Rohtak Unique Village: उल्टा घर, उल्टी कार और हवा में लटकी साइकिल, दिल्ली से करीब 2 घंटे दूर अनोखी जगह

रोहतक के ग्रामीण इलाके में उल्टा घर, देसी खाना और 100 से ज्यादा गतिविधियां आकर्षण का केंद्र

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Rohtak Unique Village: भागदौड़ भरी महानगरीय जिंदगी और हर वीकेंड पर पहाड़ों या ऐतिहासिक किलों की एक जैसी सैर से इतर यदि आप किसी ऐसे डेस्टिनेशन की तलाश में हैं जो आपकी आंखों को हैरत में डाल दे, तो हरियाणा का रोहतक जिला इन दिनों सोशल मीडिया और पर्यटन प्रेमियों के बीच खासा चर्चा में है। दिल्ली-एनसीआर से महज दो घंटे की सड़क दूरी पर स्थित रोहतक के ग्रामीण अंचल में एक ऐसा विस्मयकारी फार्महाउस विकसित किया गया है, जहां कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो गुरुत्वाकर्षण का नियम ही बदल गया हो। यहां जमीन पर सीधे खड़े होने के बजाय घर की छत नीचे और फर्श ऊपर नजर आता है, आंगन में उल्टी कारें लटकी दिखाई देती हैं और हवा में तैरती साइकिलें सैलानियों को एक समानांतर जादुई दुनिया का अहसास कराती हैं।

यह अनोखा पर्यटन स्थल केवल ऑप्टिकल इल्यूजन और उल्टे ढांचों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह लुप्त होती ठेठ भारतीय ग्रामीण संस्कृति, लोक परंपराओं और आधुनिक रोमांच का एक अनूठा संगम है। दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और फरीदाबाद के निवासियों के लिए एक दिवसीय सप्ताहांत प्रवास (One-Day Weekend Getaway) के रूप में यह स्थान तेजी से उभर रहा है, जहां एक ही छत के नीचे देसी खान-पान, ग्रामीण खेल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और बच्चों के लिए दर्जनों गतिविधियां उपलब्ध कराई गई हैं।

Rohtak Unique Village: रोहतक में कहां स्थित है यह अनोखा फार्महाउस और कैसे पहुंचे?

पर्यटन मानचित्र पर तेजी से जगह बना रहा यह अनोखा फार्महाउस हरियाणा के रोहतक जिले में शेरगढ़ क्षेत्र के निकट स्थापित है। भौगोलिक स्थिति के अनुसार यह नेशनल हाईवे-9 (दिल्ली-हिसार मार्ग) पर मदीना टोल प्लाजा के पास स्थित मोखरा गांव के ग्रामीण परिवेश में फैला हुआ है। चारों तरफ लहलहाते हरे-भरे खेतों और खुली हवा के बीच बसा यह फार्महाउस शहर के प्रदूषण और शोरगुल से कोसों दूर एक शांत व नैसर्गिक वातावरण प्रस्तुत करता है।

यातायात सुगमता की दृष्टि से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से इस स्थल की दूरी लगभग 80 से 90 किलोमीटर बैठती है। यदि आप रोहतक रोड या रोहतक बाईपास होते हुए निजी कार या कैब से यात्रा करते हैं, तो सामान्य यातायात में यहां पहुंचने में लगभग दो से ढाई घंटे का समय लगता है। बहादुरगढ़ और सांपला को पार करते हुए नेशनल हाईवे-9 के जरिए यहां की यात्रा बेहद सुगम और आरामदायक है। जो लोग एक दिन में सुबह जाकर शाम तक सुरक्षित घर लौटना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहद व्यावहारिक और किफायती डे-पिकनिक स्थल साबित हो रहा है।

उल्टा घर और उल्टी कार: विजुअल इल्यूजन का अद्भुत संसार

इस पूरे परिसर का मुख्य आकर्षण यहां निर्मित ‘उल्टा घर’ (Upside Down House) है, जिसे वास्तु और आधुनिक इंजीनियरिंग के अनूठे मेल से तैयार किया गया है। बाहर से देखने पर इस दोमंजिला मकान की पूरी छत जमीन को छूती नजर आती है और नींव हवा में दिखाई देती है। जब आगंतुक इसके भीतर प्रवेश करते हैं, तो अंदर का इंटीरियर और भी स्तब्ध कर देने वाला होता है।

