Shambhu Hostel Case: पटना NEET छात्रा मौत मामले में AIIMS ने कहा- अधूरे दस्तावेज से सच कैसे आएगा सामने, जांच में दिख रहीं बड़ी खामियां

SIT ने अब तक पूरे कागजात नहीं दिए, डॉक्टरों ने कहा- बिना पूरी मेडिकल चेन के राय देना खतरनाक

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Shambhu Hostel Case: पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विशेष जांच टीम (SIT) अब तक एम्स (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड को पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाई है। AIIMS के डॉक्टरों ने साफ कहा है कि अधूरे कागजों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न तो वैज्ञानिक है और न ही नैतिक। यह मामला 6 जनवरी को तब सामने आया था जब छात्रा पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली थी और 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

Shambhu Hostel Case: AIIMS के सामने अधूरी मेडिकल चेन की समस्या

Shambhu Hostel Case
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AIIMS के फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की समीक्षा केवल एक कागज देखकर नहीं की जा सकती। इसके लिए इलाज से लेकर मौत तक की पूरी मेडिकल चेन जरूरी होती है, जो अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना पोस्टमॉर्टम वीडियो, फोरेंसिक रिपोर्ट और पूरे इलाज का रिकॉर्ड देखे राय देना जांच को गलत दिशा में भटका सकता है।

एम्स के डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में एक-एक डॉक्यूमेंट की अहमियत होती है। पूरी मेडिकल हिस्ट्री, अस्पताल में दिए गए इलाज का विवरण, दवाइयों का रिकॉर्ड, टेस्ट रिपोर्ट्स और पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी – सब कुछ मिलकर ही किसी सही निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद करता है।

SIT ने दी DGP को बेसिक रिपोर्ट

हालांकि SIT ने अब तक की पूछताछ के आधार पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट DGP को सौंप दी है। इसमें 15 से 17 लोगों से की गई पूछताछ का जिक्र है, जिसमें अस्पताल कर्मचारी, हॉस्टल स्टाफ और परिजन शामिल हैं। लेकिन मेडिकल रिव्यू के लिए जरूरी दस्तावेज अभी भी अधूरे हैं।

यह स्थिति जांच की गंभीरता (Shambhu Hostel Case) पर सवाल खड़ा करती है। एक तरफ SIT दावा कर रही है कि गहन जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल साक्ष्यों की समीक्षा ही पूरी नहीं हो पा रही है।

Shambhu Hostel Case: PMCH रिपोर्ट ने बदली पूरी दिशा

PMCH की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मामला पूरी तरह पलट गया था। रिपोर्ट में यह कहा गया था कि यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता। शरीर पर चोटों और जबरन यौन संबंध के संकेत मिलने (Shambhu Hostel Case) की बात कही गई, जिससे पुलिस की शुरुआती थ्योरी पर सवाल खड़े हो गए।

शुरुआत में पुलिस ने यूरिन टेस्ट और मोबाइल सर्च हिस्ट्री के आधार पर नींद की दवा खाने की थ्योरी पेश की थी और यौन हिंसा से इनकार किया था। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी और इसके बाद ही FIR दर्ज हुई।

AIIMS रिव्यू पर टिकी पूरी जांच

अब पूरे मामले की दिशा AIIMS की रिव्यू रिपोर्ट पर आकर टिक गई है। यही रिपोर्ट तय करेगी कि PMCH के पोस्टमॉर्टम में उठाए गए सवाल कितने मजबूत हैं और आगे जांच किस दिशा में जाएगी। AIIMS ने इस केस के लिए पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम बनाई है। इसमें फोरेंसिक, गायनाकोलॉजी, न्यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर और विभाग भी जोड़े जा सकते हैं।

लेकिन समस्या यह है कि बिना पूरे दस्तावेजों के ये विशेषज्ञ भी अपनी राय नहीं दे पा रहे हैं। यह स्थिति न केवल जांच को धीमा कर रही है बल्कि सच तक पहुंचने में भी बाधा बन रही है।

Shambhu Hostel Case: परिजनों पर दबाव का आरोप

छात्रा के माता-पिता का आरोप है कि SIT असली आरोपियों की बजाय उन्हें ही शक के दायरे में रखकर बार-बार पूछताछ कर रही है। पिता का कहना है कि पांच बार एक ही तरह के सवाल पूछे जा चुके हैं, जिससे परिवार मानसिक दबाव में है।

परिजनों ने साफ कहा है कि बेटी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थी, लेकिन किसी तरह के तनाव में नहीं थी। घर का माहौल सामान्य था और उसने कभी किसी से खतरे या डर की बात नहीं की। SIT ने छात्रा के मामा और ममेरे भाई से भी पूछताछ की। परिजनों का कहना है कि इन रिश्तों को गलत एंगल से देखा जा रहा है, जबकि बातचीत बिल्कुल सामान्य पारिवारिक थी।

जांच में दिख रही बड़ी खामियां

अब तक की जांच में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। हॉस्टल संचालक (Shambhu Hostel Case) को रिमांड पर नहीं लिया गया है। हॉस्टल मालिक और उसका बेटा फरार बताए जा रहे हैं, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई है। सबसे अहम सवाल यह है कि छात्रा को हॉस्टल से अस्पताल किसने और कब ले जाया। इसका जवाब CCTV फुटेज दे सकता है, लेकिन अब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जांच एजेंसियां चार प्रमुख एंगल पर काम कर रही हैं – पटना आने से पहले की स्थिति, हॉस्टल पहुंचने के बाद की मूवमेंट, हॉस्टल परिसर के भीतर घटना और किसी करीबी से लगातार संपर्क। लेकिन ठोस प्रगति अभी तक दिखाई नहीं दे रही है।

Shambhu Hostel Case: केस की शुरुआत और घटनाक्रम

6 जनवरी को छात्रा पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल (Shambhu Hostel Case) में बेहोशी की हालत में मिली थी। एक दिन पहले ही वह अपने घर से पटना पहुंची थी। पहले निजी अस्पताल, फिर दूसरे और अंत में बड़े अस्पताल में इलाज चला। इलाज के दौरान छात्रा की स्थिति लगातार गंभीर होती गई और 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।

मामले में बढ़ते सवालों और जनदबाव के बाद 16 जनवरी को SIT का गठन किया गया। इसके बाद हॉस्टल, अस्पताल और गांव स्तर पर जांच शुरू हुई। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच का आधार मेडिकल रिपोर्ट है, तो मेडिकल बोर्ड को पूरे दस्तावेज क्यों नहीं दिए जा रहे। AIIMS के डॉक्टरों का साफ कहना है कि आधे कागजों पर जांच आगे बढ़ी तो न सिर्फ सच दबेगा, बल्कि न्याय की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ जाएगी।

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