संसद में गतिरोध जारी, शर्तों के पेंच में फंसी कार्यवाही, बजट सत्र में हंगामे की आशंका

विपक्ष चाहता है भारत-अमेरिका व्यापार पर चर्चा, सरकार मांग रही खेद, दोनों पक्ष अड़े

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Parliament Session: लोकसभा में सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बजट सत्र के पहले चरण में सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने का मामला अब शर्त बनाम शर्त में उलझ गया है। सोमवार को हुई बैठक के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा से पहले भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर संक्षिप्त चर्चा की मांग रखी है, जबकि सरकार चाहती है कि विपक्ष पहले सत्र के दौरान हुई घटनाओं पर खेद जताए। इस गतिरोध के चलते संकेत मिल रहे हैं कि बजट सत्र का पूरा पहला चरण हंगामे में ही बीत सकता है।

विपक्ष की मांग – भारत-अमेरिका व्यापार पर चर्चा (Parliament Session)

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि लोकसभा में सामान्य कामकाज बहाल करने के लिए सरकार को भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर संक्षिप्त चर्चा की अनुमति देनी होगी। विपक्ष का तर्क है कि यह मुद्दा राष्ट्रीय महत्व का है और इस पर संसद में चर्चा होना जरूरी है।

राहुल गांधी के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच हो रही व्यापार वार्ता देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका को प्रभावित करेगी। इसलिए सरकार को संसद में इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। विपक्ष चाहता है कि बजट पर चर्चा शुरू होने से पहले इस मुद्दे पर एक संक्षिप्त लेकिन सार्थक बहस हो। विपक्षी दलों का कहना है कि व्यापार समझौते भारतीय उद्योग, किसानों और छोटे व्यापारियों को कैसे प्रभावित करेंगे, इस पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए। वे यह भी जानना चाहते हैं कि भारत की संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार की शर्त – पहले खेद जताएं

विपक्ष की मांग के जवाब में सरकार ने अपनी शर्त रख दी है। सरकार चाहती है कि विपक्ष पहले बजट सत्र के दौरान हुई विभिन्न घटनाओं पर खेद जताए। सरकार का कहना है कि विपक्षी सांसदों ने सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया है और लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचाई है।

सरकार के सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र के दौरान कई गंभीर घटनाएं हुईं जिन पर विपक्ष को खेद व्यक्त करना चाहिए। इनमें अप्रकाशित किताब से संबंधित विवाद, सांसदों का निलंबन, और प्रधानमंत्री पर कथित हमले की साजिश जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि जब तक विपक्ष अपने आचरण पर खेद नहीं जताता, तब तक सदन में सामान्य कामकाज बहाल करना मुश्किल होगा। सरकार चाहती है कि विपक्ष पहले अपनी गलतियां स्वीकार करे, फिर किसी भी मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।

Parliament Session: अप्रकाशित किताब विवाद

बजट सत्र के दौरान सबसे बड़ा विवाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस किताब के कुछ अंश बिना आधिकारिक अनुमति के लीक किए गए, जो एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है।

सरकार ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को जांच का आदेश दिया है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार खुद इस लीक के पीछे है और यह एक राजनीतिक चाल थी। इस विवाद ने संसद में तूफान खड़ा कर दिया और कई दिनों तक कार्यवाही नहीं चल सकी। विपक्षी सांसदों ने सदन में नारेबाजी की और सरकार से जवाब मांगा। सरकार ने इसे विपक्ष की अवरोधक रणनीति बताया।

सांसदों का निलंबन

बजट सत्र के दौरान सदन में व्यवधान के कारण कई विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया था। सरकार का कहना है कि ये सांसद सदन की कार्यवाही में बार-बार बाधा डाल रहे थे और अनुशासनहीनता दिखा रहे थे।

हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि निलंबन का फैसला अलोकतांत्रिक था और सरकार ने इसका उपयोग विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया। विपक्षी दलों ने निलंबन की कड़ी निंदा की और इसे सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति बताया। सांसदों के निलंबन से संसदीय लोकतंत्र पर सवाल उठे और पूरे देश में बहस छिड़ गई। संवैधानिक विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी।

