RSS Coordination Meeting: RSS की अखिल भारतीय समन्वय बैठक शुरू, विशाखापट्टनम में 32 संगठनों के प्रमुखों का जुटान, पंच परिवर्तन और सामाजिक मुद्दों पर मंथन

विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय बैठक, मोहन भागवत समेत 327 प्रतिनिधि कर रहे मंथन

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RSS Coordination Meeting: आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित गुड़ीलोवा के विज्ञान विहार विद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक का शुभारंभ बुधवार सुबह 9 बजे से हो गया है। यह बैठक 21 अगस्त की शाम तक चलेगी, जिसमें संघ की विचारधारा से प्रेरित होकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे 32 प्रमुख संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी भाग ले रहे हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन में संघ प्रमुख सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह और केंद्रीय अधिकारियों की उपस्थिति में समाज और देश के समक्ष प्रस्तुत ज्वलंत मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

इस बैठक के औपचारिक उद्घाटन के साथ ही संघ परिवार के विविध आयामों के बीच आपसी समन्वय और संवाद का एक नया चरण आरंभ हुआ है। बैठक में देशभर के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि अपनी गतिविधियों और सामाजिक अनुभवों को साझा कर रहे हैं। संघ शताब्दी वर्ष के समीप होने के कारण इस आयोजन को रणनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

RSS Coordination Meeting: बैठक का स्थान, समय और प्रतिनिधियों की उपस्थिति

विशाखापट्टनम के समीप स्थित गुड़ीलोवा का विज्ञान विहार विद्यालय इस समय देश के सबसे बड़े संगठनात्मक मंथन का केंद्र बना हुआ है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बैठक के औपचारिक सत्र से पूर्व मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि समन्वय बैठक का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। इसका मुख्य ध्येय संघ से जुड़े सभी जन-संगठनों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर उनके व्यावहारिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।

इस वर्ष आयोजित हो रही बैठक में कुल 32 संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, संगठन मंत्री, महामंत्री और चयनित प्रमुख कार्यकर्ता सम्मिलित हो रहे हैं। कार्यक्रम में 49 महिला प्रतिनिधियों सहित लगभग 253 मुख्य कार्यकर्ता शामिल हैं। संघ के अधिकारियों को मिलाकर बैठक में कुल 327 प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है। यह विशाल उपस्थिति दर्शाती है कि संघ का संगठनात्मक दायरा समाज के प्रत्येक वर्ग और क्षेत्र तक विस्तृत हो चुका है।

देश के प्रमुख संगठनों के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा

गुड़ीलोवा में आयोजित इस समन्वय बैठक में समाज के विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रीय स्तर के संगठन हिस्सा ले रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से मजदूरों के हितों के लिए कार्यरत भारतीय मजदूर संघ, सांस्कृतिक व धार्मिक चेतना का प्रतिनिधित्व करने वाला विश्व हिंदू परिषद, राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भारतीय जनता पार्टी, विद्यार्थियों के बीच काम करने वाला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, किसानों की समस्याओं पर केंद्रित भारतीय किसान संघ और महिलाओं के बीच कार्यरत राष्ट्र सेविका समिति शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त समाज सेवा, शिक्षा, ग्राम विकास, जनजातीय कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय कई अन्य सहयोगी संगठनों के शीर्ष नेतृत्व ने भी बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित संघ परिवार के अन्य सहयोगी संगठनों के प्रमुख नेता भी चर्चा सारणी में सम्मिलित हैं। ये सभी प्रतिनिधि अपने-अपने कार्यक्षेत्रों की चुनौतियों, उपलब्धियों और भावी योजनाओं को बैठक के समक्ष रख रहे हैं।

समन्वय और सामाजिक समीक्षा बैठक का मूल उद्देश्य

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने स्पष्ट किया है कि यह बैठक निर्णय लेने वाली कोई कार्यकारी अथवा वैधानिक संस्थागत बैठक नहीं है। इसका मूल उद्देश्य समाज हित में लगे विभिन्न संगठनों के बीच परस्पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना और आपसी सहयोग को सुदृढ़ बनाना है। बैठक के दौरान किसी प्रकार का औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया जाता, बल्कि विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श के माध्यम से एक साझी समझ विकसित की जाती है।

बैठक में देश की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति पर विस्तृत समीक्षा की जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता और जनसांख्यिकीय संतुलन जैसे गंभीर विषयों पर प्रतिनिधियों के बीच चर्चा हो रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे डेमोग्राफिक बदलावों के दूरगामी प्रभावों तथा उसके समाधान के लिए आवश्यक सामाजिक कदमों पर भी विभिन्न दृष्टिकोणों से विचार किया जा रहा है।

युवाओं को नशा मुक्त बनाने के लिए व्यापक रणनीति पर मंथन

आज के समय में देश की युवा पीढ़ी के सामने नशे की बढ़ती लत एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनकर उभरी है। गुड़ीलोवा बैठक में युवाओं को नशे के दुश्चक्र से बाहर निकालने और उन्हें राष्ट्र निर्माण के कार्यों में जोड़ने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बैठक के दौरान इस बात पर विस्तार से मंथन हो रहा है कि संघ परिवार के सभी संगठन मिलकर इस बुराई के खिलाफ किस प्रकार एक प्रभावी और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चला सकते हैं।

