सुपरस्टार बनने के बाद भी बस कंडक्टर की नौकरी को याद करते हैं रजनीकांत, बताया खास लगाव

जेलर 2 के प्रचार के दौरान रजनीकांत ने बेंगलुरु में बस कंडक्टर के दिनों को याद किया

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Rajinikanth News: भारतीय सिनेमा के ‘थलाइवा’ और महानायक रजनीकांत अपनी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जेलर 2’ के प्रचार के दौरान अपने जीवन के सबसे प्रारंभिक और संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए भावुक नजर आए। पांच दशकों से बड़े पर्दे पर अपने जादुई अंदाज, करिश्माई स्क्रीन प्रेजेंस और अद्वितीय संवाद अदायगी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत ने साझा किया कि सिनेमाई जगत में अभूतपूर्व सफलता और शोहरत हासिल करने के बावजूद उनके दिल में बेंगलुरु में बस कंडक्टर के रूप में बिताए पांच वर्षों के लिए आज भी विशेष स्थान है। उन्होंने बेहद सादगी से कहा कि उन्होंने कभी भी खुद को एक बहुत बड़ा सुपरस्टार नहीं माना और अपनी शुरुआती जड़ों से जुड़ाव ही उनके जीवन की वास्तविक पूंजी है।

Rajinikanth News: बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस और पांच साल के सेवाकाल की अनमोल यादें

फिल्म ‘जेलर 2’ के प्रमोशनल कार्यक्रम में मीडिया और प्रशंसकों से मुखातिब होते हुए रजनीकांत ने अपनी वास्तविक पहचान शिवाजी राव गायकवाड़ से सुपरस्टार रजनीकांत बनने के सफर के शुरुआती पन्नों को खोला। उन्होंने बताया कि अभिनय उनका पहला प्यार जरूर है, लेकिन बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस (BTS) में एक बस कंडक्टर के रूप में बिताए गए पांच साल उनके जीवन का सबसे जीवंत दौर रहे हैं।
उस दौर में रूट नंबर 10ए पर बस में टिकट काटने के दौरान ही उनके भीतर यात्रियों का मनोरंजन करने, अनूठे अंदाज में सीटी बजाने और अपनी विशिष्ट शैली विकसित करने की आदत पनपी थी। रजनीकांत ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति शून्य से शुरुआत करके शीर्ष पर पहुंचता है, तो उसे अपनी जमीन कभी नहीं भूलनी चाहिए। सिनेमा के शिखर पर पहुंचने के बाद भी वह दौर उनके अस्तित्व से कभी अलग नहीं हुआ।

बेंगलुरु की सड़कों पर आज भी जाग उठती है पुरानी आत्मीयता

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से अपने भावनात्मक रिश्ते का जिक्र करते हुए रजनीकांत ने कहा कि जब भी वह इस शहर की सीमाओं में कदम रखते हैं, तो उनकी स्मृतियां स्वतः ही उस दौर में लौट जाती हैं। सड़क पर बीटीएस या बीएमटीसी की लाल-नीली बसों को गुजरते देखकर आज भी उनके चेहरे पर एक सहज और स्वाभाविक मुस्कान आ जाती है।
हाल ही में शहर के प्रवास के दौरान उन्होंने महसूस किया कि उस पेशे के प्रति उनका आदर और लगाव समय बीतने के साथ कम होने के बजाय और गहरा हुआ है। उनके लिए प्रसिद्धि और पुरस्कार क्षणिक हो सकते हैं, लेकिन अपने साथी ड्राइवरों, कंडक्टरों और आम जनता के साथ बिताया गया वह सीधा और सरल जीवन आज भी उनके आत्मिक संतोष का सबसे बड़ा माध्यम है।

कठिन संघर्ष से भारतीय सिनेमा के निर्विवाद सम्राट बनने की गाथा

शिवाजी राव गायकवाड़ के संघर्ष की कहानी भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे प्रेरणादायक यात्राओं में गिनी जाती है। बढ़ईगीरी और कुली के काम से लेकर बस कंडक्टर बनने तक का सफर उनकी आजीविका की जरूरत था, लेकिन उनके भीतर अभिनय की ज्वाला निरंतर धधक रही थी। उनके करीबी दोस्त और बस ड्राइवर राज बहादुर ने उनकी इस प्रतिभा को पहचाना और उन्हें मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने के लिए आर्थिक व मानसिक संबल प्रदान किया।
वर्ष 1975 में महान निर्देशक के. बालचंदर की तमिल फिल्म ‘अपूर्व रागंगल’ के जरिए सिनेमा में पदार्पण करने वाले रजनीकांत ने शुरुआती नकारात्मक भूमिकाओं से निकलकर धीरे-धीरे नायक और फिर एक सांस्कृतिक प्रतीक का दर्जा हासिल किया। सिगरेट उछालने की कला, चश्मे को घुमाने की गति और जोरदार डायलॉग डिलीवरी ने उन्हें भारतीय पॉप कल्चर का अमर चेहरा बना दिया।

‘जेलर 2’ और टाइगर मुथुवेल पांडियन की बहुप्रतीक्षित वापसी

रजनीकांत इन दिनों निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार की बहुचर्चित एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘जेलर 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं। वर्ष 2023 में रिलीज हुई ‘जेलर’ ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर 600 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर एक नया कीर्तिमान रचा था। अब इसके दूसरे भाग में रजनीकांत एक बार फिर अपने प्रतिष्ठित और खौफनाक किरदार ‘टाइगर मुथुवेल पांडियन’ के रूप में स्क्रीन पर वापसी कर रहे हैं।
निर्माताओं द्वारा जारी पोस्टर्स और बैकग्राउंड स्कोर ने दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता जगा रखी है। यह फिल्म 15 अक्टूबर 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में भव्य स्तर पर प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें कई शीर्ष भारतीय कलाकारों के विशेष कैमियो भी देखने को मिलेंगे।

Rajinikanth News: सादगी, विनम्रता और युवा पीढ़ी के लिए कालातीत संदेश

स्टारडम के इस चकाचौंध भरे दौर में, जहां अक्सर कलाकार अपनी जड़ों को पीछे छोड़ देते हैं, रजनीकांत का अपनी शुरुआती नौकरी को सार्वजनिक मंच से इस आदर के साथ याद करना उनके असाधारण चरित्र को दर्शाता है। उनका यह दृष्टिकोण आज के युवाओं और प्रशंसकों को यह महत्वपूर्ण सीख देता है कि कार्य चाहे कोई भी हो, उसकी गरिमा को हमेशा सहेजना चाहिए और सफलता कभी भी अहंकार का कारण नहीं बननी चाहिए। रजनीकांत का यह बेबाक और सच्चा अनुभव न केवल फिल्म ‘जेलर 2’ के प्रचार को एक आत्मीय आयाम देता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि वह सिर्फ परदे के नायक नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक सच्चे जननायक हैं।

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