Parliament Session: महिला सांसदों पर आरोप

एक और विवादास्पद मुद्दा विपक्षी महिला सांसदों पर प्रधानमंत्री पर हमले की साजिश का आरोप था। सरकार ने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी महिला सांसद प्रधानमंत्री के खिलाफ शारीरिक हमले की योजना बना रही थीं।

विपक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया और इसे सरकार का प्रोपेगेंडा बताया। विपक्षी महिला सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश की। इस मामले ने लैंगिक राजनीति का रूप भी ले लिया। कई महिला संगठनों ने विपक्षी महिला सांसदों के समर्थन में आवाज उठाई।

स्पीकर ओम बिरला की भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस गतिरोध को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों के नेताओं से कई दौर की बातचीत की है। सोमवार को भी एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।

विपक्षी नेताओं, विशेष रूप से राहुल गांधी, ने स्पीकर से मुलाकात करके अपनी मांगें रखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं और निष्पक्ष नहीं हो रहे हैं। हालांकि, स्पीकर ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि वे संविधान और संसदीय नियमों के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने दोनों पक्षों से सहयोग की अपील की।

Parliament Session: सरकार और विपक्ष में खाई

बजट सत्र के दौरान हुई घटनाओं ने सरकार और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और किसी भी समझौते पर पहुंचने को तैयार नहीं दिख रहे।

सरकार का कहना है कि विपक्ष रचनात्मक विरोध के बजाय केवल अवरोध पैदा कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और संसद में बहस की परंपरा को खत्म कर रही है। यह टकराव केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की राजनीति को प्रभावित कर रहा है। मीडिया और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है।

बजट पर चर्चा की संभावना धुंधली

इस गतिरोध के कारण बजट पर सार्थक चर्चा की संभावना धुंधली होती जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश किया था, लेकिन अभी तक उस पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पाई है।

बजट पर चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। इसमें विपक्ष सरकार की नीतियों की जांच करता है, सवाल उठाता है और वैकल्पिक सुझाव देता है। लेकिन वर्तमान गतिरोध के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। आम जनता भी इस स्थिति से नाराज है। लोग चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधि बजट पर सार्थक चर्चा करें और देश की समस्याओं पर ध्यान दें।

Parliament Session: विशेषज्ञों की राय

संवैधानिक विशेषज्ञों और पूर्व सांसदों ने इस गतिरोध पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह स्थिति संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों को लचीलापन दिखाना होगा। सरकार को विपक्ष की वैध मांगों पर विचार करना चाहिए और विपक्ष को भी रचनात्मक रुख अपनाना चाहिए। पूर्व सांसदों ने याद दिलाया कि पहले भी ऐसे गतिरोध हुए हैं, लेकिन बातचीत से उन्हें सुलझाया गया। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व से भी ऐसा करने का आग्रह किया।

आगे क्या होगा?

मंगलवार को फिर से लोकसभा की बैठक होनी है। देखना होगा कि क्या दोनों पक्ष कोई समझौता कर पाते हैं या गतिरोध जारी रहता है। यदि कोई समाधान नहीं निकलता, तो संभावना है कि बजट सत्र का पहला चरण बिना किसी सार्थक कार्य के समाप्त हो जाएगा। यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

सरकार को उम्मीद है कि विपक्ष अपनी जिद छोड़ेगा और सदन में सामान्य कामकाज शुरू होगा। विपक्ष को उम्मीद है कि सरकार जनता के सवालों का जवाब देगी।

Parliament Session: निष्कर्ष

लोकसभा में जारी गतिरोध शर्त बनाम शर्त की लड़ाई में बदल गया है। एक तरफ विपक्ष भारत-अमेरिका व्यापार पर चर्चा की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार खेद जताने की शर्त रख रही है। इस राजनीतिक अहंकार की लड़ाई में आम जनता के मुद्दे पीछे छूट गए हैं। संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष समझौते की राह खोजें और देश की समस्याओं पर ध्यान दें।

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