Rupee vs Dollar: आरबीआई के ‘मास्टरस्ट्रोक’ से संभला रुपया, एक ही दिन में 128 पैसे की ऐतिहासिक छलांग; डॉलर के मुकाबले 93.57 के स्तर पर पहुंची भारतीय करेंसी

आरबीआई के फैसले से रुपया 128 पैसे उछला, डॉलर के मुकाबले 93.57 पर पहुंचा, बाजार में हलचल तेज

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Rupee Vs Dollar: विदेशी मुद्रा बाजार में आज भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 128 पैसे की बढ़त के साथ 93.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह रिकवरी उस समय आई जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने बैंकों के लिए ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन (NOP) की सीमा घटाकर 100 मिलियन डॉलर कर दी।

आरबीआई के इस सख्त कदम का बाजार पर तुरंत असर दिखा। बैंकों ने अपनी डॉलर पोजिशन घटाई, जिससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ी और रुपये को सहारा मिला। शुक्रवार को रुपया 89 पैसे टूटकर 94.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। आज सुबह रुपया 93.62 पर खुला और बाद में 93.57 तक मजबूत हुआ।

आरबीआई का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: क्यों घटाया गया ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन (NOP)?

आरबीआई ने 27 मार्च 2026 को जारी सर्कुलर में बैंकों के ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन की सीमा घटाकर 100 मिलियन डॉलर कर दी है। यह सीमा उस जोखिम को नियंत्रित करती है जो बैंक एक दिन के कारोबार के बाद (रात भर) विदेशी मुद्रा में ले सकते हैं। नई सीमा का पालन बैंकों को 10 अप्रैल 2026 तक करना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई ने रुपये में लगातार गिरावट और बढ़ते जोखिम को देखते हुए यह कदम उठाया। पिछले कुछ दिनों में रुपये पर काफी दबाव था। आरबीआई का यह फैसला बैंकों को अपनी लंबी डॉलर पोजिशन कम करने के लिए मजबूर करता है। नतीजा यह हुआ कि बाजार में डॉलर बिका और रुपये में तेज रिकवरी देखने को मिली।

मार्केट सेंटीमेंट: डॉलर की बिकवाली से रुपये को मिली संजीवनी

इस फैसले के बाद बैंकों ने अपनी पोजिशन समायोजित की। इससे डॉलर की मांग घटी और सप्लाई बढ़ी। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी ने कहा कि बैंकों द्वारा पोजिशन कम करने की प्रक्रिया से अल्पावधि में रुपये को राहत मिली है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह मजबूती तकनीकी कारणों से है, न कि किसी बड़े आर्थिक सुधार से। आज के कारोबार में रुपया 128 पैसे मजबूत हुआ। यह पिछले कई दिनों की गिरावट के बाद एक अच्छी रिकवरी मानी जा रही है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

चुनौतियां बरकरार: कच्चा तेल और मजबूत डॉलर इंडेक्स बढ़ा सकते हैं सिरदर्द

भले ही आज रुपया मजबूत हुआ हो, लेकिन कई कारक अभी भी रुपये को कमजोर रख सकते हैं:

  • मजबूत डॉलर इंडेक्स: अमेरिकी डॉलर वैश्विक स्तर पर मजबूत बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर कारोबार कर रहा है।

  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: ब्रेंट क्रूड आज करीब 115 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दिखा रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में इससे डॉलर की मांग बढ़ती है।

  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली: शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,367.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

ये तीनों कारक मिलकर रुपये पर दबाव बनाए रख सकते हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं या डॉलर और मजबूत हुआ तो रुपये में फिर गिरावट आ सकती है।

इक्विटी मार्केट पर असर: सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

विदेशी मुद्रा बाजार में हुई हलचल का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,191.24 अंक गिरकर 72,391.98 पर पहुंच गया। निफ्टी 349.45 अंक टूटकर 22,470.15 पर आ गया। शेयर बाजार की गिरावट का एक कारण रुपये में आई अस्थिरता भी है। विदेशी निवेशक रुपये के कमजोर होने पर भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ता है।

विशेषज्ञ विश्लेषण: क्या टिकाऊ रहेगी रुपये की यह मजबूती?

फॉरेक्स विशेषज्ञ अमित पाबरी का कहना है कि आरबीआई का यह कदम अल्पावधि में रुपये को सपोर्ट देगा। लेकिन लंबे समय तक रुपये की मजबूती के लिए मूलभूत आर्थिक सुधार जरूरी हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा और तेल की कीमतें $120 के पार चली गईं तो रुपये पर फिर से दबाव आएगा। दूसरी ओर, अगर आरबीआई और सख्त कदम उठाता है या विदेशी निवेश बढ़ता है तो रुपया स्थिर रह सकता है।

आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

रुपये की मजबूती या कमजोरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।

  • रुपये के मजबूत होने से आयात सस्ता होता है, जिससे पेट्रोल-डीजल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित रह सकती हैं।

  • लेकिन अगर रुपया फिर कमजोर हुआ तो महंगाई बढ़ सकती है।

  • निर्यातकों को रुपये की कमजोरी फायदेमंद लगती है, लेकिन आयातकों और आम उपभोक्ताओं को नुकसान होता है।

Rupee Vs Dollar: ग्लोबल फैक्टर्स तय करेंगे अगली चाल

बाजार अभी काफी संवेदनशील है। आने वाले दिनों में आरबीआई की और कोई कार्रवाई, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति और पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल तय करेगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं। लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती रुपये को सहारा देगी। कुल मिलाकर, आज का 128 पैसे का उछाल आरबीआई के सख्त फैसले का नतीजा है। यह रुपये को कुछ राहत दे रहा है, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी हैं।

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