Share Market Highlight: FII बिकवाली का तूफान, अप्रैल के 10 दिनों में ₹48,213 करोड़ की निकासी, 2026 में कुल ₹1.8 लाख करोड़ बाहर, भारतीय बाजार पर कितना गहरा है संकट?

अप्रैल के 10 दिनों में भारी बिकवाली, कुल ₹1.8 लाख करोड़ निकासी, जानें बाजार पर असर और वजह

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Share Market Highlight: भारतीय शेयर बाजार इन दिनों एक बड़े संकट से गुजर रहा है। वह संकट है विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार और आक्रामक बिकवाली का। जो निवेशक कुछ महीने पहले तक भारत को एक आकर्षक उभरते बाजार के रूप में देखते थे वे अब तेजी से यहां से पैसा निकाल रहे हैं। यह बिकवाली न केवल बाजार के आम निवेशकों के लिए बल्कि पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत है।

अप्रैल 2026 में FII की बिकवाली का आंकड़ा कितना बड़ा है?

अप्रैल 2026 के महज पहले 10 दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 48,213 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। यह आंकड़ा इसलिए और अधिक चिंताजनक है क्योंकि महीना अभी पूरा भी नहीं हुआ है। यदि यही गति जारी रही तो अप्रैल में कुल निकासी मार्च के आंकड़े को भी पार कर सकती है।

मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी जो अब तक का किसी एक महीने में सबसे बड़ा आउटफ्लो माना जा रहा है। वहीं फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये के निवेश के बाद अचानक आई यह गिरावट बाजार के लिए एक बड़े झटके की तरह है। वर्ष 2026 में अब तक कुल FII निकासी 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है जो एक अत्यंत गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

FII बिकवाली की मुख्य वजहें क्या हैं?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस भारी बिकवाली के पीछे कई एकसाथ सक्रिय कारण हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है जिससे वैश्विक महंगाई की चिंता फिर से गहरी हो गई है। भारत जैसे देश जो अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करते हैं उनके लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती है।

ऊर्जा संकट और रुपये की कमजोरी भी FII की बिकवाली की बड़ी वजह बनकर सामने आई है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है तो विदेशी निवेशकों को डॉलर में उनके निवेश का रिटर्न कम हो जाता है। इससे उनकी वास्तविक कमाई घट जाती है और वे अपना पैसा और स्थिर मुद्राओं वाले बाजारों में ले जाना पसंद करते हैं। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता को काफी कम कर दिया है।

FII का पैसा भारत से निकलकर कहां जा रहा है?

बाजार विश्लेषकों के अनुसार विदेशी निवेशक अब दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। इन बाजारों में उन्हें बेहतर ग्रोथ की संभावना दिख रही है। इसके मुकाबले भारत में FY27 के लिए विकास दर का अनुमान थोड़ा कमजोर माना जा रहा है। Moody’s जैसी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भी हाल में भारत के FY27 विकास अनुमान को घटाकर 6 प्रतिशत किया है जिसका असर निवेशकों की भावना पर पड़ा है।

सुरक्षित निवेश की तलाश में विदेशी निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी और अन्य सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में भी पैसा लगा रहे हैं। जब भी वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो पूंजी उभरते बाजारों से निकलकर विकसित बाजारों में चली जाती है। यही प्रक्रिया इस समय भारतीय बाजार में देखी जा रही है।

अमेरिका-ईरान सीजफायर से भी क्यों नहीं मिली राहत?

यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा हुई थी लेकिन इससे FII बिकवाली में कोई खास कमी नहीं आई। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों ने इस राहत का उपयोग और अधिक निकासी के अवसर के रूप में किया। इसका मतलब यह है कि बाजार में मौजूद समझदार निवेशक थोड़ी भी सकारात्मकता आने पर अपनी स्थिति हल्की कर रहे हैं जो एक मंदी की मानसिकता का संकेत है।

इसके अलावा सीजफायर अभी भी अस्थायी है और इस्लामाबाद वार्ता के बाद के घटनाक्रम पर बाजार की नजर टिकी है। यदि शांति वार्ता विफल होती है तो कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछल सकती हैं जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा।

घरेलू निवेशक और DII की क्या है स्थिति?

FII की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने बाजार को गिरने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों के जरिए घरेलू निवेश ने FII की बिकवाली को काफी हद तक संतुलित किया है। SIP के जरिए आम भारतीय निवेशक हर महीने बाजार में लगातार निवेश करते रहते हैं जो एक मजबूत घरेलू आधार बनाता है।

हालांकि यह राहत अस्थायी है। यदि FII बिकवाली इसी गति से जारी रही तो घरेलू निवेशकों के लिए इसे पूरी तरह संतुलित करना मुश्किल हो जाएगा। रिटेल निवेशकों में बढ़ती टेंशन इस बात का संकेत है कि आम निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा है।

FII बिकवाली का रुख कब बदल सकता है?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेश का रुख तब बदल सकता है जब कुछ महत्वपूर्ण परिस्थितियां एकसाथ सुधरें। पहला, वैश्विक तनाव का कम होना जरूरी है खासकर मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की स्थापना। दूसरा, रुपये की स्थिरता आनी चाहिए। तीसरा, TCS, इन्फोसिस और HDFC बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के Q4 नतीजे अगर उम्मीद से बेहतर रहे तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है। चौथा, RBI की ब्याज दर नीति और महंगाई के आंकड़े भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

Share Market Highlight: भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों को क्या करना चाहिए?

FII की इस बड़ी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार में एक जटिल और चुनौतीपूर्ण माहौल बना दिया है। 2026 में 1.8 लाख करोड़ रुपये की कुल विदेशी निकासी एक गंभीर चेतावनी है। हालांकि यह भी याद रखना जरूरी है कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाएं अभी भी मजबूत हैं।

दीर्घकालिक निवेशकों को घबराहट में बिकवाली नहीं करनी चाहिए। SIP के जरिए नियमित निवेश जारी रखना और गुणवत्तापूर्ण शेयरों में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाना समझदारी की बात है। अल्पकालिक ट्रेडरों को हर खबर पर बाजार की प्रतिक्रिया को ध्यान से देखते हुए सतर्क रहना होगा।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले SEBI पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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