Prahaar Review: राजकुमार राव ने कसाब को फांसी की लड़ाई में मारी बाजी, कहां कमजोर पड़ी फिल्म?
Prahaar Review: राजकुमार राव ने कसाब को फांसी की लड़ाई में मारी बाजी, कहां कमजोर पड़ी फिल्म?
Prahaar Review: राजकुमार राव और वामिका गब्बी स्टारर फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्जवल निकम’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म 26/11 मुंबई हमलों के बाद आतंकी अजमल कसाब को फांसी तक पहुंचाने की कानूनी लड़ाई पर आधारित है। सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के किरदार में राजकुमार राव नजर आ रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म ‘रणबाली’ और ‘नई नवेली’ के साथ टकरा रही है। तीनों फिल्में अलग जॉनर की हैं। ‘प्रहार’ कोर्टरूम ड्रामा और बायोपिक की श्रेणी में आती है। फिल्म दो घंटे बीस मिनट की है और निर्देशक अविनाश अरुण ने इसे बनाया है।
प्रहार फिल्म की कहानी क्या है
कहानी की शुरुआत 26/11 के हमलों से होती है। हमले के बाद अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। उसे सजा दिलाना आसान काम नहीं था। कसाब अदालत में अपनी बातें बदलता रहा। कभी वह मुंबई आने की वजह अलग बताता तो कभी उम्र को लेकर झूठ बोलता और कहता कि वह अठारह साल का नहीं है। उज्ज्वल निकम ने कोर्टरूम में यह मुकदमा लड़ा। फिल्म में दिखाया गया है कि निकम की जिंदगी अदालत के इर्द-गिर्द घूमती है और इसके चलते वे परिवार से दूर हो जाते हैं। वामिका गब्बी उनकी पत्नी का रोल निभा रही हैं। बचाव पक्ष के वकील अब्बास काजमी की भूमिका में सिकंदर खेर हैं। कहानी इसी कानूनी लड़ाई और परिवारिक संतुलन के इर्द-गिर्द घूमती है।
स्क्रीनप्ले और निर्देशन कैसा रहा
फिल्म का विषय गंभीर है और स्क्रीनप्ले में इस बात का ध्यान रखा गया है। कहानी में दम है लेकिन इसे पेश करने का तरीका और बेहतर हो सकता था। फर्स्ट हाफ काफी स्लो चलता है। इसमें सीधे कोर्टरूम के सीन ज्यादा हैं। दर्शकों को शुरू से फिल्म से जुड़ने में दिक्कत हो सकती है। निर्देशक अविनाश अरुण की इस फिल्म में इमोशन कहीं-कहीं कम पड़ते हैं। सेकंड हाफ पहले हाफ से बेहतर है। फिर भी पूरी फिल्म के साथ बंधे रहने में मुश्किल आ सकती है। कोर्टरूम ड्रामा सही जगह है लेकिन रफ्तार और गहराई दोनों में कमी दिखती है।
राजकुमार राव और अन्य कलाकारों का प्रदर्शन
राजकुमार राव जब भी कोई किरदार निभाते हैं तो उसे पूरी तरह अपना बना लेते हैं। यहां भी वही देखने को मिला। उन्होंने उज्ज्वल निकम के रोल को बखूबी निभाया। 26/11 के गुस्से से लेकर इंसाफ की तड़प और कानूनी मुश्किलों तक हर भाव को उन्होंने जिया है। वामिका गब्बी ने भी अच्छा काम किया। जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर का अभिनय भी मजबूत रहा। ललित प्रभाकर कसाब के किरदार में नजर आए। कलाकारों की तरफ से फिल्म को मजबूती मिली है। खासकर राजकुमार राव की एक्टिंग फिल्म को कई जगह बचाती है।
फिल्म की ताकत और कमजोरियां
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत राजकुमार राव का अभिनय और असली घटना पर आधारित कहानी है। कोर्टरूम के सीन गंभीरता से दिखाए गए हैं। परिवार और ड्यूटी के बीच संतुलन का पहलू भी छूता है। कमजोरी यह है कि फर्स्ट हाफ धीमा है और इमोशनल गहराई कम है। दर्शक लंबे कोर्टरूम ड्रामा से ऊब सकते हैं। सेकंड हाफ में सुधार होता है लेकिन ओवरऑल पकड़ मजबूत नहीं बन पाती। रेटिंग के लिहाज से फिल्म औसत स्तर पर खड़ी होती है।
देखें या नहीं देखें
अगर आपको राजकुमार राव की एक्टिंग पसंद है और सच्ची घटनाओं पर बनी कहानियां अच्छी लगती हैं तो इस फिल्म को एक बार देखा जा सकता है। सिर्फ एंटरटेनमेंट या तेज रफ्तार वाली फिल्म ढूंढ रहे हैं तो यह उम्मीद पूरी नहीं करेगी। दो घंटे बीस मिनट की यह फिल्म गंभीर विषय पर बनी है और कलाकारों ने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया है। बॉक्स ऑफिस पर अन्य फिल्मों के साथ क्लैश होने से इसकी शुरूआत पर असर पड़ सकता है।
‘प्रहार’ फिल्म 26/11 के बाद की कानूनी लड़ाई को लेकर बनी है और राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम के किरदार को दमदार तरीके से निभाया है। कहानी में दम है लेकिन स्क्रीनप्ले और रफ्तार में कमियां दिखती हैं। फर्स्ट हाफ स्लो होने से जुड़ाव कमजोर रहता है जबकि सेकंड हाफ बेहतर है। वामिका गब्बी और अन्य कलाकारों ने भी अच्छा काम किया। फिल्म औसत स्तर की है। सच्ची घटनाओं और राजकुमार राव की एक्टिंग के चाहने वाले इसे एक बार देख सकते हैं।
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