Sabudana In Diabetes: डायबिटीज में साबूदाना खाना कितना खतरनाक, जानें ग्लाइसेमिक इंडेक्स और विशेषज्ञों की राय, व्रत में शुगर मरीज क्या करें?

व्रत में साबूदाना खाने से बढ़ सकता है शुगर लेवल, जानें GI, जोखिम और सुरक्षित विकल्प क्या हैं?

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Sabudana In Diabetes: व्रत शुरू होते ही थाली में साबूदाने की खिचड़ी और वड़े सजाना भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन यह स्वाद डायबिटीज के रोगियों के लिए जानलेवा भी हो सकता है।

नवरात्रि, एकादशी या किसी भी धार्मिक व्रत में साबूदाना सबसे पहले याद आता है। लेकिन भारत में करोड़ों लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और उनमें से अधिकांश यह नहीं जानते कि साबूदाना उनके रक्त शर्करा को कितनी तेजी से बढ़ा सकता है। यह लेख इसी महत्वपूर्ण सवाल का वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जवाब देता है।

साबूदाना क्या है और यह कैसे बनता है?

साबूदाना टैपिओका नामक पौधे की जड़ से निकाले गए स्टार्च से बनाया जाता है। इसे प्रसंस्करण के बाद छोटे गोल मोती के आकार में तैयार किया जाता है। यह पूरी तरह से कार्बोहाइड्रेट आधारित भोजन है जिसमें फाइबर और प्रोटीन की मात्रा नगण्य होती है।

यही कारण है कि साबूदाना पेट को लंबे समय तक भरा नहीं रखता और इसके सेवन के कुछ ही समय बाद फिर से भूख लग जाती है। व्रत में इसे अधिक मात्रा में खाने की प्रवृत्ति इसे और भी जोखिमपूर्ण बना देती है।

साबूदाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कितना है?

मैक्स हॉस्पिटल शालीमार बाग के सीनियर डायरेक्टर और डायबिटीज एवं मेटाबॉलिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक जोशी के अनुसार साबूदाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 70 से 85 के बीच होता है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी जीआई एक मापक है जो बताता है कि कोई भोजन रक्त शर्करा को कितनी तेजी से बढ़ाता है। 70 से अधिक जीआई वाले खाद्य पदार्थ उच्च श्रेणी में आते हैं और इन्हें मधुमेह रोगियों के लिए हानिकारक माना जाता है। साबूदाने का जीआई सफेद चावल के बराबर या उससे भी अधिक हो सकता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए क्यों है खतरनाक?

साबूदाना खाने के बाद शरीर में स्टार्च तेजी से ग्लूकोज में बदलता है और सीधे रक्त में पहुंचता है। इससे ब्लड शुगर लेवल अचानक और तेजी से बढ़ जाता है जिसे चिकित्सकीय भाषा में शुगर स्पाइक कहते हैं।

मधुमेह रोगियों का शरीर इस अचानक बढ़ी हुई शर्करा को इंसुलिन के माध्यम से संभाल पाने में असमर्थ होता है। यही स्थिति हृदय, किडनी और आंखों पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव डालती है। इसलिए विशेषज्ञ मधुमेह रोगियों को साबूदाने से दूर रहने की सलाह देते हैं।

व्रत में साबूदाना खाते समय और बढ़ता है खतरा

व्रत के दौरान लोग सामान्य से अधिक मात्रा में साबूदाना खा लेते हैं क्योंकि अन्य भोजन विकल्प सीमित होते हैं। इसके अलावा व्रत में लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद साबूदाना खाने से शुगर और भी तेजी से बढ़ती है।

खाली पेट हाई जीआई वाले भोजन का सेवन शुगर स्पाइक का सबसे बड़ा कारण बनता है। इसीलिए डॉक्टर मधुमेह रोगियों को व्रत के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं।

किन मरीजों को साबूदाना पूरी तरह छोड़ना चाहिए?

कुछ विशेष परिस्थितियों में साबूदाना का सेवन पूरी तरह वर्जित है। जिन मरीजों की शुगर पहले से अनियंत्रित है उन्हें साबूदाना कभी नहीं खाना चाहिए। इंसुलिन लेने वाले या मधुमेह विरोधी दवाओं पर निर्भर रोगियों को भी इससे पूरी तरह बचना चाहिए। इसके अलावा जो लोग मोटापे से ग्रस्त हैं या जिनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस है, उनके लिए भी साबूदाना पूरी तरह हानिकारक है।

यदि साबूदाना खाना ही हो तो ये सावधानियां जरूरी हैं

यदि कोई मधुमेह रोगी किसी धार्मिक कारण से साबूदाना खाना चाहता है तो कुछ सावधानियां उसके नुकसान को कम कर सकती हैं। सबसे पहले मात्रा बहुत सीमित रखें और एक बार में अधिक साबूदाना बिल्कुल न लें।

साबूदाने के साथ मूंगफली, दही या पनीर जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ मिलाएं क्योंकि प्रोटीन शुगर के अवशोषण की गति को धीमा करता है। साबूदाना खिचड़ी में हरी सब्जियां मिलाने से फाइबर की मात्रा बढ़ती है जो रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में सहायक होती है। खाली पेट साबूदाना कभी न खाएं।

व्रत में मधुमेह रोगी क्या खाएं?

यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं और व्रत रखना चाहते हैं तो साबूदाने की बजाय कुछ बेहतर विकल्प अपना सकते हैं। कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, मखाने और ताजे फल अपेक्षाकृत कम जीआई वाले होते हैं। दही, छाछ और मेवे भी व्रत में ऊर्जा देते हैं और रक्त शर्करा को कम प्रभावित करते हैं।

सबसे बेहतर यही होगा कि मधुमेह रोगी व्रत से पहले अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें और उनके निर्देशानुसार भोजन योजना बनाएं।

Sabudana In Diabetes: निष्कर्ष

साबूदाना स्वाद में जितना लोकप्रिय है, डायबिटीज रोगियों के लिए उतना ही जोखिमपूर्ण भी है। इसका उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर की कमी इसे मधुमेह रोगियों के लिए अनुपयुक्त बनाती है। व्रत के दौरान श्रद्धा और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा जरूरी है। अपने चिकित्सक की सलाह से व्रत के लिए एक सुरक्षित भोजन योजना बनाएं और साबूदाने की जगह बेहतर विकल्प चुनें। आपकी सेहत ही आपकी सबसे बड़ी पूजा है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी आहार परिवर्तन या उपचार से पहले अपने चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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