शेयर बाजार पर मंडराया मिडल-ईस्ट युद्ध का साया: निफ्टी में 500-600 अंकों की गिरावट संभव, जानें किन सेक्टर के शेयरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
इजरायल-US हमलों के बाद मिडल-ईस्ट युद्ध से भारतीय बाजार पर असर, सोमवार को गैप-डाउन ओपनिंग संभावित, ऑयल-एयरलाइन सेक्टर सबसे प्रभावित
Share Market Outlook: शनिवार को ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद पूरे मिडल-ईस्ट में आग की लपटें तेज हो गई हैं और इसकी सीधी आंच अब भारतीय शेयर बाजार तक पहुंचती दिख रही है। जहां एक तरफ दुबई, बहरीन, सऊदी अरब और ओमान पर ईरानी मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनियाभर के निवेशकों में डर और घबराहट का माहौल बन गया है। इस बीच दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट संदीप जैन ने भारतीय शेयर बाजार पर पड़ने वाले असर को लेकर बड़ी और महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उनका कहना है कि सोमवार को बाजार में एक बड़ी गिरावट तय है और निफ्टी 50 में 500 से 600 अंकों तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मिडल-ईस्ट में जैसे ही हालात सामान्य होंगे, बाजार में जोरदार वापसी होगी।
Share Market Outlook: मिडल-ईस्ट की जंग से भारतीय बाजार पर कितना असर
मिडल-ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट संदीप जैन का कहना है कि सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आना तय है। उन्होंने साफ कहा कि इस गिरावट की गहराई और अवधि मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगी कि मिडल-ईस्ट में हालात कितने दिनों तक बिगड़े रहते हैं। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो बाजार पर दबाव बना रहेगा और अगर जल्दी शांति लौटी तो बाजार तेजी से रिकवर कर लेगा।
संदीप जैन का मानना है कि मिडल-ईस्ट तनाव की वजह से अगले 3 से 4 दिनों तक बाजार में बिकवाली का माहौल रह सकता है। निफ्टी 50 के लिए 24,500 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट लेवल साबित हो सकता है जहां से बाजार को सहारा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में हो रहे नए-नए बदलावों की वजह से बाजार में काफी करेक्शन आ चुका है, इसलिए अब बहुत बड़ी और भारी गिरावट की गुंजाइश सीमित है।
निफ्टी में 500-600 अंकों की गिरावट का अनुमान
मार्केट एक्सपर्ट संदीप जैन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि निफ्टी 50 में निकट भविष्य में 500 से 600 अंकों तक की गिरावट देखी जा सकती है। यह गिरावट एक झटके में भी आ सकती है और कुछ दिनों में भी फैली हो सकती है। यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में मिडल-ईस्ट में हालात किस दिशा में जाते हैं।
यहां यह जानना जरूरी है कि पिछले हफ्ते ही शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। बीएसई का बेंचमार्क सेंसेक्स 961.42 अंकों यानी करीब 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,287.19 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 317.90 अंकों यानी 1.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,178.65 के स्तर पर बंद हुआ था। पूरे पिछले हफ्ते की बात करें तो सेंसेक्स में कुल 1,527.52 अंक यानी करीब 1.84 प्रतिशत का नुकसान दर्ज हुआ। इसके ऊपर से अब मिडल-ईस्ट युद्ध का अतिरिक्त दबाव भी आ गया है।
Share Market Outlook: इन सेक्टरों के शेयरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा
संदीप जैन ने बताया कि मिडल-ईस्ट में बिगड़ते हालात की वजह से कई सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
ऑयल और एनर्जी सेक्टर: मिडल-ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना तय है। इससे तेल कंपनियों के शेयरों पर दबाव बनेगा।
एयरलाइन सेक्टर: दुबई, बहरीन, अबू धाबी और रियाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डे बंद हो गए हैं या उड़ानें रद्द हो रही हैं। इससे एयरलाइन कंपनियों के शेयरों पर सीधा बुरा असर पड़ेगा।
पेंट और टायर सेक्टर: कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेंट और टायर बनाने वाली कंपनियों की इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल की लागत बढ़ जाएगी जिससे उनके मुनाफे पर दबाव आएगा।
डिफेंस सेक्टर: युद्ध के माहौल में रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
इसके अलावा संदीप जैन ने यह भी कहा कि इस पूरे माहौल में भारतीय रुपया भी कमजोर पड़ सकता है क्योंकि जब भी वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक डॉलर की तरफ भागते हैं और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव आता है।
पहले से चुनौतीपूर्ण था IT सेक्टर का हाल
मिडल-ईस्ट युद्ध से पहले ही भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर के लिए समय अच्छा नहीं चल रहा था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में हो रहे नए-नए बदलावों और वैश्विक टेक कंपनियों की चुनौतियों की वजह से फरवरी महीने में निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 20 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में अब मिडल-ईस्ट युद्ध का बोझ भी बाजार के ऊपर आ गया है।
Share Market Outlook: OPEC+ ने बढ़ाया उत्पादन, लेकिन राहत कम
इस बीच एक राहत की खबर भी आई है। तेल उत्पादक देशों के प्रमुख समूह OPEC+ ने ऐलान किया है कि वह अप्रैल में प्रतिदिन 2 लाख 6 हजार बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन करेगा। इसका मकसद मिडल-ईस्ट युद्ध की वजह से तेल बाजार में आने वाली उठापटक को काबू में रखना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान का तेल उत्पादन और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली सप्लाई बाधित हुई तो OPEC+ के इस कदम से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद कम है।
भारत-ईरान व्यापार पर भी असर
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत ईरान से सूखे मेवे, पेट्रोलियम पदार्थ समेत कई जरूरी सामान का आयात करता है। इस युद्ध की वजह से भारत का ईरान के साथ होने वाला अरबों रुपये का व्यापार अटक सकता है। इसका असर देश के आम आदमी की जेब पर भी पड़ने की आशंका है। इसके अलावा मिडल-ईस्ट में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
Share Market Outlook: शांति लौटते ही होगा जोरदार बाउंस-बैक
एक्सपर्ट संदीप जैन ने निवेशकों के लिए एक उम्मीद की किरण भी दिखाई। उनका कहना है कि जैसे ही मिडल-ईस्ट में शांति लौटेगी, शेयर बाजार में एक बड़ा बाउंस-बैक देखने को मिलेगा और बाजार काफी हद तक अपना नुकसान वापस कमा लेगा। इसलिए घबराहट में बिकवाली करने की बजाय समझदारी से निर्णय लेना जरूरी है। जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेशित हैं उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
कुल मिलाकर आने वाले कुछ दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाले रहने वाले हैं। मिडल-ईस्ट में हालात किस दिशा में जाते हैं, यही तय करेगा कि बाजार की चाल आगे कैसी रहेगी।
नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
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