ममता की ‘छोटी बहन’ बोलकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कस दिया तीखा तंज! फांसीदेवा के छोटे मैदान से नाराज, विधाननगर देखकर भड़कीं, संथाल कॉन्फ्रेंस में उठाए गंभीर सवाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सिलीगुड़ी में नाराज, फांसीदेवा मैदान छोटा होने पर ममता सरकार पर सवाल, विधाननगर देखकर कटाक्ष

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Droupadi Murmu statement: देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी दौरे पर थीं। वे 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, लेकिन इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम स्थल को लेकर जो नाराजगी जाहिर की, उसने पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी। राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी “छोटी बहन” तो कहा, लेकिन साथ ही उन पर जोरदार कटाक्ष भी किया।

Droupadi Murmu statement: फांसीदेवा का छोटा मैदान बना विवाद की जड़

9वां अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में आयोजित किया गया था। यह कॉन्फ्रेंस संथाल समुदाय के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन था और देशभर से हजारों लोग इसमें शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन जब राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, तो उन्होंने पाया कि मैदान की क्षमता बेहद सीमित थी। राष्ट्रपति मुर्मू ने खुद मंच से इस बात को स्वीकार किया कि जगह इतनी कम थी कि हजारों लोग बाहर ही खड़े रह गए और कार्यक्रम में शामिल होने से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि यह देखकर उनका मन दुखी हो गया।

Droupadi Murmu statement: विधाननगर देखकर और भड़कीं राष्ट्रपति

कार्यक्रम के बाद जब राष्ट्रपति मुर्मू विधाननगर के बड़े मैदान से होकर गुजरीं, तो उन्होंने तुरंत दोनों स्थानों की तुलना की। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि यह आयोजन विधाननगर के मैदान में होता, तो लाखों लोग एक साथ इकट्ठा हो सकते थे और संथाल समाज के इस ऐतिहासिक आयोजन की भव्यता कई गुना अधिक होती। उनके इस बयान को सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल सरकार की लापरवाही से जोड़कर देखा जा रहा है। राष्ट्रपति के स्तर के किसी कार्यक्रम के लिए उपयुक्त स्थान न चुनना, राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।

Droupadi Murmu statement: ममता को बताया छोटी बहन, फिर भी नहीं छोड़ा कटाक्ष

राष्ट्रपति मुर्मू ने ममता बनर्जी के बारे में कहा कि वे उनकी “छोटी बहन जैसी” हैं, लेकिन उन्होंने तुरंत जोड़ा कि बहन होने के बावजूद यह उम्मीद नहीं थी कि कार्यक्रम की व्यवस्था इस तरह की जाएगी। यह टिप्पणी भले ही नरम शब्दों में की गई हो, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश एकदम साफ था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति का इस तरह खुलकर नाराजगी जताना असाधारण है। आमतौर पर राष्ट्रपति भवन से इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां कम ही सुनने को मिलती हैं, इसलिए यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Droupadi Murmu statement: संथाल समुदाय के लिए बेहद खास था यह आयोजन

9वां अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस संथाल जनजाति की संस्कृति, भाषा और अधिकारों को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। संथाल समुदाय भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है और पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में निवास करती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद संथाल समुदाय से आती हैं, इसलिए यह कॉन्फ्रेंस उनके लिए व्यक्तिगत महत्व भी रखती थी। उनके लिए यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने समाज के साथ जुड़ाव का एक विशेष अवसर था।

Droupadi Murmu statement: राजनीतिक हलकों में मची हलचल

भाजपा ने राष्ट्रपति की नाराजगी को तुरंत भुनाने की कोशिश की। पार्टी के नेताओं ने कहा कि ममता सरकार ने जानबूझकर आयोजन को सीमित रखा ताकि संथाल समाज का उत्साह और एकजुटता सार्वजनिक रूप से न दिखे। भाजपा नेताओं ने इसे राज्य सरकार का जनजातीय समाज के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया बताया। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आयोजन की सभी जरूरी तैयारियां प्रोटोकॉल के अनुसार की गई थीं। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि विपक्ष राजनीतिक फायदे के लिए इस मुद्दे को बढ़ाचढ़ाकर पेश कर रहा है।

Droupadi Murmu statement: पश्चिम बंगाल में जनजातीय राजनीति का बढ़ता महत्व

पश्चिम बंगाल में आदिवासी और जनजातीय मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। उत्तर बंगाल के कई जिलों में संथाल, राजबंशी और अन्य जनजातीय समुदायों की बड़ी आबादी है, जो चुनावी नतीजों पर निर्णायक असर डालती है। इसीलिए इस घटना को केवल एक प्रशासनिक चूक के रूप में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा और उनकी नाराजगी आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से तब, जब राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरम होता जा रहा है।

Droupadi Murmu statement: क्या यह महज संयोग था या सुनियोजित उपेक्षा?

सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल के चयन को लेकर पहले से ही कुछ स्तरों पर आपत्तियां उठाई गई थीं, लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई बदलाव नहीं किया गया। राष्ट्रपति कार्यालय ने भी पहले ही बड़े स्थान की आवश्यकता के बारे में संकेत दिए थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यही कारण है कि राष्ट्रपति की सार्वजनिक नाराजगी को केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सुचिंतित और जिम्मेदाराना संदेश माना जा रहा है। ममता बनर्जी सरकार के लिए यह एक चेतावनी की तरह है कि जनजातीय समुदाय के प्रति उपेक्षा का राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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