घर के अंदर सोफे, डाइनिंग टेबल, पंखे, टेलीविजन और यहां तक कि किचन के बर्तन भी छत से उल्टे लटके हुए प्रतीत होते हैं। जब पर्यटक इन कमरों में तस्वीरें खिंचवाते हैं, तो कैमरे के कोण (Angle) की वजह से ऐसा लगता है मानो वे छत पर उल्टे चल रहे हों और सामान हवा में तैर रहा हो। इसके ठीक बाहर एक वास्तविक आकार की कार को भी उल्टी अवस्था में स्थापित किया गया है। यह पूरा सेटअप इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब व्लॉग्स और क्रिएटिव फोटोग्राफी के शौकीन युवाओं के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

हवा में तैरती साइकिल और सेल्फी प्वाइंट्स का सम्मोहन

उल्टे घर के अलावा यहां एक और सेटअप आगंतुकों का ध्यान बरबस अपनी ओर खींचता है, वह है ‘हवा में उड़ती साइकिल’। इसे विशेष इंजीनियरिंग तकनीकों और पारदर्शी मजबूत तारों के सहारे इस प्रकार संतुलित किया गया है कि पहली नजर में देखने पर ऐसा भ्रम होता है जैसे कोई साइकिल चालक जमीन छोड़कर सीधे आकाश में उड़ान भर रहा हो।

पर्यटक इस साइकिल पर बैठकर अपनी तस्वीरें खिंचवाते हैं, जो सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हो रही हैं। परिसर में ऐसे कई 3D आर्टवर्क और थीम-आधारित कॉर्नर तैयार किए गए हैं, जो बच्चों और बड़ों दोनों को सिनेमाई दृश्यों का प्रत्यक्ष अनुभव कराते हैं। आयोजकों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी भारी संरचनाओं के लिए पुख्ता सुरक्षा ऑडिट और मजबूत सपोर्ट सिस्टम की व्यवस्था कर रखी है ताकि फोटो लेते समय किसी दुर्घटना की आशंका न रहे।

तांगा, बैलगाड़ी और खाट: ग्रामीण भारत की समृद्ध विरासत

आज के दौर में कंक्रीट के जंगलों और बहुमंजिला सोसायटियों में पल रहे शहरी बच्चों के लिए भारत की पारंपरिक ग्रामीण जीवनशैली लगभग किताबों या फिल्मों तक सिमट कर रह गई है। इस फार्महाउस का सबसे संवेदनशील और सराहनीय पहलू यह है कि यह नई पीढ़ी को ग्रामीण संस्कृति से सीधे रूबरू कराता है।

यहां आने वाले सैलानियों का स्वागत ठेठ ग्रामीण अंदाज में तिलक लगाकर और ताजे गुड़ की मिठास के साथ किया जाता है। परिसर के भीतर सैलानियों को पारंपरिक तांगे और सुसज्जित बैलगाड़ी की खुली सवारी कराई जाती है। खुले आंगन में बिछी सूत की चारपाइयों (खाट) पर बैठकर हुक्का गुड़गुड़ाते बुजुर्गों और पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीणों को देखकर आगंतुक पुरानी स्मृतियों में खो जाते हैं। यहां हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लोक जीवन से जुड़ी पुरानी कृषि वस्तुएं, चक्की, चरखा, हल और मिट्टी के बर्तन भी प्रदर्शित किए गए हैं।

100 से अधिक इनडोर-आउटडोर गतिविधियां और भूत बंगला

मनोरंजन और साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए इस फार्महाउस में 100 से अधिक विभिन्न प्रकार की गतिविधियों की लंबी फेहरिस्त मौजूद है। बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने बनाना (पॉटरी), रस्साकशी, गुलेल चलाना, तीरंदाजी, कंचे खेलना और गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों के विशेष कोर्ट बनाए गए हैं। इसके अलावा आधुनिक एडवेंचर के तहत जिपलाइन, बर्मा ब्रिज, कमांडो नेट और ट्रैम्पोलिन जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।

