शेयर बाजार में इस हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव संभव, AI की चिंता और ग्लोबल ट्रेंड तय करेंगे मार्केट की चाल

WPI डेटा, व्यापार संतुलन, HSBC PMI और बैंक लोन आंकड़े होंगे अहम, FII की गतिविधि पर रहेगी नजर, सेक्टर रोटेशन की संभावना

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Share Market Update: भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण और उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है। पिछले हफ्ते सेंसेक्स में 953 अंकों से अधिक की गिरावट के बाद निवेशकों में सतर्कता का माहौल है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, बड़ी रैली की उम्मीद कम है। इस सप्ताह कई महत्वपूर्ण घरेलू आर्थिक आंकड़े जारी होंगे, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर रहेगा और सबसे बड़ी चिंता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी आशंकाओं को लेकर है। दलाल स्ट्रीट पर आने वाले दिन निवेशकों के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि किन कारकों से तय होगी बाजार की दिशा और निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Share Market Update: पिछला हफ्ता बाजार के लिए रहा निराशाजनक

आने वाले सप्ताह की संभावनाओं को समझने के लिए पहले पिछले हफ्ते के प्रदर्शन पर नजर डालना जरूरी है। बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। BSE सेंसेक्स 953 अंकों से अधिक टूटा और सप्ताह के अंत में लगभग 75,800 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी करीब 280-300 अंकों की गिरावट के साथ 23,000 के नीचे आ गया। यह गिरावट मुख्य रूप से तीन कारकों से प्रेरित थी:

1. AI से जुड़ी आशंकाएं: वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावसायिक मॉडल और इसकी दीर्घकालिक लाभप्रदता को लेकर सवाल उठे हैं। कुछ प्रमुख टेक कंपनियों ने AI निवेश पर चिंता जताई, जिससे वैश्विक टेक शेयरों में बिकवाली हुई। भारतीय आईटी सेक्टर, जो वैश्विक टेक ट्रेंड से सीधे जुड़ा है, इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ। इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट आई।

2. मजबूत अमेरिकी रोजगार डेटा: अमेरिका में जनवरी के रोजगार आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए। इससे संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और फेडरल रिजर्व को जल्द ब्याज दरें घटाने की जरूरत नहीं है। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर होने से वैश्विक इक्विटी बाजारों पर दबाव बना।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: FII (विदेशी संस्थागत निवेशक) ने पिछले हफ्ते भारतीय बाजारों से पैसा निकाला। वैश्विक अनिश्चितता और बेहतर रिटर्न की तलाश में FII ने बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा।

इस हफ्ते जारी होने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े

आने वाला सप्ताह घरेलू आर्थिक डेटा के लिहाज से काफी व्यस्त रहेगा। कई महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होंगे जो बाजार की दिशा तय करेंगे:

1. थोक मूल्य सूचकांक (WPI – Wholesale Price Index): जनवरी 2026 के लिए WPI आंकड़े जारी होंगे। यह थोक स्तर पर महंगाई को मापता है। अगर WPI बढ़ता है तो यह खुदरा महंगाई (CPI) में भी वृद्धि का संकेत हो सकता है, जो RBI की मौद्रिक नीति को प्रभावित करेगा। उच्च महंगाई का मतलब है कि RBI ब्याज दरें घटाने में और देरी कर सकता है।

2. व्यापार संतुलन (Trade Balance): जनवरी के निर्यात-आयात आंकड़े आएंगे। यह दिखाएगा कि भारत का व्यापार घाटा (आयात-निर्यात का अंतर) कितना है। व्यापक व्यापार घाटा रुपये पर दबाव डालता है और चालू खाता घाटे को बढ़ाता है। बेहतर निर्यात आंकड़े सकारात्मक संकेत होंगे।

3. HSBC Flash PMI (Manufacturing and Services): यह आंकड़े विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का अग्रिम संकेत देते हैं। PMI यदि 50 से ऊपर होता है तो विस्तार दर्शाता है, नीचे होने पर संकुचन। मजबूत PMI आर्थिक मजबूती का संकेत है और बाजार के लिए सकारात्मक है।

4. बैंक लोन वृद्धि (Bank Credit Growth): यह दिखाएगा कि बैंकिंग सिस्टम कितनी तेजी से कर्ज दे रहा है। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ का मतलब है कि व्यवसाय और उपभोक्ता उधार ले रहे हैं, जो आर्थिक गतिविधि का अच्छा संकेत है। कमजोर ग्रोथ मांग में सुस्ती दर्शाएगी।

इन सभी आंकड़ों पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। सकारात्मक डेटा बाजार में तेजी ला सकता है, जबकि निराशाजनक आंकड़े गिरावट का कारण बन सकते हैं।

Share Market Update: वैश्विक कारक जो प्रभावित करेंगे बाजार

घरेलू आंकड़ों के अलावा, कई वैश्विक कारक भी भारतीय बाजार को प्रभावित करेंगे:

