शताब्दी का अंत, 1921 से सत्ता केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से पीएमओ की विदाई, ‘सेवा तीर्थ’ होगा नया ठिकाना
13 फरवरी 2026 को पीएम मोदी करेंगे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1,2 का उद्घाटन; साउथ ब्लॉक अंतिम कैबिनेट बैठक
PMO Shift Seva Teerth News: भारतीय लोकतंत्र और प्रशासन के इतिहास में आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार 13 फरवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ के साथ-साथ कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यह कदम केवल एक भौगोलिक स्थानांतरण नहीं, बल्कि भारतीय शासन व्यवस्था को औपनिवेशिक छाप से मुक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक पहल है।
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बुधवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, पीएम मोदी दोपहर लगभग 1:30 बजे ‘सेवा तीर्थ’ भवन परिसर के नामकरण का अनावरण करेंगे। इसके उपरांत शाम 6 बजे वे औपचारिक रूप से सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 एवं 2 का उद्घाटन करेंगे तथा सेवा तीर्थ परिसर में आयोजित एक विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से सरकारी अधिकारी, राजनीतिक नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
PMO Shift Seva Teerth News: ब्रिटिश इमारत में अंतिम कैबिनेट बैठक
इस ऐतिहासिक परिवर्तन से पूर्व, प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार दोपहर ठीक 4 बजे साउथ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय में केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक विशेष बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि यह ब्रिटिश काल की प्रतिष्ठित इमारत में आयोजित होने वाली अंतिम कैबिनेट बैठक होगी। साउथ ब्लॉक की इस विशाल इमारत का निर्माण 1900 के दशक की शुरुआत में ब्रिटिश वास्तुकार हर्बर्ट बेकर ने किया था, जिसे विशेष रूप से ब्रिटिश राज की प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था।
रायसीना पहाड़ियों पर स्थित यह भव्य संरचना दिल्ली के लुटियंस जोन का केंद्रीय हिस्सा रही है। वर्ष 1921 से लेकर आज तक, यानी लगभग एक शताब्दी तक, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक भारत में सत्ता और शासन के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। स्वतंत्रता के पश्चात भी ये भवन भारत सरकार के प्रमुख कार्यालयों के रूप में कार्यरत रहे, लेकिन अब सभी सरकारी विभाग इन ऐतिहासिक इमारतों को खाली कर रहे हैं।
युगे युगेन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय बनेंगे पुराने भवन
यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि भारतीय शासन को उपनिवेशवाद की मानसिकता से मुक्त करने की व्यापक सरकारी पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केंद्र सरकार ने इन प्रतिष्ठित ऐतिहासिक भवनों को ‘युगे युगेन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ में परिवर्तित करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। यह विश्व स्तरीय संग्रहालय भारत की प्राचीन सभ्यता से लेकर आधुनिक युग तक की संपूर्ण यात्रा को प्रदर्शित करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भारत के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकेंगी।
इससे पूर्व गृह मंत्रालय पहले ही नॉर्थ ब्लॉक परिसर से स्थानांतरित हो चुका है और नए कॉमन सेंट्रल सचिवालय में कार्यरत है। अब पीएमओ के स्थानांतरण के साथ ही नॉर्थ और साउथ ब्लॉक से सरकारी विभागों का पूर्ण रूप से स्थानांतरण पूरा हो जाएगा।
PMO Shift Seva Teerth News: सेवा तीर्थ में तीन महत्वपूर्ण सचिवालय
नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय भी स्थापित किए गए हैं। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले ये तीनों अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्यालय विभिन्न स्थानों पर कार्यरत थे, जिससे समन्वय स्थापित करने में कठिनाइयां और समय की बर्बादी होती थी। अब एक ही परिसर में इन तीनों के होने से देश की सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े निर्णय अधिक तेजी और बेहतर समन्वय के साथ लिए जा सकेंगे।
पीएमओ के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह उद्घाटन भारत की प्रशासनिक शासन संरचना में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर साबित होगा। यह आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का साकार रूप है।
