Rahul Gandhi ने नेहा बोरा को क्यों आगे किया? एनएसयूआई प्रवक्ता ने दिया जवाब
Rahul Gandhi ने नेहा बोरा को क्यों आगे किया? एनएसयूआई प्रवक्ता ने दिया जवाब
Rahul Gandhi: दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में एनएसयूआई के आंदोलन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा को आगे करने पर सवाल उठे। आजतक पंचायत राजस्थान में कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े राहुल सिंह ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी एक चेहरे या पार्टी का नहीं है। पूरे देश के युवाओं का साझा संघर्ष है। महिला कार्यकर्ताओं को मंच मिलना जरूरी था। इसी कार्यक्रम में बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया पर बीजेपी और विपक्षी युवा नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। राजस्थान के युवा मुद्दों पर चारों पक्षों ने अपने-अपने दावे रखे।
Rahul Gandhi: नेहा बोरा को मंच देने का कारण
राहुल सिंह ने कहा कि पार्टी का मकसद आंदोलन को किसी एक चेहरे तक सीमित रखना नहीं है। कांग्रेस मानती है कि छात्र और युवा आंदोलन पूरे देश का साझा संघर्ष है। नेहा बोरा को आगे लाना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बीच महिला कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का मंच मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर किसी महिला को परेशान या प्रताड़ित किया जाएगा तो राहुल गांधी और कांग्रेस उसके साथ खड़े होंगे। यह फैसला छात्र आंदोलन में अलग-अलग आवाजों को जगह देने की कोशिश है। युवाओं का आंदोलन सिर्फ कांग्रेस या एनएसयूआई का नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
युवा आंदोलन को साझा संघर्ष बताया
राहुल सिंह ने बताया कि बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर अलग-अलग संगठनों को एक साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि एबीवीपी के युवाओं को भी इन मुद्दों पर साथ आना चाहिए। दिल्ली के आंदोलन में देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र शामिल होते हैं।
उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि नीट और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर 2023 से संघर्ष चल रहा है। छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए, पुलिस कार्रवाई का सामना किया और जेल भी गए। आंदोलन की सफलता केवल चुनावों में जीत-हार से नहीं मापी जा सकती। नीतियों में बदलाव और समस्याओं को सार्वजनिक चर्चा में लाना भी मायने रखता है।
राजस्थान में रोजगार और भर्ती पर सवाल
राजस्थान के संदर्भ में राहुल सिंह ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के सामने रोजगार के अवसर बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बड़ी चुनौती है। केवल हाईवे और रेलवे स्टेशन के विकास से युवाओं की रोजगार संबंधी समस्याएं हल नहीं होंगी। सीकर और कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान शिक्षा और परीक्षाओं के केंद्र के रूप में मजबूत होनी चाहिए।
उन्होंने राइजिंग राजस्थान के तहत निवेश के दावों और रोजगार में उनके वास्तविक रूपांतरण को लेकर सवाल उठाए। रोजगार के नियमित अवसरों की कमी और स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर विद्यार्थियों का पढ़ाई छोड़ना गंभीर समस्याएं हैं। समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बल्कि प्रशासनिक सुधार और रोजगार सृजन पर ध्यान देकर निकाला जा सकता है।
बीजेपी युवा नेताओं के दावे
बीजेपी युवा मोर्चा के उपेन यादव ने अपने लंबे आंदोलन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारों की मांगों को लेकर कई आंदोलन किए, लाठियां खाईं और जेल गए। करीब 12 वर्षों के संघर्ष के दौरान लाखों युवाओं को नौकरी मिलने की प्रक्रिया में योगदान रहा। भाजपा सरकार में एसआईटी गठित की गई और 400 से अधिक लोग जेल में हैं।
उन्होंने भर्ती कैलेंडर जारी करने और दस्तावेज सत्यापन जैसी जिम्मेदारियों को विभागों को सौंपने का जिक्र किया। लगभग 1.93 लाख नौकरियों का आंकड़ा सामने आया है। शंकर गोरा ने कहा कि भर्ती कैलेंडर से अभ्यर्थियों को परीक्षा की तारीख पता चलती है। पहले अनिश्चितता रहती थी। एक लाख पदों पर भर्ती की योजना के संबंध में कैलेंडर जारी किया गया।
Rahul Gandhi: हनुमान किसान की मांगें
हनुमान किसान ने कहा कि भर्ती कैलेंडर जारी करना अच्छी पहल है लेकिन उसका समय पर पालन भी जरूरी है। कुछ भर्तियों की समयसीमा पूरी नहीं हुई। आरपीएससी में स्थायी अध्यक्ष और सचिव जैसे पदों की व्यवस्था जरूरी है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में बैंक स्तर पर ऋण लेने में कठिनाइयां आ रही हैं।
उन्होंने 2024 में फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती को लेकर आंदोलन की अनुमति न मिलने का जिक्र किया। जब 500-600 बेरोजगार युवा जयपुर पहुंचते हैं तो उनकी मांगें सुनने के लिए अधिकारी उपलब्ध होने चाहिए। लोकतंत्र में सरकार और बेरोजगार युवाओं के बीच संवाद की व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है।
राहुल गांधी द्वारा नेहा बोरा को आगे करने पर एनएसयूआई प्रवक्ता ने साफ किया कि आंदोलन साझा है और महिलाओं को मंच देना जरूरी था। बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया पर कांग्रेस, बीजेपी और अन्य युवा नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा ने भर्ती कैलेंडर और एसआईटी कार्रवाई को उपलब्धि बताया जबकि विपक्ष ने समय पर पालन और पारदर्शिता की मांग की। राजस्थान के युवाओं के सामने रोजगार और शिक्षा की चुनौतियां बनी हुई हैं। समाधान प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही से निकल सकता है।
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