नशा मुक्ति के अलावा युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, उनमें राष्ट्रीय चेतना के विकास और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने वाले विषयों पर भी गहन बातचीत की जा रही है। प्रतिनिधियों का मानना है कि युवा ऊर्जा को सही दिशा देकर ही देश की प्रगति को गति दी जा सकती है। इसके लिए संगठनात्मक स्तर पर युवाओं से निरंतर संवाद स्थापित करने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

संघ शताब्दी वर्ष और पंच परिवर्तन की अवधारणा पर चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष की ओर तेजी से अग्रसर है। इस ऐतिहासिक अवसर को ध्यान में रखते हुए संघ ने समाज परिवर्तन के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का लक्ष्य निर्धारित किया है। समन्वय बैठक में इन पांच मुख्य स्तंभों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक ले जाने की रूपरेखा पर विचार हो रहा है। पंच परिवर्तन के अंतर्गत पहला विषय सामाजिक समरसता है, जिसका उद्देश्य समाज में छुआछूत और भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है।

दूसरा विषय पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना है, जिसमें जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्ति और वृक्षारोपण जैसे कार्य शामिल हैं। तीसरा बिंदु कुटुंब प्रबोधन है, जिसके माध्यम से पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाता है। चौथा बिंदु स्वदेशी और स्व-जागरण है, जो स्थानीय उत्पादों के उपयोग और राष्ट्रीय स्वाभिमान को बढ़ावा देता है। पांचवां स्तंभ नागरिक कर्तव्यों का पालन है, जो हर नागरिक को देश के नियमों और दायित्वों के प्रति सजग बनाता है। बैठक में इन सभी विषयों को जन-आंदोलन का रूप देने की रणनीति पर चर्चा जारी है।

समग्र और संतुलित भारतीय विकास मॉडल का खाका

बैठक के एक महत्वपूर्ण सत्र में भारत के भावी विकास मॉडल पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया जा रहा है। संघ की स्पष्ट मान्यता है कि विकास की परिभाषा केवल आर्थिक आंकड़ों या पश्चिमी मानकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। एक वास्तविक विकास मॉडल वह है जो आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण, संस्कृति, मानव मूल्यों और सामाजिक न्याय का संतुलन बनाए रखे।

इसी सोच के आधार पर एक समग्र भारतीय विकास मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। बैठक में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों के व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर इस मॉडल में योगदान दे रहे हैं। कृषि, उद्योग, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों को किस प्रकार एक-दूसरे से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत का निर्माण किया जा सकता है, इस पर दीर्घकालिक रणनीतियों का ताना-बाना बुना जा रहा है।

युवा वर्ग में संघ के प्रति बढ़ता आकर्षण और आंकड़े

संघ के शताब्दी वर्ष के निकट आते-आते भारतीय समाज, विशेषकर युवा वर्ग में आरएसएस के प्रति रुचि और आकर्षण में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। संघ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध ‘जॉइन आरएसएस’ के आंकड़ों के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया है कि लोग स्वयं प्रेरणा से संघ से जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं। वर्ष 2025 में जनवरी से जुलाई के बीच कुल 55,423 लोगों ने संघ से जुड़ने के लिए डिजिटल माध्यम से पंजीकरण कराया था।

वहीं वर्ष 2026 में इसी समयावधि के दौरान यह आंकड़ा ढाई गुना से भी अधिक बढ़कर 1,23,287 तक पहुंच गया है। केवल जुलाई माह की तुलना करें तो जुलाई 2025 में 9,718 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जबकि जुलाई 2026 में यह संख्या बढ़कर 24,086 हो गई। इन आंकड़ों का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि पंजीकरण कराने वाले कुल लोगों में लगभग 65 प्रतिशत युवा 30 वर्ष से कम आयु के हैं, जबकि 85 प्रतिशत लोग 40 वर्ष से कम आयु वर्ग से आते हैं। यह रुझान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की युवा पीढ़ी राष्ट्रीय सोच और सेवा कार्यों की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है।

RSS Coordination Meeting: भविष्य की दिशा और सामाजिक परिवर्तन का संकल्प

गुड़ीलोवा में आयोजित यह तीन दिवसीय समन्वय बैठक केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की सामाजिक दिशा तय करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का मार्गदर्शन प्रतिनिधियों को एक नई दृष्टि और ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

बैठक के समापन के बाद सभी 32 संगठनों के प्रतिनिधि अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में वापस लौटकर बैठक में तय की गई प्राथमिकताओं को क्रियान्वित करेंगे। पंच परिवर्तन के संदेश को गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाने, युवाओं को नशे से मुक्त कर राष्ट्र निर्माण में लगाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए आने वाले दिनों में देशभर में अनेक रचनात्मक गतिविधियां देखने को मिलेंगी। गुड़ीलोवा का यह मंथन आने वाले वर्षों में भारतीय समाज को एकजुट और सशक्त बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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