विगत कई दशकों से केंद्रीय विस्टा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर बिखरे पुराने और जर्जर बुनियादी ढांचे से प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय संचालित हो रहे थे। इस भौगोलिक विखंडन के कारण परिचालन संबंधी गंभीर अक्षमताएं, विभागों के बीच समन्वय में चुनौतियां, लगातार बढ़ते रखरखाव खर्च और कार्य के लिए उपयुक्त आधुनिक वातावरण का अभाव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं।
ग्यारह प्रमुख मंत्रालय होंगे कर्तव्य भवन में
कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में देश के ग्यारह अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इनमें वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय तथा जनजातीय मामलों का मंत्रालय सम्मिलित हैं।
इससे पूर्व अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया था, जिसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय स्थापित है। कर्तव्य भवन-3 में कुल 347 कमरे हैं और इसका निर्माण कुशलता, नवाचार और सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया था।
PMO Shift Seva Teerth News: डिजिटल युग की अत्याधुनिक सुविधाएं
सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन परिसरों में अत्याधुनिक डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुनियोजित सार्वजनिक इंटरफेस क्षेत्र और आधुनिक केंद्रीकृत रिसेप्शन सुविधाएं स्थापित की गई हैं। ये तकनीकी विशेषताएं विभिन्न विभागों के बीच सहयोग को बढ़ावा देंगी, प्रशासनिक दक्षता में सुधार करेंगी, निर्बाध शासन को सक्षम बनाएंगी, नागरिक जुड़ाव को मजबूत करेंगी और सरकारी कर्मचारियों के समग्र कल्याण को बढ़ाएंगी।
इन विशाल परिसरों को 4-स्टार जीआरआईएचए (GRIHA – Green Rating for Integrated Habitat Assessment) मानकों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किया गया है। भवनों में अत्याधुनिक नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, प्रभावी जल संरक्षण उपाय, आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च प्रदर्शन वाली ऊर्जा दक्ष इमारती संरचना शामिल है। ये पर्यावरण अनुकूल उपाय पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम करते हुए परिचालन दक्षता को अधिकतम करते हैं।
सुरक्षा और सार्वजनिक पहुंच को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, भवन परिसरों में व्यापक सुरक्षा और संरक्षा ढांचा स्थापित किया गया है। इसमें स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, अत्याधुनिक निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया बुनियादी ढांचा शामिल है। यह व्यवस्था सरकारी अधिकारियों और आम आगंतुकों दोनों के लिए एक पूरी तरह सुरक्षित और सुलभ वातावरण सुनिश्चित करती है।
सेंट्रल विस्टा 1189 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना
यह प्रशासनिक स्थानांतरण केंद्र सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस व्यापक परियोजना में नई संसद भवन का निर्माण, सांसदों के लिए आधुनिक कार्यालय कक्ष, सेंट्रल विस्टा एवेन्यू का सौंदर्यीकरण और कॉमन सेंट्रल सचिवालय की दस आधुनिक इमारतों का निर्माण शामिल है।
प्रतिष्ठित निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो द्वारा निर्मित संपूर्ण सेवा तीर्थ परिसर, जिसे एक्जीक्यूटिव एन्क्लेव के नाम से भी जाना जाता है, की कुल लागत लगभग 1,189 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह विशाल परिसर कुल 2,26,203 वर्ग फुट के क्षेत्र में निर्मित किया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री के लिए एक नया आधिकारिक निवास भी निर्माणाधीन है, जिसे “एक्जीक्यूटिव एन्क्लेव भाग 2” नाम दिया गया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर फैले कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) को पूरी तरह नया और आधुनिक स्वरूप प्रदान करना है। साथ ही, ऐतिहासिक नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को सार्वजनिक रूप से सुलभ विश्व स्तरीय संग्रहालयों में परिवर्तित करना भी इस परियोजना का अभिन्न अंग है।
PMO Shift Seva Teerth News: 13 फरवरी का ऐतिहासिक संयोग
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस ऐतिहासिक बदलाव का उल्लेख करते हुए लिखा, “13 फरवरी 2026 को स्वतंत्र भारत का इतिहास एक निर्णायक नया मोड़ लेता है। प्रतिष्ठित और शक्तिशाली पीएमओ ब्रिटिश युग के साउथ ब्लॉक से अपने नए पते ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “अत्यंत रोचक संयोग यह है कि इसी दिन 1931 में 13 फरवरी को अंग्रेजों ने नई दिल्ली को औपनिवेशिक भारत की राजधानी के रूप में आधिकारिक रूप से घोषित किया था। उस औपनिवेशिक घोषणा से लेकर आज के इस निर्णायक और ऐतिहासिक परिवर्तन तक की लंबी यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औपनिवेशिक विरासत को पूरी तरह छोड़ने और एक सच्चे आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी नए भारत के निर्माण के अटूट संकल्प को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करती है।”
