को माता शीतला के इस पावन पर्व पर सभी श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करें और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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