रोमांच को चरम पर ले जाने के लिए परिसर के भीतर एक विशाल ‘भूत बंगला’ (Haunted House) भी तैयार किया गया है। अत्याधुनिक साउंड इफेक्ट्स, अंधेरी गलियों और डरावने पुतलों के जरिए तैयार किया गया यह आकर्षण बच्चों और युवाओं के बीच भारी रोमांच पैदा करता है। पूरे दिन की थकान मिटाने के लिए शाम ढलते ही खुले लॉन में ‘डीजे नाइट’ का आयोजन किया जाता है, जहां हरियाणवी, पंजाबी और बॉलीवुड गानों की धुनों पर पूरा परिवार एक साथ थिरक सकता है।

खाट पर बैठकर 50 प्रकार के देसी व्यंजनों का असीमित स्वाद

इस अनोखे गांव का सबसे बड़ा यूएसपी (USP) इसका पारंपरिक और पौष्टिक खान-पान है। टिकट पैकेज के अंतर्गत आगंतुकों को पूरे दिन लगभग 50 प्रकार के पारंपरिक और लजीज व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलता है। सुबह के नाश्ते में तंदूरी आलू-गोभी के पराठे, घर का बना सफेद मक्खन, ताजा दही, पोहा और कुल्हड़ वाली कड़क चाय परोसी जाती है।

दोपहर के मुख्य भोजन (लंच) में शुद्ध हरियाणवी और राजस्थानी थाली का आनंद दिया जाता है। इसमें ताजी मिट्टी की हांडी में पकी दाल, सरसों का साग, बाजरे और मक्के की गरम-गरम रोटियां, चूरमा, कढ़ी-चावल, रायता, खीर और गन्ने की ताजी राब शामिल होती है। पूरे परिसर में भोजन खुले में बिछी खाटों पर कांसे या मिट्टी के बर्तनों में परोसा जाता है, जो शहर के महंगे फाइव-स्टार होटलों के बुफे को भी सादगी और स्वाद के मामले में पीछे छोड़ देता है।

टिकट दरें, समय सारिणी और आगामी लॉन्ग वीकेंड की योजना

इस थीम फार्महाउस की वर्तमान संचालन व्यवस्था के अनुसार, वयस्कों (Adults) के लिए प्रवेश टिकट की कीमत ₹1,300 निर्धारित की गई है, जबकि बच्चों (3 से 9 वर्ष की आयु) के लिए यह दर ₹800 रखी गई है। इस एकमुश्त टिकट में परिसर के सभी प्रमुख आकर्षण, उल्टे घर का प्रवेश, झूले, 100 से अधिक खेल गतिविधियां और पूरे दिन का संपूर्ण भोजन (नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम की चाय-स्नैक्स) शामिल रहता है।

फार्महाउस पर्यटकों के लिए प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे खुलता है और शाम 5:00 बजे तक संचालित होता है। अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में आने वाले गांधी जयंती के लंबे सप्ताहांत (Long Weekend) को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए यह एक आदर्श डे-आउटिंग विकल्प है। हालांकि त्योहारों और सप्ताहांतों पर भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए सैलानियों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह जल्दी निकलें ताकि पूरे दिन की गतिविधियों और भोजन का बिना किसी हड़बड़ाहट के आनंद उठाया जा सके।

Rohtak Unique Village: आधुनिक कौतूहल और लोक संस्कृति का बेजोड़ मिलन

रोहतक के शेरगढ़ में बसा यह अनोखा गांव केवल एक साधारण अम्यूजमेंट पार्क नहीं है, बल्कि यह मनोरंजन की आधुनिक तकनीकों और भारत की समृद्ध ग्रामीण जड़ों का एक बेहद संतुलित व सुंदर प्रयोग है। जहां एक ओर उल्टा घर और लटकी कारें युवाओं को सोशल मीडिया पर अनोखा कंटेंट बनाने का मौका देती हैं, वहीं दूसरी ओर शुद्ध देसी खान-पान और तांगा-बैलगाड़ी की सवारी बुजुर्गों और बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ती है। यदि आप भी दिल्ली की व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी से चंद घंटों का सुकून भरा ब्रेक चाहते हैं, तो यह अनोखी जगह आपके वीकेंड को यादगार और ताजगी से भरपूर बनाने के लिए पूरी तरह मुफीद है।


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