पल्सर इंटरनेशनल पेनी स्टॉक का धमाका, 7 साल में 1 लाख बना 14.50 लाख, 1357% रिटर्न देकर निवेशकों को किया मालामाल

2019 में 7 पैसे से 1.02 रुपये तक पहुंचा पेनी स्टॉक, 1 लाख बना 14.50 लाख; लेकिन 2025-26 में 89%+ गिरावट, Q3 FY26 में 535% आय वृद्धि

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Share Market Update: भारतीय शेयर बाजार में पेनी स्टॉक्स हमेशा से निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं। एक रुपये से भी कम कीमत वाले ये शेयर कभी कभी ऐसा प्रदर्शन करते हैं जो किसी सपने से कम नहीं लगता। ऐसा ही एक चमत्कारिक प्रदर्शन पल्सर इंटरनेशनल नामक एक पेनी स्टॉक ने किया है। यह कंपनी का शेयर जो सात साल पहले मार्च 2019 में महज 0.070 रुपये यानी सात पैसे पर कारोबार कर रहा था, वर्तमान में बीएसई पर लगभग 1.02 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है। इस दौरान इस शेयर ने निवेशकों को चौंका देने वाला 1357 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है।

सरल शब्दों में कहें तो यदि किसी निवेशक ने मार्च 2019 में इस कंपनी के शेयरों में मात्र एक लाख रुपये का निवेश किया होता और इन शेयरों को सात साल तक होल्ड किया होता तो आज उसका निवेश बढ़कर लगभग 14.50 लाख रुपये से अधिक हो जाता। यह एक अविश्वसनीय रिटर्न है जो दर्शाता है कि सही समय पर सही शेयर चुनने से कितना बड़ा लाभ हो सकता है। हालांकि यह कहानी का केवल एक पहलू है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने समग्र रूप से निवेशकों को मजबूत और स्थिर रिटर्न दिए हैं।

घरेलू संस्थागत निवेश यानी डीआईआई में लगातार बढ़ोतरी, कंपनियों की बेहतर तिमाही कमाई और रिटेल निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। लेकिन जैसा कि हर निवेशक जानता है, शेयर बाजार में जितनी तेजी से ऊपर जाने की संभावना होती है उतनी ही तेजी से नीचे गिरने का जोखिम भी रहता है। पल्सर इंटरनेशनल की कहानी इसी सच्चाई को उजागर करती है।

Share Market Update: 2019 से 2024 तक लगातार तेजी

पल्सर इंटरनेशनल का शेयर बाजार में प्रदर्शन शुरुआत से ही दिलचस्प रहा है। मार्च 2019 में जब यह शेयर केवल 0.070 रुपये पर कारोबार कर रहा था, तब बहुत कम लोगों ने इस पर ध्यान दिया होगा। आखिरकार एक रुपये से भी कम कीमत वाले शेयरों को अक्सर जोखिम भरा और अस्थिर माना जाता है। लेकिन जिन निवेशकों ने इस कंपनी में विश्वास किया और निवेश किया, उन्हें अगले कुछ वर्षों में शानदार रिटर्न मिला। ट्रेंडलाइन के आंकड़ों के अनुसार यह शेयर लगातार छह वर्षों तक ऊपर की ओर चढ़ता रहा। हर साल इसकी कीमत में वृद्धि होती रही।

निवेशक जो इस यात्रा में शामिल रहे, उन्होंने अपनी संपत्ति में कई गुना वृद्धि देखी। पिछले पांच वर्षों में ही इस पेनी स्टॉक ने लगभग 920 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यानी पांच साल पहले यदि किसी ने एक लाख रुपये निवेश किए होते तो वे बढ़कर लगभग 10.20 लाख रुपये हो जाते। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। 2019 में लिस्टिंग के बाद से लेकर 2024 तक कुल मिलाकर इस शेयर में 1357 प्रतिशत से भी अधिक की तेजी दर्ज की गई। यह एक मल्टीबैगर स्टॉक का शानदार उदाहरण है। मल्टीबैगर वे स्टॉक होते हैं जो अपने निवेशकों को कई गुना रिटर्न देते हैं।

2025 में आया बड़ा झटका

लेकिन जैसा कि अक्सर शेयर बाजार में होता है, तेजी के बाद गिरावट भी आती है। पल्सर इंटरनेशनल के शेयर के साथ भी यही हुआ। जो शेयर छह साल तक लगातार ऊपर चढ़ता रहा, वह 2025 में अचानक तेजी से गिरने लगा। लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में इस शेयर में 89 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह एक चौंकाने वाली गिरावट थी। जिन निवेशकों ने इस शेयर को उच्च स्तर पर खरीदा था, उन्हें भारी नुकसान हुआ। उदाहरण के लिए यदि किसी ने 2024 के अंत में जब शेयर अपने उच्चतम स्तर पर था तब एक लाख रुपये का निवेश किया होता तो 2025 के अंत तक उसकी पूंजी घटकर केवल 11 हजार रुपये रह गई होती।

यह दर्शाता है कि पेनी स्टॉक्स में निवेश कितना जोखिम भरा हो सकता है। गिरावट का सिलसिला 2025 में ही नहीं रुका। 2026 में भी यह जारी रहा। 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक यानी मध्य फरवरी तक शेयर 42.37 प्रतिशत और टूट चुका है। 16 फरवरी 2026 को यह शेयर लगभग 4.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.02 रुपये पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक महीने में इस शेयर में 60 प्रतिशत की गिरावट आई है। छह महीनों में यह गिरावट 50 प्रतिशत से भी अधिक है। यह स्पष्ट है कि शॉर्ट टर्म यानी अल्पकालिक निवेशकों के लिए यह स्टॉक बेहद अस्थिर और जोखिम भरा साबित हुआ है।

