Online Fraud: ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए तो घबराएं नहीं, 5 दिन में शिकायत करने पर वापस मिलेगा पूरा पैसा

Online Fraud: ऑनलाइन फ्रॉड पर आरबीआई का 5 दिन का नियम

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Online Fraud:  डिजिटल दौर में यूपीआई और ऑनलाइन पेमेंट ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, साइबर ठगी का खतरा भी उतना ही तेजी से बढ़ा है। अक्सर लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े नियम आपके पैसों की सुरक्षा की गारंटी देते हैं। अगर आपके खाते से किसी तकनीकी खराबी या धोखे से पैसा कट गया है, तो आपके पास उसे वापस पाने का पूरा कानूनी हक है। बस शर्त इतनी है कि आपको इस घटना की जानकारी तुरंत और सही तरीके से बैंक तक पहुंचानी होगी।

Online Fraud: 5 दिन का नियम और जीरो लायबिलिटी की हकीकत

आरबीआई की रिफंड पॉलिसी के अनुसार, यदि आपके बैंक खाते से कोई अनधिकृत लेन-देन यानी बिना आपकी मर्जी के पैसा निकलता है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आप घटना के 5 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर अपने बैंक को सूचित कर देते हैं, तो इसे ‘जीरो लायबिलिटी’ के दायरे में रखा जाता है। इसका साफ मतलब है कि ग्राहक की गलती न होने पर बैंक को पूरा पैसा वापस करना होगा। बैंक को 90 दिनों के भीतर इस मामले की जांच पूरी करके पैसा रिफंड करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

जिम्मेदारी के आधार पर तय होता है रिफंड

आपका पैसा वापस मिलेगा या नहीं, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि चूक कहां हुई है। आरबीआई ने जिम्मेदारी को तीन श्रेणियों में बांटा है:

जीरो लायबिलिटी: अगर धोखाधड़ी पूरी तरह से बैंक की सिस्टम में किसी कमी या सुरक्षा चूक की वजह से हुई है और आपने कोई जानकारी साझा नहीं की है, तो बैंक को बिना किसी सवाल के पूरा पैसा लौटाना होगा।

लिमिटेड लायबिलिटी: यदि आप बैंक को सूचित करने में देरी करते हैं, जैसे कि 5 से 7 दिन के बाद शिकायत दर्ज कराते हैं, तो बैंक आपकी जिम्मेदारी का हिस्सा तय कर सकता है। ऐसे में आपको पूरा रिफंड मिलने की संभावना कम हो जाती है।

फुल लायबिलिटी: अगर ठगी आपकी खुद की गलती से हुई है, जैसे किसी अनजान को ओटीपी (OTP), पिन (PIN) या कार्ड की जानकारी देना, तो रिफंड मिलना लगभग असंभव है। ऐसी स्थिति में पूरी जवाबदेही ग्राहक की होती है।

ऑनलाइन फ्रॉड होने पर तुरंत क्या कदम उठाएं

धोखाधड़ी का पता चलते ही समय गंवाए बिना ये कदम उठाना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सबसे पहले अपने बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल करके तुरंत अपना कार्ड और यूपीआई (UPI) आईडी को ब्लॉक करवाएं ताकि और पैसा न कटे। इसके बाद, तुरंत साइबर क्राइम के राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करवाएं। यह सरकारी नंबर ठगी की राशि को होल्ड करवाने में मदद करता है।

इसके अलावा, अपने सभी बैंकिंग पासवर्ड और यूपीआई पिन को तुरंत बदलें। अपने खाते के पिछले ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच करें ताकि कोई अन्य संदिग्ध लेन-देन न छूट जाए। शिकायत करते समय एक बात का विशेष ध्यान रखें कि बैंक को दी गई शिकायत का नंबर (Complaint Number) और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखें, क्योंकि भविष्य में यह आपके केस के लिए सबसे बड़ा आधार बनेगा। यदि राशि बड़ी है, तो नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज करवाना भी जरूरी हो जाता है।

Online Fraud: ठगी से बचने के लिए क्या रखें सावधानी

डिजिटल सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है कि आप कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, पिन, पासवर्ड या डेबिट कार्ड का सीवीवी (CVV) साझा न करें। बैंक कभी भी फोन पर आपसे ऐसी निजी जानकारी नहीं मांगते। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी स्क्रीन शेयरिंग ऐप को इंस्टॉल करें।

पेमेंट करते समय हमेशा आधिकारिक ऐप का ही प्रयोग करें और किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके सोर्स को वेरिफाई करें। कई बार ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर डराते या लुभाते हैं, उनसे हमेशा सतर्क रहें। यूपीआई पेमेंट करते समय यह जरूर देखें कि क्या आप पेमेंट कर रहे हैं या रिसीव, क्योंकि अक्सर लोग ‘मनी रिक्वेस्ट’ को ‘पेमेंट’ समझकर गलती से पैसे गंवा बैठते हैं।

Online Fraud: जागरूक रहें, सुरक्षित रहें

आज के दौर में बैंकिंग सिस्टम काफी सुरक्षित हो चुका है, लेकिन साइबर अपराधी भी नए नए तरीके अपना रहे हैं। आरबीआई के नियम ग्राहकों को एक बड़ा सुरक्षा कवच देते हैं, बशर्ते आप समय रहते कदम उठाएं। ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होना परेशान करने वाला हो सकता है, लेकिन यदि आप सही प्रक्रिया जानते हैं तो अपने पैसों को वापस पाने की राह आसान हो जाती है। याद रखें, आपकी सतर्कता ही आपकी पहली और आखिरी सुरक्षा है। डिजिटल पेमेंट का आनंद लें, लेकिन पूरी सावधानी और समझदारी के साथ।

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