राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में उठाया खाद्य मिलावट का गंभीर मुद्दा, “हम सब धीमा जहर पी रहे हैं” – दूध में यूरिया से लेकर आइसक्रीम में डिटर्जेंट तक, जानें चौंकाने वाले खुलासे
राघव चड्ढा ने संसद में खाद्य मिलावट का बड़ा मुद्दा उठाया - दूध में यूरिया, आइसक्रीम में डिटर्जेंट, मसालों में ईंट का चूरा, सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग
Rajya Sabha Update: राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने मंगलवार, 4 फरवरी 2026 को संसद में खाद्य पदार्थों में मिलावट का गंभीर मुद्दा उठाया और इसे देश का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बताया। अपनी जोरदार स्पीच में उन्होंने खुलासा किया कि दूध में यूरिया, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, पनीर में कास्टिक सोडा, मसालों में ईंट का चूरा, शहद में पीला रंग, मुर्गी के मांस में स्टेरॉयड और आइसक्रीम में डिटर्जेंट तक मिलाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “हम सब धीमा जहर पी रहे हैं!” राघव चड्ढा ने अपनी संसदीय स्पीच का वीडियो अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर भी साझा किया और इस गंभीर मुद्दे पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।
दूध से लेकर मसालों तक – हर चीज में मिलावट
राघव चड्ढा ने संसद में अपने संबोधन के दौरान विस्तार से बताया कि भारतीय बाजार में किस प्रकार शुद्धता का लेबल लगाकर मिलावटी और नकली उत्पाद बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूध, मसाले, खाद्य तेल, पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थों में असुरक्षित पदार्थ, हानिकारक रसायन, अत्यधिक संतृप्त वसा, शर्करा या नमक मिलाया जा रहा है। साथ ही भ्रामक पोषण संबंधी दावे किए जा रहे हैं जिनमें कहा जाता है कि ये उत्पाद स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं और ऊर्जा बढ़ाने वाले हैं।
प्रमुख खाद्य पदार्थों में मिलावट की सूची:
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दूध: यूरिया, न्यूट्रलाइजर (सोडियम बाइकार्बोनेट)
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सब्जियां: ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन
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पनीर: स्टार्च और कास्टिक सोडा
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आइसक्रीम: डिटर्जेंट पाउडर
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फ्रूट जूस: सिंथेटिक फ्लेवर, कृत्रिम रंग
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खाद्य तेल: मशीन ऑयल
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गरम मसाले: ईंट का पाउडर और लकड़ी का चूरा
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चाय: सिंथेटिक रंग
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चिकन/पोल्ट्री: एनाबोलिक स्टेरॉयड
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शहद: शुगर सिरप और पीली रंगाई
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देसी घी: वनस्पति तेल का मिश्रण
मां अनजाने में अपने बच्चे को यूरिया पिला रही हैं
राघव चड्ढा ने एक भावनात्मक अपील करते हुए कहा, “आप सोचिए कि अगर कोई मां अपने बच्चे को एक गिलास दूध देती है यह सोचकर कि इसमें कैल्शियम, प्रोटीन है और मेरा बच्चा स्वस्थ और फिट बनेगा, तो वह यह नहीं जानती कि वह अनजाने में अपने बच्चे को यूरिया या डिटर्जेंट का मिश्रण पिला रही है।”
उन्होंने शोध के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि दूध के 71 प्रतिशत नमूनों में यूरिया पाया गया और 64 प्रतिशत नमूनों में न्यूट्रलाइजर जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट मौजूद था। उन्होंने चौंकाने वाला तथ्य साझा करते हुए कहा कि भारत में दूध का उत्पादन उतना नहीं है जितना दूध बाजार में बेचा जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से मिलावट और नकली दूध की समस्या को दर्शाता है।
सब्जियों में जहरीला ऑक्सीटोसिन
राघव चड्ढा ने सब्जियों में ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन के खतरनाक उपयोग पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “अगर आप सब्जियां खरीदते हैं जिसे हम हेल्थ फूड मानते हैं, तो उसे ऑक्सीटोसिन इंजेक्ट करके बेचा जाता है ताकि वह ताजी और हरी दिखे तथा उसकी वृद्धि तेज हो।”
उन्होंने चेतावनी दी कि ऑक्सीटोसिन एक अत्यंत हानिकारक रसायन है जो चक्कर आना, सिरदर्द, हृदय विफलता, बांझपन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है। यह रसायन मूल रूप से चिकित्सा उद्देश्यों के लिए बनाया गया था लेकिन इसका दुरुपयोग कृषि में किया जा रहा है।
25% नमूने मिलावटी – चौंकाने वाले आंकड़े
राघव चड्ढा ने संसद में आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2014-15 से 2026 तक जांच किए गए सभी खाद्य नमूनों में से 25 प्रतिशत मिलावटी पाए गए। इसका सीधा मतलब है कि हर चार नमूनों में से एक नमूना मिलावटी होता है।
उन्होंने कहा, “पता नहीं कितने लोग इस मिलावटी भोजन के कारण बीमार हुए, अस्पताल गए या अपनी जान गंवाई। यह एक भयंकर स्वास्थ्य संकट है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक है।”
विदेशों में प्रतिबंधित उत्पाद भारत में खुलेआम बिक रहे
राघव चड्ढा ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया कि भारत में बने कुछ उत्पाद जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं, वे भारत में खुलेआम बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस देश की दो सबसे बड़ी गरम मसाला बनाने वाली कंपनियां अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम में प्रतिबंधित हो गईं क्योंकि उनमें कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशक पाए गए, लेकिन वे मसाले आज भी भारत में बेचे और खरीदे जा रहे हैं।”
उन्होंने दुखद स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा, “स्थिति यह है कि दूसरे देशों में जो खाद्य पदार्थ जानवरों को भी नहीं खिलाए जाते, वे यहां भारत में इंसानों के लिए बेचे जा रहे हैं और हमें इन्हें उपभोग करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”
राघव चड्ढा के चार सुझाव
राघव चड्ढा ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कुछ ठोस सुझाव भी प्रस्तुत किए:
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FSSAI को मजबूत करना: खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को पर्याप्त जनशक्ति प्रदान की जाए और लैब टेस्टिंग को बढ़ावा दिया जाए।
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जुर्माने और दंड में वृद्धि: मिलावट करने वालों पर लगने वाले जुर्माने और दंड को वित्तीय रूप से इतना बड़ा बनाया जाए कि यह एक वास्तविक प्रतिरोधक का काम करे।
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सार्वजनिक रिकॉल तंत्र: यदि कोई उत्पाद मिलावटी पाया जाता है तो उसे सार्वजनिक रूप से नाम लेकर शर्मसार किया जाए और तुरंत बाजार से हटाया जाए।
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भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: भ्रामक स्वास्थ्य संबंधी दावों की विज्ञापन पर पूर्ण रोक लगाई जाए।
यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। राघव चड्ढा द्वारा संसद में उठाया गया यह मुद्दा सरकार से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की मांग करता है।
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