उपनिवेशवाद से मुक्ति की व्यापक पहल
यह उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास को वर्ष 2016 में ‘रेस कोर्स रोड’ से बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ नाम दिया गया था। यह नामकरण जनकल्याण और सेवा का प्रतीक है तथा सरकारी जिम्मेदारियों की निरंतर याद दिलाता है। पिछले वर्ष गृह मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों की सरकारों को परामर्श दिया था कि वे अपने राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ रखें, जो सार्वजनिक संस्थानों में सुधार और उन्हें जनता के करीब लाने की व्यापक पहल का हिस्सा है।
राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ करना, विभिन्न सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलना और अब पीएमओ का स्थानांतरण – ये सभी कदम उपनिवेशवाद की मानसिकता से भारतीय प्रशासन और लोकतंत्र को मुक्त करने की सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं।
PMO Shift Seva Teerth News: प्रशासनिक सुधार और दक्षता में वृद्धि
प्रशासनिक विशेषज्ञों और शासन के जानकारों का मानना है कि इस तरह के समेकन से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय और व्यापक सुधार होगा। अभी तक जब विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालय और सचिवालय दिल्ली में अलग-अलग दूरस्थ स्थानों पर स्थित थे, तो महत्वपूर्ण फाइलों का आदान-प्रदान, अंतर-मंत्रालयी बैठकों का आयोजन और विभागीय समन्वय में बहुत अधिक समय व्यर्थ होता था।
अब एक ही आधुनिक परिसर में कई प्रमुख और महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यरत होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया काफी तेज होगी, अंतर-मंत्रालयी समन्वय बेहद सुगम और प्रभावी होगा और अंततः देश के नागरिकों को तेज, पारदर्शी और बेहतर गुणवत्ता की सरकारी सेवाएं मिल सकेंगी। डिजिटल एकीकरण से ई-गवर्नेंस को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा और अनावश्यक कागजी कार्रवाई में उल्लेखनीय कमी आएगी।
आम नागरिकों के लिए आसान पहुंच
पीएमओ के आधिकारिक बयान में विशेष रूप से कहा गया है कि ये नवीन भवन परिसर नागरिक-केंद्रित शासन की अवधारणा को व्यावहारिक रूप से साकार करेंगे। सुनियोजित सार्वजनिक इंटरफेस क्षेत्र और आधुनिक केंद्रीकृत रिसेप्शन सुविधाओं के माध्यम से आम नागरिकों के लिए सरकारी कार्यालयों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान, सुगम और पारदर्शी होगी।
भवन परिसरों के निर्माण में सरकारी कर्मचारियों के समग्र कल्याण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। अत्याधुनिक आधुनिक कार्य वातावरण, बेहतरीन सुविधाएं, पर्यावरण अनुकूल हरित डिजाइन और कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाई गई संरचना से कर्मचारियों की कार्य उत्पादकता और संतुष्टि में पर्याप्त वृद्धि होने की प्रबल उम्मीद है।
PMO Shift Seva Teerth News: नए भारत के निर्माण का प्रतीक
आज का दिन भारतीय प्रशासनिक और संवैधानिक इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मोड़ है। यह केवल सरकारी इमारतों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण नहीं है, बल्कि यह मानसिकता, सोच और दृष्टिकोण का आमूलचूल परिवर्तन है। औपनिवेशिक युग की रूढ़िवादी सोच से पूरी तरह मुक्त होकर आधुनिक, आत्मनिर्भर, विकासशील और विकसित भारत की ओर तेजी से बढ़ने का यह एक शक्तिशाली और सार्थक प्रतीक है।
‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ – ये दोनों नाम अपने आप में अत्यंत सार्थक, प्रेरणादायक और संदेशात्मक हैं। ‘सेवा तीर्थ’ नाम स्पष्ट रूप से जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश देता है और इसे तीर्थ की संज्ञा देकर सेवा को सर्वोच्च पुण्य कार्य के रूप में स्थापित करता है। वहीं ‘कर्तव्य भवन’ नाम संविधान और देश के प्रति निरंतर कर्तव्यों की याद दिलाता है और यह संदेश देता है कि सत्ता नहीं, बल्कि कर्तव्य ही सर्वोपरि है।
यह महत्वपूर्ण पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नए भारत’ के निर्माण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण, निर्णायक और ऐतिहासिक कदम है। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को भी यह प्रेरणा और संदेश देगा कि भारत ने अपनी लंबी औपनिवेशिक विरासत से पूर्ण मुक्ति प्राप्त कर एक नई, स्वतंत्र और आत्मविश्वासी पहचान स्थापित की है।
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