रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत, 10 प्रमुख ट्रेनों का किराया होगा सस्ता, अप्रैल मध्य से लागू होगी नई व्यवस्था

अप्रैल मध्य से 10 ट्रेनों (विभूति, नेताजी, उपासना, कुंभ, हिमगिरि एक्सप्रेस) से सुपरफास्ट टैग हटेगा, अतिरिक्त शुल्क खत्म, नंबर बदलेंगे

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Railway Update: ट्रेन से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अप्रैल के मध्य से देश की 10 प्रमुख ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही इन ट्रेनों का किराया भी कम हो जाएगा, जिससे आम यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला बोझ घटेगा। यह फैसला उन यात्रियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है जो नियमित रूप से लंबी दूरी की यात्रा करते हैं।

भारतीय रेलवे की इस नई व्यवस्था के तहत जिन ट्रेनों से सुपरफास्ट का टैग हटाया जा रहा है, वे अब सामान्य एक्सप्रेस की श्रेणी में चलेंगी। साथ ही इन सभी ट्रेनों के नंबर भी बदल दिए जाएंगे। यह बदलाव 13 से 16 अप्रैल 2026 के बीच क्रमशः लागू किया जाएगा।

किन ट्रेनों से हटेगा सुपरफास्ट का दर्जा

रेलवे ने जिन 10 ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटाने का फैसला किया है, उनमें पूर्वी और उत्तरी भारत को जोड़ने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से प्रयागराज रामबाग से हावड़ा जाने वाली विभूति एक्सप्रेस और हावड़ा से प्रयागराज जंक्शन होकर कालका जाने वाली नेताजी एक्सप्रेस शामिल हैं।

विभूति एक्सप्रेस रामबाग से हावड़ा के बीच 31 स्टेशनों पर रुकती है। इतने अधिक स्टॉपेज के कारण इस ट्रेन की औसत गति सुपरफास्ट ट्रेन के मानकों के अनुरूप नहीं रह गई थी। इसी तरह नेताजी एक्सप्रेस का ठहराव प्रयागराज जंक्शन समेत कुल 38 स्टेशनों पर है, जो इसे एक सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन की श्रेणी में ला देता है।

इसके अलावा वाराणसी और लखनऊ के रास्ते चलने वाली हावड़ा-देहरादून कुंभ एक्सप्रेस, हावड़ा-देहरादून उपासना एक्सप्रेस और हावड़ा-जम्मूतवी हिमगिरि एक्सप्रेस जैसी लोकप्रिय ट्रेनों को भी सुपरफास्ट की लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। इन सभी ट्रेनों में ठहराव की संख्या काफी अधिक है, जिसके कारण इनका यात्रा समय सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर हो गया था।

Railway Update: ट्रेनों की पूरी सूची और बदलाव की तिथि

रेलवे ने जिन ट्रेनों में यह बदलाव किया है, उनकी विस्तृत जानकारी इस प्रकार है:

प्रयागराज रामबाग-हावड़ा विभूति एक्सप्रेस: मौजूदा नंबर 12334 को बदलकर 13048 कर दिया जाएगा। यह बदलाव 14 अप्रैल से प्रभावी होगा।

हावड़ा-प्रयागराज रामबाग विभूति एक्सप्रेस: इसका नंबर 12333 से बदलकर 13047 हो जाएगा। यह परिवर्तन 13 अप्रैल से लागू होगा।

हावड़ा-कालका नेताजी एक्सप्रेस: इस ट्रेन का नंबर 12311 से 13051 में बदल जाएगा। नई व्यवस्था 13 अप्रैल से शुरू होगी।

कालका-हावड़ा नेताजी एक्सप्रेस: नंबर 12312 को 13052 में बदला जाएगा। यह 15 अप्रैल से प्रभावी होगा।

हावड़ा-देहरादून उपासना एक्सप्रेस: इसका नंबर 12327 से 13035 हो जाएगा। परिवर्तन 14 अप्रैल से लागू होगा।

देहरादून-हावड़ा उपासना एक्सप्रेस: नंबर 12328 को बदलकर 13036 कर दिया जाएगा। यह 15 अप्रैल से शुरू होगा।

हावड़ा-देहरादून कुंभ एक्सप्रेस: ट्रेन नंबर 12369 से 13037 में बदल जाएगा। यह 13 अप्रैल से प्रभावी होगा।

देहरादून-हावड़ा कुंभ एक्सप्रेस: इसका नंबर 12370 से 13038 हो जाएगा। नई व्यवस्था 14 अप्रैल से लागू होगी।

हावड़ा-जम्मूतवी हिमगिरि एक्सप्रेस: नंबर 12331 को 13041 में बदला जाएगा। यह 14 अप्रैल से शुरू होगा।

जम्मूतवी-हावड़ा हिमगिरि एक्सप्रेस: इस ट्रेन का नंबर 12332 से 13042 हो जाएगा। परिवर्तन 16 अप्रैल से प्रभावी होगा।

