कच्चा तेल 8% महंगा होने के बावजूद भारत में नहीं बढ़ेगा पेट्रोल-डीजल का दाम, सरकार ने दिया भरोसा, लेकिन होर्मुज बंद हुआ तो बदल सकती है तस्वीर

मिडिल-ईस्ट युद्ध से क्रूड ऑयल 8% महंगा, ब्रेंट 80 डॉलर के करीब, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर रहेंगी। होर्मुज संकट पर नजर, लंबे समय में बदल सकती है तस्वीर।

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Petrol-Diesel Price: मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आग पकड़ चुकी हैं। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है और अमेरिकी कच्चा तेल 8.6 प्रतिशत उछलकर 72.79 डॉलर पर आ गया जो शुक्रवार को करीब 67 डॉलर था। इस सबके बीच देश का हर वाहन चालक और आम नागरिक यही सोच रहा है कि क्या अब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे। इस सवाल का जवाब सरकारी सूत्रों ने दिया है और फिलहाल राहत की खबर यही है कि तुरंत कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आपूर्ति स्थिति की समीक्षा की है और मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि अगर मध्य-पूर्व में हालात और बिगड़े तो तस्वीर बदल सकती है।

अप्रैल 2022 से नहीं बढ़े हैं दाम

भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर हैं। उस दौरान जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था तब भी सरकारी तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं पर बोझ डालने की बजाय खुद नुकसान झेला। बाद में जब कीमतें नरम पड़ीं तो कंपनियों ने अच्छा मार्जिन बनाकर उस नुकसान की भरपाई की। सरकार इसी ‘कैलिब्रेटेड पॉलिसी’ पर चल रही है जिसमें जब कीमतें कम हों तो कंपनियों को मुनाफा कमाने दिया जाए और जब कीमतें बढ़ें तो उपभोक्ताओं को बचाने की कोशिश की जाए।

Petrol-Diesel Price: तेल कंपनियों के पास है मजबूत बफर

सरकारी सूत्रों का कहना है कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों के पास इस तरह के झटके को सहने की पर्याप्त क्षमता है। वित्त वर्ष 2024 में इन कंपनियों ने मिलकर रिकॉर्ड 81 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। इस वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में भी इन तीनों कंपनियों ने मिलकर 23,743 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। यानी इन कंपनियों के पास अभी काफी गुंजाइश है कि वे कुछ समय तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ खुद उठाएं और आम आदमी को राहत दें।

होर्मुज जलडमरूमध्य की चिंता अभी भी बरकरार

हालांकि राहत पूरी तरह नहीं है। भारत के लगभग आधे तेल आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आते हैं। ईरान ने हमलों के बाद जहाजों को इस रास्ते से गुजरने पर चेतावनी दी है। बीमा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में चलने वाले जहाजों का बीमा कवच वापस ले लिया है जिससे टैंकरों की आवाजाही व्यावहारिक रूप से रुक गई है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो सप्लाई बाधित होने का खतरा वास्तविक रूप ले सकता है और तब सरकार के लिए कीमतें स्थिर रखना मुश्किल हो जाएगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वे उभरती स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

Petrol-Diesle Price: भारत की क्या है स्थिति

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में उछाल का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ता है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल सालाना करीब 10 से 15 हजार करोड़ रुपये बढ़ जाता है।

 

फिलहाल आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि पंप पर दाम नहीं बदलेंगे। लेकिन मध्य-पूर्व में हालात किस दिशा में जाते हैं यही तय करेगा कि यह राहत कितने दिन टिकती है।

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