युद्ध के कारण शेयर बाजार में भूचाल, 2 दिन में निवेशकों के ₹12 लाख करोड़ स्वाहा, HPCL 8.67% धराशायी, ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार, जानें कौन से स्टॉक्स ने सबसे ज्यादा रुलाया
ईरान युद्ध से ब्रेंट क्रूड 112$ पार, सेंसेक्स 1,800+ अंक टूटा, निफ्टी 563 अंक गिरा; HPCL 8.67%, BPCL 8.43%, IOC 7.29% धराशायी, पेंट-बैंकिंग-ऑटो सेक्टर में बिकवाली
Share Market Highlight: मंगलवार 10 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर कोहराम मच गया। पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के दूसरे हफ्ते में प्रवेश करने और कच्चे तेल की कीमतों के 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार का माहौल है। बाजार खुलने के महज 10 मिनट के भीतर निवेशकों की गाढ़ी कमाई के 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक स्वाहा हो गए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों धड़ाम से गिरे और तेल कंपनियों से लेकर पेंट, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर तक हर जगह बिकवाली का तूफान आया। यह महज आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि लाखों परिवारों की बचत, सपनों और भविष्य की योजनाओं पर सीधा वार है।
Share Market Highlight: बाजार में कितनी बड़ी गिरावट?
सोमवार को बाजार खुलते ही जो गिरावट शुरू हुई वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी। दोपहर 12 बजे तक बीएसई सेंसेक्स एक समय 1,800.89 अंकों की गिरावट के साथ 77,118.01 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। एनएसई का निफ्टी भी 563.8 अंकों की जोरदार गिरावट के साथ 23,886.65 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप बीते सत्र के 450 लाख करोड़ रुपये से घटकर 438 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यानी एक ही झटके में 12 लाख करोड़ रुपये की दौलत हवा हो गई।
तेल कंपनियों को सबसे बड़ा झटका
इस गिरावट में सबसे बुरा हाल तेल विपणन कंपनियों यानी OMC का रहा। जब कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूती हैं तो इन कंपनियों को महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीदकर सस्ते दाम पर बेचना पड़ता है जिससे उनके मुनाफे पर सीधी चोट पड़ती है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी HPCL के शेयर 8.67 फीसदी गिर गए। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी BPCL के शेयरों में 8.43 फीसदी की भारी गिरावट आई। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी IOC के शेयर भी 7.29 फीसदी टूट गए।
Share Market Highlight: पेंट कंपनियां भी बेहाल
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर केवल तेल कंपनियों पर नहीं पड़ता। पेंट बनाने में पेट्रोकेमिकल उत्पादों का भारी इस्तेमाल होता है इसलिए कच्चे तेल के महंगा होते ही पेंट कंपनियों की लागत बढ़ जाती है और निवेशक उनके शेयर बेचने लगते हैं। एशियन पेंट्स के शेयर 5.12 फीसदी गिरे। इंडिगो पेंट्स में 4.83 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। बर्जर पेंट्स इंडिया के शेयर 4.80 फीसदी लुढ़के और कंसाई नेरोलैक पेंट्स के शेयर 4.72 फीसदी तक गिर गए।
लार्जकैप और मिडकैप दोनों धराशायी
बाजार की इस आंधी ने लार्जकैप और मिडकैप दोनों श्रेणियों के शेयरों को बराबर रूप से तहस-नहस किया। बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में इंडिगो के शेयर 8 फीसदी गिरे जो सबसे अधिक रहा। एसबीआई के शेयर 5.90 फीसदी टूटे। टाटा स्टील में 4.99 फीसदी, एशियन पेंट्स में 4.71 फीसदी, एलएंडटी में 4.7 फीसदी, मारुति में 4.67 फीसदी, एक्सिस बैंक में 4.02 फीसदी और अदानी पोर्ट्स में 3.80 फीसदी की गिरावट आई।
मिडकैप सेगमेंट में हिंदुस्तान पेट्रोलियम 7.20 फीसदी, अशोक लेलैंड 5.10 फीसदी, फेडरल बैंक 4.60 फीसदी, भारत फोर्ज 4.50 फीसदी, पेटीएम 4.40 फीसदी और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 3.80 फीसदी की गिरावट में कारोबार कर रहे थे।
Share Market Highlight: ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार
इस पूरी तबाही की जड़ में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें हैं जो 24.71 फीसदी उछलकर 112.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने और मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों जैसे कुवैत और इराक के उत्पादन में भारी कटौती के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इराक का उत्पादन 4.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर मात्र 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है यानी 70 फीसदी की कटौती। इस वजह से वैश्विक बाजार में तेल की कमी है और कीमतें आसमान छू रही हैं।
एक्सपर्ट की राय – अभी और तूफान आ सकता है
शेयर बाजार विशेषज्ञ सुनील शाह ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें वापस 75 डॉलर के आसपास नहीं आतीं और पश्चिम एशिया में स्थिति शांत नहीं होती या कोई समझौता नहीं होता तब तक बाजार का ऊपर जाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि बीच-बीच में तकनीकी उछाल यानी टेक्निकल रिबाउंड देखने को मिल सकता है लेकिन बाजार की मूल प्रवृत्ति यानी अंडरटोन अभी भी कमजोर यानी बेयरिश बनी हुई है।
सुनील शाह ने एक और महत्वपूर्ण बात कही। उनके अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 70 से 75 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का देश की जीडीपी वृद्धि पर सीधा असर पड़ता है। अगर जीडीपी वृद्धि कमजोर रही तो कॉर्पोरेट इंडिया की कमाई घटेगी और शेयर बाजार पर और दबाव बढ़ेगा।
Share Market Highlight: निवेशक क्या करें?
ऐसे माहौल में घबराकर शेयर बेचना सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लंबी अवधि के निवेशक धैर्य बनाए रखें। जो लोग नया निवेश करना चाहते हैं उनके लिए यह गिरावट अच्छे शेयर सस्ते में खरीदने का मौका भी हो सकती है लेकिन बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करना समझदारी है। फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी है।
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