SBI vs Post Office FD: 5 साल की एफडी पर पोस्ट ऑफिस दे रहा 7.5% बंपर ब्याज, SBI से 1.45% ज्यादा, 31 मार्च 2026 से पहले खुलवाएं खाता और उठाएं फायदा, जानें पूरी तुलना

पोस्ट ऑफिस 5 साल TD पर 7.5% ब्याज, SBI सामान्य 6.05%, सीनियर 7.05%, सुपर सीनियर 7.15%; 31 मार्च 2026 तक पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाने पर ऊंची दर लॉक

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SBI vs Post Office: अगर आप अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखते हुए अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी हमेशा से एक भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI में एफडी कराएं या फिर डाकघर यानी पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट स्कीम में पैसा लगाएं। यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल रेपो रेट में 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी जिसके बाद अधिकांश बैंकों ने एफडी की ब्याज दरें घटा दी थीं। लेकिन पोस्ट ऑफिस ने अपनी ब्याज दरों में कोई कमी नहीं की और अभी भी पहले जितना आकर्षक ब्याज दे रहा है। इसके अलावा 31 मार्च 2026 से पहले पोस्ट ऑफिस में नया खाता खुलवाने वाले ग्राहकों को मौजूदा ऊंची ब्याज दरों का फायदा मिलता रहेगा। आइए दोनों विकल्पों की विस्तृत तुलना करते हैं।

SBI vs Post Office: SBI की 5 साल की एफडी पर ब्याज दरें

भारतीय स्टेट बैंक देश का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद सरकारी बैंक है। SBI अपने ग्राहकों को 5 साल की एफडी पर अलग-अलग आयु वर्ग के अनुसार अलग-अलग ब्याज दर प्रदान करता है। सामान्य नागरिकों के लिए 5 साल की एफडी पर ब्याज दर 6.05 प्रतिशत प्रति वर्ष है। वरिष्ठ नागरिकों यानी 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए यह दर बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो जाती है। सुपर सीनियर सिटीजन यानी 80 वर्ष से अधिक आयु वाले ग्राहकों को SBI 7.15 प्रतिशत की दर से ब्याज देता है। रेपो रेट में कटौती के बाद SBI ने अपनी एफडी दरों में बदलाव किया जिससे सामान्य ग्राहकों की दर अपेक्षाकृत कम हो गई है।

पोस्ट ऑफिस की 5 साल की टाइम डिपॉजिट पर ब्याज दरें

पोस्ट ऑफिस में एफडी को टाइम डिपॉजिट यानी TD के नाम से जाना जाता है लेकिन काम यह भी बिल्कुल एफडी की तरह ही करती है। तय समय के बाद ग्राहक को निर्धारित ब्याज के साथ पूरी मूल राशि वापस मिल जाती है। पोस्ट ऑफिस की 5 साल की टाइम डिपॉजिट पर ब्याज दर 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष है। पोस्ट ऑफिस की एक खास बात यह है कि यहां सभी उम्र के ग्राहकों को एक समान ब्याज मिलता है। यानी सामान्य नागरिक हो, वरिष्ठ नागरिक हो या सुपर सीनियर सिटीजन हो सभी को 7.5 प्रतिशत की एक ही दर से ब्याज मिलता है।

SBI vs Post Office: कितना है अंतर?

दोनों विकल्पों की तुलना करने पर पोस्ट ऑफिस स्पष्ट रूप से आगे नजर आता है। सामान्य नागरिकों के लिए पोस्ट ऑफिस SBI से 1.45 प्रतिशत अधिक ब्याज दे रहा है जो कि एक बड़ा और महत्वपूर्ण अंतर है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह अंतर 0.45 प्रतिशत है क्योंकि SBI सीनियर सिटीजन को 7.05 प्रतिशत देता है जबकि पोस्ट ऑफिस 7.5 प्रतिशत दे रहा है। सुपर सीनियर सिटीजन के लिए भी पोस्ट ऑफिस 0.35 प्रतिशत अधिक ब्याज दे रहा है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सामान्य नागरिकों को पोस्ट ऑफिस से सबसे अधिक फायदा होगा।

31 मार्च 2026 से पहले खाता खुलवाना क्यों जरूरी?

पोस्ट ऑफिस ने अभी तक अपनी टाइम डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की है लेकिन भविष्य में रेपो रेट में हुई कटौती का असर इन दरों पर पड़ सकता है। सरकार हर तिमाही लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करती है। अगर 1 अप्रैल 2026 से पोस्ट ऑफिस की ब्याज दरें घटाई जाती हैं तो जो लोग 31 मार्च 2026 तक खाता खुलवा लेंगे उन्हें मौजूदा ऊंची दर यानी 7.5 प्रतिशत पर ब्याज मिलता रहेगा। इसलिए जो निवेशक पोस्ट ऑफिस की उच्च ब्याज दर का लाभ उठाना चाहते हैं उन्हें 31 मार्च 2026 से पहले खाता खुलवा लेना चाहिए।

SBI vs Post Office: किसके लिए कौन सा विकल्प बेहतर

अगर आप केवल ब्याज दर के आधार पर निर्णय लें तो पोस्ट ऑफिस की 5 साल की टाइम डिपॉजिट सभी वर्गों के निवेशकों के लिए SBI से बेहतर विकल्प है। पोस्ट ऑफिस की योजनाएं केंद्र सरकार की गारंटी से सुरक्षित होती हैं इसलिए जोखिम शून्य है। SBI भी पूरी तरह सुरक्षित है लेकिन ब्याज दर की तुलना में पोस्ट ऑफिस इस समय अधिक आकर्षक है। हालांकि यह भी ध्यान रखें कि SBI में बैंकिंग सुविधाएं और ऑनलाइन सेवाएं अधिक सुलभ हैं जबकि पोस्ट ऑफिस में प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है। निवेश का अंतिम फैसला अपनी सुविधा, जरूरत और वित्तीय सलाहकार की राय के आधार पर करें।

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