Rajpal Yadav Supreme Court: सरेंडर से पहले मिली राहत, ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त

चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से अंतरिम राहत दी, 15 सितंबर को सुनवाई

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Rajpal Yadav Supreme Court: बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता और हास्य कलाकार राजपाल यादव से जुड़े करोड़ों रुपये के चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा बरकरार रखे जाने और सरेंडर के लिए तय की गई 10 सितंबर की अंतिम समयसीमा से ऐन पहले अभिनेता ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को फिलहाल जेल में सरेंडर करने से अंतरिम राहत प्रदान कर दी है।
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह छूट बिना शर्त नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता बुधवार, 9 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में ₹5 करोड़ की राशि जमा कराते हैं, तभी उन्हें सरेंडर करने से छूट मिलेगी। अदालत ने मामले पर प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी करते हुए अगली विस्तृत सुनवाई की तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित की है।

Rajpal Yadav Supreme Court: CJI सूर्यकांत की पीठ के समक्ष मौखिक उल्लेख

अभिनेता राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सौरभ त्रिवेदी ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक रूप से मेंशन किया। याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई तीन महीने की कैद और भारी जुर्माने की सजा को बरकरार रखा गया था।
शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों की प्राथमिक परिस्थितियों को सुनने के बाद एक सशर्त नोटिस जारी किया। पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा रजिस्ट्री में ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त के अधीन ही उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम छूट दी जाती है। यदि तय समयसीमा में यह राशि जमा नहीं होती है, तो पूर्व आदेश के अनुसार उन्हें कानूनन सरेंडर करना होगा।

क्या है पूरा विवाद: ‘अता पता लापता’ फिल्म के लिए लिया गया था ₹5 करोड़ का कर्ज

इस कानूनी विवाद की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी, जब राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की फाइनेंस कंपनी मैसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (Murli Projects Pvt Ltd) से ₹5 करोड़ का फंड हासिल किया था।
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल साबित हुई, जिसके चलते अभिनेता वित्तीय संकट में घिर गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पुनर्भुगतान को लेकर कई पूरक समझौते (Supplementary Agreements) हुए। आरोप है कि कर्ज और ब्याज के एवज में राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी द्वारा जारी किए गए आठ में से सात चेक बैंकों में बाउंस हो गए। इसके उपरांत वित्तीय कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत अभिनेता और उनकी पत्नी के खिलाफ कुल सात अलग-अलग आपराधिक शिकायतें दर्ज कराईं।

दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख: बार-बार वादे तोड़ने पर खारिज की थी प्रोबेशन अर्जी

इससे पूर्व दिल्ली की मजिस्ट्रेट अदालत ने वर्ष 2018 में राजपाल यादव को दोषी करार देते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी, जिसे वर्ष 2024 में सत्र न्यायालय ने घटाकर तीन महीने कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन दाखिल की थी।
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 10 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए अभिनेता की सजा को बरकरार रखा था। अदालत ने सातों मामलों में तीन-तीन महीने के साधारण कारावास का आदेश दिया था और निर्देश दिया था कि ये सभी सजाएं एक साथ (Concurrently) चलेंगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रत्येक मामले में लगभग ₹1.05 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया था, जिसमें से ₹1,04,75,000 की राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर और ₹25,000 राज्य को जुर्माने के रूप में देय थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राजपाल यादव को परिवीक्षा (Probation) का लाभ देने से यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया था कि अभिनेता ने अदालतों में बार-बार भुगतान के शपथपत्र और अंडरटेकिंग दिए लेकिन कभी उनका पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अभिनेता द्वारा न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान नहीं दिखाया गया और पूर्व में दिए गए कई मौकों के बावजूद पूरी देनदारी नहीं चुकाई गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने आदेश को चुनौती देने के लिए अभिनेता को दो महीने का समय देते हुए 10 सितंबर तक सरेंडर की मियाद तय की थी।

सुप्रीम कोर्ट में राजपाल यादव की कानूनी दलील: समझौते के बाद पुरानी शिकायतें मान्य नहीं

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) में राजपाल यादव ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ही ऐतिहासिक फैसले ‘गिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ (Gimpex Pvt Ltd v. Manoj Goel) की नजीर पेश की है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि जब दोनों पक्षों के बीच बाद में एक नया समझौता हो चुका था, तो समझौते के तहत जारी नए चेकों के आधार पर ही कोई नया वाद उत्पन्न हो सकता था, जबकि शिकायतकर्ता ने पुराने सुरक्षा चेकों के आधार पर मूल आपराधिक शिकायतों को आगे बढ़ाया जो कानूनन गलत है। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया कि अभिनेता द्वारा अब तक विभिन्न चरणों में लगभग ₹2.25 करोड़ से ₹4.25 करोड़ की राशि शिकायतकर्ता को पहले ही चुकाई जा चुकी है, जिसे हाईकोर्ट ने जुर्माने में समायोजित करने का निर्देश दिया था।

पत्नी राधा यादव की देनदारी और मामलों की स्थिति

यह मामला केवल राजपाल यादव तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव भी कंपनी में निदेशक होने के नाते सह-अभियुक्त हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके लिए भी प्रत्येक मामले में ₹5,51,380 का भुगतान करने का आदेश दिया था, तथा भुगतान न करने की स्थिति में तीन महीने की साधारण कैद का प्रावधान किया था। सुप्रीम कोर्ट में दायर संयुक्त याचिका में दोनों ने राहत की गुहार लगाई है, जिस पर अदालत ने दोनों को ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त पर सरेंडर से अस्थायी सुरक्षा दी है।

Rajpal Yadav Supreme Court: क्या राजपाल यादव की सजा खत्म हो गई है?

सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश का अर्थ यह कतई नहीं है कि राजपाल यादव की दोषसिद्धि या जेल की सजा रद्द हो गई है। यह केवल एक अस्थायी न्यायिक स्थगन (Interim Reprieve) है, जो उन्हें तुरंत तिहाड़ जेल जाने से रोकता है।
अब पूरा दारोमदार इस बात पर निर्भर करता है कि अभिनेता 9 सितंबर को अदालत की रजिस्ट्री में ₹5 करोड़ जमा करते हैं या नहीं। इसके बाद 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनेगा और यह तय करेगा कि क्या दिल्ली हाईकोर्ट के दोषसिद्धि के आदेश में किसी कानूनी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

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