कितनी राहत मिलेगी यात्रियों को

सुपरफास्ट का दर्जा हटने से यात्रियों को सीधे तौर पर किराए में राहत मिलेगी। भारतीय रेलवे सुपरफास्ट ट्रेनों में यात्रा के लिए जनरल, स्लीपर और एसी सभी श्रेणियों में अतिरिक्त शुल्क वसूलता है। यह अतिरिक्त चार्ज अलग-अलग श्रेणियों में अलग-अलग होता है।

उदाहरण के तौर पर, विभूति एक्सप्रेस में स्लीपर कोच में यात्रा करने पर 30 रुपये का अतिरिक्त सुपरफास्ट चार्ज लगता था। एसी थ्री टियर और एसी टू टियर में यह शुल्क 45 रुपये था। अब जब इन ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हट जाएगा, तो यात्रियों को यह अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा।

यह राहत खासतौर पर उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है जो नियमित रूप से इन रूटों पर यात्रा करते हैं। महीने में कई बार यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बचत काफी बड़ी साबित हो सकती है। एक साल में यह राहत सैकड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।

Railway Update: यात्रियों की मांग थी तर्कसंगत किराया

लंबे समय से यात्री इस बात की शिकायत कर रहे थे कि जिन ट्रेनों की गति सुपरफास्ट के मानकों के अनुरूप नहीं है, उनमें सुपरफास्ट का अतिरिक्त शुल्क वसूलना उचित नहीं है। बहुत से यात्रियों ने रेलवे से मांग की थी कि या तो इन ट्रेनों की गति बढ़ाई जाए या फिर सुपरफास्ट का दर्जा हटाया जाए।

यात्रियों का तर्क था कि जब ट्रेनें 30 से 40 स्टेशनों पर रुकती हैं, तो उनकी औसत गति काफी कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में सुपरफास्ट का अतिरिक्त शुल्क लेना न्यायसंगत नहीं है। कई यात्री संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया था और रेलवे से किराया तर्कसंगत बनाने की मांग की थी।

रेलवे ने इन शिकायतों और मांगों को गंभीरता से लिया और विस्तृत समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे किराया व्यवस्था अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत हो जाएगी।

रेलवे का पक्ष और तर्कसंगतता

रेलवे का मानना है कि यह फैसला यात्रियों के हित में है और इससे किराया तर्कसंगत होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सुपरफास्ट ट्रेनों की श्रेणी में वही ट्रेनें होनी चाहिए जो वास्तव में तेज गति से चलती हैं और कम स्टेशनों पर रुकती हैं।

जिन ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटाया जा रहा है, उनमें स्टॉपेज की संख्या बहुत अधिक है। इसके कारण इन ट्रेनों का कुल यात्रा समय सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर या कभी-कभी उससे भी अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में इन्हें सुपरफास्ट की श्रेणी में रखना उचित नहीं था।

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से सेवाओं की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ट्रेनों का समय, रूट और ठहराव सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा। केवल सुपरफास्ट का टैग और उससे जुड़ा अतिरिक्त शुल्क हटाया जा रहा है।

Railway Update: यात्रियों को क्या करना होगा

जो यात्री इन ट्रेनों में नियमित रूप से यात्रा करते हैं, उन्हें नए ट्रेन नंबरों की जानकारी रखनी होगी। 13 अप्रैल के बाद टिकट बुक करते समय पुराने नंबर काम नहीं करेंगे। नए नंबर से ही टिकट बुकिंग करनी होगी।

हालांकि रेलवे की ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली में यह बदलाव स्वतः अपडेट हो जाएंगे। फिर भी यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय नए ट्रेन नंबरों की जांच कर लें।

स्टेशनों पर भी नए नंबरों की घोषणा की जाएगी और सूचना पट्टों पर जानकारी अपडेट की जाएगी। रेलवे कर्मचारियों को भी इस बदलाव की पूरी जानकारी दी जाएगी ताकि वे यात्रियों का सही मार्गदर्शन कर सकें।

अन्य ट्रेनों पर भी विचार

रेलवे सूत्रों के अनुसार, यह पहला चरण है। भविष्य में अन्य ट्रेनों की भी समीक्षा की जाएगी और जहां जरूरी होगा, वहां इसी तरह के बदलाव किए जा सकते हैं। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को उचित किराए पर बेहतर सेवा प्रदान करना है।

रेलवे लगातार यात्रियों की प्रतिक्रिया और सुझावों पर काम कर रहा है। किराया तर्कसंगतीकरण इसी दिशा में एक कदम है। आने वाले समय में और भी ऐसे सुधार देखने को मिल सकते हैं।

Railway Update: निष्कर्ष

कुल मिलाकर, यह फैसला उन करोड़ों यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है जो रोजमर्रा या लंबी दूरी की यात्रा ट्रेन से करते हैं। अप्रैल के मध्य से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था से यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और उन्हें किराए में राहत मिलेगी।

यह कदम रेलवे की यात्री-हितैषी नीति को दर्शाता है। यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करके रेलवे ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। उम्मीद की जाती है कि आने वाले समय में और भी ऐसे सुधार देखने को मिलेंगे जो यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएंगे।

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