Republic Day 2026: यूरोपीय संघ के टॉप लीडर्स Ursula von der Leyen और António Costa मुख्य अतिथि, भारत-यूरोप संबंधों में नया अध्याय

EU के Ursula von der Leyen और António Costa मुख्य अतिथि, पहली बार दो अंतरराष्ट्रीय नेता

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Republic Day 2026: भारत 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। इस बार मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ (EU) के दो सबसे बड़े नेता आएंगे। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष Ursula von der Leyen और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष António Luís Santos da Costa को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आमंत्रित किया है। यह पहली बार है जब भारत ने गणतंत्र दिवस पर दो अंतरराष्ट्रीय नेताओं को एक साथ मुख्य अतिथि बनाया है। यह कदम भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

मुख्य अतिथियों का ऐतिहासिक महत्व

Republic Day 2026
Republic Day 2026

गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) पर मुख्य अतिथि का चुनाव हमेशा से भारत की विदेश नीति का संकेत देता है। पिछले सालों में फ्रांस (2024 में Emmanuel Macron), इंडोनेशिया (2025 में Prabowo Subianto) जैसे देशों के नेता आए। 2026 में EU के दोनों टॉप लीडर्स का आना खास है क्योंकि EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत चल रही है। यूरोपीय संघ भारत के लिए महत्वपूर्ण निवेशक और टेक्नोलॉजी पार्टनर भी है।

Ursula von der Leyen जर्मनी की पूर्व रक्षा मंत्री हैं और 2019 से यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष हैं। वे EU की विदेश नीति, व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत के साथ मिलकर काम कर रही हैं। António Costa पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और गोवा मूल के हैं। उनकी भारतीय जड़ें इस यात्रा को और खास बनाती हैं। दोनों नेताओं का आना EU के साथ भारत के “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” को मजबूत करने का संकेत है।

Republic Day 2026: आमंत्रित और मुख्य अतिथियों की पूरी लिस्ट

प्रधानमंत्री मोदी ने कई विश्व नेताओं को आमंत्रित किया है। लेकिन मुख्य अतिथि के रूप में Ursula von der Leyen और António Costa की पुष्टि हो चुकी है। अन्य आमंत्रित नेताओं में शामिल हैं:

  • यूरोपीय संघ के अन्य उच्च अधिकारी

  • कई एशियाई और अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष (पूर्ण सूची अभी अंतिम नहीं)

  • कुछ लैटिन अमेरिकी और मध्य एशियाई नेता

यह पहली बार है जब गणतंत्र दिवस पर दो मुख्य अतिथि होंगे। आमतौर पर एक देश का नेता मुख्य अतिथि होता है, लेकिन EU के साथ मजबूत संबंध बनाने के लिए यह फैसला लिया गया।

गणतंत्र दिवस 2026 की तैयारियां

गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) परेड राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू परेड की सलामी लेंगी। मुख्य अतिथि कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति के साथ बैठेंगे। परेड में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और विभिन्न राज्यों की झांकियां शामिल होंगी। इस साल परेड में “वंदे मातरम” के 150 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया जाएगा।

परेड की थीम और अन्य विवरण:

  • थीम: “विकसित भारत @2047” या इससे जुड़ा कोई संदेश

  • समय: सुबह 10:30 बजे से शुरू

  • अवधि: करीब 90 मिनट

  • विशेष: ड्रोन शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम और फ्लाईपास्ट

दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे। हजारों पुलिसकर्मी, एनएसजी और अन्य फोर्स तैनात रहेंगी।

Republic Day 2026: भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में महत्व

Ursula von der Leyen और António Costa का आना भारत-EU संबंधों में मील का पत्थर साबित होगा। दोनों पक्षों के बीच ट्रेड, डिफेंस, क्लाइमेट चेंज और टेक्नोलॉजी पर सहयोग बढ़ रहा है। EU भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। 2025 में दोनों पक्षों ने कई समझौते किए। FTA की बातचीत तेज हो गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि EU के साथ “ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप” भारत की प्राथमिकता है। मुख्य अतिथियों का आना इस दिशा में बड़ा कदम है। गोवा मूल के António Costa का आना भारत-पुर्तगाल संबंधों को भी मजबूत करेगा।

पिछले मुख्य अतिथियों की झलक

गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) पर मुख्य अतिथि की परंपरा 1950 से चली आ रही है। कुछ हाल के मुख्य अतिथि:

  • 2023: मिस्र के राष्ट्रपति Abdel Fattah el-Sisi

  • 2024: फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron

  • 2025: इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto

2026 में EU लीडर्स का आना भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” विदेश नीति को दिखाता है। भारत अब कई ध्रुवों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है।

Republic Day 2026: समारोह का महत्व

गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) भारत के संविधान लागू होने की याद दिलाता है। यह दिन सेना की ताकत, सांस्कृतिक विविधता और युवा ऊर्जा का प्रदर्शन करता है। मुख्य अतिथि का आना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को मजबूत करता है। इस साल EU के साथ संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी।

दिल्ली में 26 जनवरी को पूरा देश एकजुट होकर जश्न मनाएगा। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य अतिथि और लाखों भारतीय इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनेंगे।

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