1. FOMC मिनट्स: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की पिछली बैठक के मिनट्स (विस्तृत कार्यवृत्त) जारी होंगे। इससे पता चलेगा कि फेड के सदस्यों ने ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था पर क्या चर्चा की। अगर मिनट्स हॉकिश (सख्त) रुख दिखाते हैं, तो वैश्विक बाजारों में गिरावट आ सकती है। डोविश (नरम) रुख सकारात्मक होगा।

2. अमेरिकी श्रम बाजार की मजबूती: पिछले हफ्ते के मजबूत रोजगार आंकड़ों का असर इस हफ्ते भी रहेगा। बाजार यह आकलन करेगा कि क्या फेड इस साल ब्याज दरें घटाएगा या नहीं। फिलहाल मार्च में कटौती की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है।

3. यूरोप और चीन की स्थिति: यूरोपीय बाजारों में कमजोरी और चीन की आर्थिक चुनौतियां वैश्विक भावना को प्रभावित करती हैं। चीन की धीमी रिकवरी वैश्विक मांग को कमजोर करती है, जो भारतीय निर्यातकों को प्रभावित करती है।

4. कच्चे तेल की कीमतें: क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से भारत की आयात बिल बढ़ता है और महंगाई का दबाव बनता है। तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट सकारात्मक होगी।

AI की चिंता क्यों बनी बड़ा मुद्दा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी आशंकाएं पिछले हफ्ते वैश्विक बाजारों में गिरावट का सबसे बड़ा कारण बनीं। AI में भारी निवेश के बावजूद, कुछ प्रमुख टेक कंपनियों ने चिंता जताई कि AI से तत्काल राजस्व और मुनाफे में उतनी वृद्धि नहीं हो रही जितनी उम्मीद थी। कुछ विश्लेषकों ने सवाल उठाया कि क्या AI में हो रहा अरबों डॉलर का निवेश वाकई सही है या यह एक “बुलबुला” है जो फूट सकता है।

इस चिंता से वैश्विक टेक शेयरों में बिकवाली हुई। अमेरिका में Nvidia, Microsoft, Google जैसे AI में भारी निवेश करने वाले शेयरों में गिरावट आई। भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी टेक सेक्टर से जुड़ी हैं – वे इन कंपनियों को सेवाएं देती हैं या उनके साथ साझेदारी करती हैं। इसलिए वैश्विक टेक में कमजोरी का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी पड़ा।

हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह चिंता अस्थायी है। AI एक दीर्घकालिक रुझान है और शुरुआती चरण में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। लेकिन जब तक स्पष्टता नहीं आती, यह मुद्दा बाजार को प्रभावित करता रहेगा।

Share Market Update: सेक्टर रोटेशन की संभावना

वर्तमान परिस्थितियों में, बाजार में सेक्टर रोटेशन देखने को मिल सकता है। यानी निवेशक कुछ कमजोर सेक्टरों से पैसा निकालकर मजबूत सेक्टरों में लगा सकते हैं:

कमजोर रह सकते हैं: आईटी और मेटल सेक्टर पर बाहरी दबाव जारी रह सकता है। AI की चिंता से आईटी और वैश्विक मांग में कमी से मेटल प्रभावित हो सकते हैं।

मजबूती दिखा सकते हैं: बैंकिंग, ऑटो और घरेलू खपत आधारित सेक्टर (FMCG, रिटेल) बाजार की अगुवाई कर सकते हैं। ये सेक्टर घरेलू अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं और वैश्विक उतार-वढ़ाव से कम प्रभावित होते हैं। भारत की GDP वृद्धि दर अच्छी है और घरेलू मांग मजबूत है, जो इन सेक्टरों को समर्थन देते हैं।

निवेशकों के लिए रणनीति

इस अनिश्चितता भरे माहौल में निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए:

  1. सतर्क रहें: बड़े दांव लगाने से बचें। स्पष्ट संकेत मिलने तक प्रतीक्षा करें।

  2. गुणवत्ता पर ध्यान दें: मजबूत बैलेंस शीट, अच्छे कैश फ्लो और सिद्ध बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों में निवेश करें।

  3. विविधीकरण: सभी अंडे एक टोकरी में न रखें। विभिन्न सेक्टरों में निवेश फैलाएं।

  4. दीर्घकालिक नजरिया: अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं। भारत की दीर्घकालिक कहानी मजबूत है।

Share Market Update: निष्कर्ष

आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। घरेलू आर्थिक आंकड़े, वैश्विक ट्रेंड और AI की चिंता तीनों मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को सतर्क रहने और गुणवत्ता पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। व्यापक सूचकांक सीमित दायरे में कारोबार कर सकते हैं, लेकिन चुनिंदा शेयरों में अवसर बने रह सकते हैं।

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