Share Market Update: Q3 FY26 में जबरदस्त कमाई

पल्सर इंटरनेशनल की कहानी और भी दिलचस्प हो जाती है जब हम कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों को देखते हैं। कंपनी ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही यानी Q3 FY26 के नतीजे 14 फरवरी 2026 को जारी किए। ये नतीजे आंकड़ों के लिहाज से काफी मजबूत और प्रभावशाली थे। कंपनी की तीसरी तिमाही में परिचालन आय बढ़कर 40 करोड़ रुपये रही। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह केवल 6.3 करोड़ रुपये थी। इसका मतलब है कि सालाना आधार पर लगभग 535 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह एक बहुत बड़ी छलांग है।

तिमाही आधार पर भी यानी QoQ पर 400 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई क्योंकि Q2 FY26 में आय केवल 8 करोड़ रुपये थी। कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी बहुत प्रभावशाली रहा। FY26 की तीसरी तिमाही में नेट प्रॉफिट बढ़कर 3.29 करोड़ रुपये हो गया। FY25 की तीसरी तिमाही में यह केवल 0.66 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर 398 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। तिमाही दर तिमाही आधार पर तो वृद्धि और भी चौंकाने वाली रही। Q2 FY26 में मुनाफा केवल 0.18 करोड़ रुपये था जो Q3 में बढ़कर 3.29 करोड़ रुपये हो गया। यह 1728 प्रतिशत की तेज छलांग है।

मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर में गिरावट क्यों

यहां एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है। जब कंपनी के तिमाही नतीजे इतने मजबूत हैं, आय और मुनाफे में इतनी बड़ी वृद्धि हो रही है, तो फिर शेयर की कीमत में इतनी भारी गिरावट क्यों आ रही है? यह सवाल हर निवेशक के मन में आता है। इसका जवाब शेयर बाजार की जटिल प्रकृति में छिपा है। शेयर बाजार केवल वर्तमान आंकड़ों पर प्रतिक्रिया नहीं देता। वह भविष्य की संभावनाओं, जोखिमों, बाजार की धारणा और कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। पल्सर इंटरनेशनल के मामले में कुछ संभावित कारण हो सकते हैं।

पहला यह हो सकता है कि निवेशकों को कंपनी के व्यवसाय मॉडल की दीर्घकालिक स्थिरता पर संदेह है। दूसरा यह कि पेनी स्टॉक्स में अक्सर अटकलबाजी और सट्टेबाजी ज्यादा होती है। जब शेयर 2019 से 2024 तक लगातार बढ़ रहा था तो कई सट्टेबाज निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया होगा। 2025 में जब बाजार की धारणा बदली तो सभी ने एक साथ बेचना शुरू कर दिया जिससे कीमत तेजी से गिरी। तीसरा कारण यह हो सकता है कि समग्र बाजार परिस्थितियां भी प्रभावित कर रही हों। यह भी संभव है कि कंपनी के फंडामेंटल्स में कोई अन्य कमजोरी हो जो केवल तिमाही नतीजों से नजर नहीं आती। यह घटना यह संकेत देती है कि शेयर बाजार सिर्फ आंकड़ों पर नहीं बल्कि धारणा, भविष्य की उम्मीदों और जोखिम मूल्यांकन पर भी प्रतिक्रिया देता है।

Share Market Update: निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सबक और सावधानियां

पल्सर इंटरनेशनल की कहानी निवेशकों के लिए कई महत्वपूर्ण सबक लेकर आती है। पहला सबक यह है कि पेनी स्टॉक्स में तेज और बड़े रिटर्न की संभावना जरूर होती है लेकिन इनमें अस्थिरता और जोखिम भी उतना ही अधिक होता है। दूसरा सबक यह है कि केवल अच्छे तिमाही नतीजे ही शेयर की कीमत बढ़ाने के लिए काफी नहीं हैं। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स की गहराई से जांच करनी चाहिए। प्रमोटर का ट्रैक रिकॉर्ड देखना चाहिए। व्यवसाय मॉडल की स्थिरता समझनी चाहिए। तीसरा महत्वपूर्ण सबक यह है कि केवल सीमित पूंजी ही ऐसे हाई रिस्क शेयरों में लगानी चाहिए।

अपना सारा पैसा एक ही पेनी स्टॉक में लगाना बेहद खतरनाक हो सकता है। चौथा सबक यह है कि शॉर्ट टर्म की बजाय लॉन्ग टर्म नजरिया रखना चाहिए। पांचवां और बहुत महत्वपूर्ण सबक है स्टॉप लॉस का उपयोग। जब आप किसी शेयर में निवेश करते हैं तो एक स्टॉप लॉस लेवल तय कर लें। यदि शेयर उस स्तर से नीचे जाए तो तुरंत बेच दें। छठा सबक है पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन। अपने निवेश को विभिन्न शेयरों, सेक्टर्स और एसेट क्लास में बांटें। पल्सर इंटरनेशनल का सफर दिखाता है कि मल्टीबैगर बनना संभव है लेकिन उतनी ही तेजी से पूंजी में भारी गिरावट भी आ सकती है। इसलिए समझदारी, धैर्य, अनुशासन और संतुलित रणनीति ही सफल निवेश की कुंजी है।

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