यौन उत्पीड़न मामले में घिरे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल की अग्रिम जमानत याचिका, पुलिस कर रही है विवेचना
POCSO सहित गंभीर धाराओं में FIR, यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे स्वामी
Swami Avimukteshwarananda Sarswati: धार्मिक जगत से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। यह याचिका अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से दाखिल की गई है। इस याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है।
Swami Avimukteshwarananda Sarswati: कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
इस मामले की शुरुआत तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से की गई शिकायत से हुई। आशुतोष ब्रह्मचारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के अंतर्गत जिला न्यायालय में एक अर्जी दाखिल की थी। इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए एडीजे रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने और विवेचना करने का आदेश दिया।
कोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में झूंसी थाना पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और दो से तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना भी शुरू कर दी है।
Swami Avimukteshwarananda Sarswati: किन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर?
झूंसी थाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर अत्यंत गंभीर धाराओं के तहत है। इसमें भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 351(3) के साथ-साथ लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम यानी POCSO की धारा 5(l), 6, 3, 4(2), 16 और 17 शामिल हैं। POCSO की धाराएं नाबालिग बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित हैं और इन धाराओं के तहत सजा अत्यंत कठोर होती है। इन्हीं गंभीर धाराओं को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल करना जरूरी समझा।
Swami Avimukteshwarananda Sarswati: कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। वह धार्मिक मामलों पर अपने स्पष्ट और कई बार विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी वह कई धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा में रह चुके हैं। उनका यह मामला न केवल न्यायिक बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है।
Swami Avimukteshwarananda Sarswati: आरोप लगाने वाले पर भी है FIR
इस मामले में एक और पहलू सामने आया है। राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दावा किया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ भी पूर्व में एफआईआर दर्ज है। इस दावे के बाद मामला और अधिक पेचीदा हो गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
Swami Avimukteshwarananda Sarswati: आगे क्या होगा?
अब सारी निगाहें इलाहाबाद हाई कोर्ट पर टिकी हैं जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। यदि हाई कोर्ट अग्रिम जमानत देता है, तो पुलिस उनसे पूछताछ तो कर सकती है लेकिन गिरफ्तार नहीं। यदि याचिका खारिज होती है, तो पुलिस उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है। इसके साथ ही झूंसी पुलिस की विवेचना भी जारी है और मामले के तथ्य धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।
यह मामला धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है और इसकी न्यायिक प्रक्रिया पर देशभर की नजर बनी रहेगी।
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