Onion Price Update: प्याज की कीमतों पर सरकार का बड़ा दांव, ₹35 किलो में बफर स्टॉक की बिक्री

17 शहरों में 4,000 टन प्याज पहुंचा, सरकार की ₹35 किलो बिक्री से महंगाई पर रोक की कोशिश

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Onion Price Update: देश के कई हिस्सों में प्याज की बढ़ती खुदरा कीमतों से परेशान आम उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने प्रयासों को और अधिक तेज कर दिया है। सरकार ने अपने मूल्य स्थिरीकरण बफर स्टॉक (Buffer Stock) से प्याज निकालकर देश के चुनिंदा और संवेदनशील शहरों में रियायती दरों पर बिक्री शुरू कर दी है। अब तक लगभग 4,000 टन बफर प्याज 17 प्रमुख शहरों तक पहुंचाया जा चुका है, जहां इसे 35 रुपये प्रति किलोग्राम की किफायती दर पर बेचा जा रहा है। सरकार का यह कदम बाजार में प्याज की सुगम उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों के ऊपरी दबाव को नियंत्रित करना है।

हालांकि, इस व्यापक सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद देश के खुदरा बाजारों में प्याज की औसत कीमतों में अभी तक कोई बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जब 28 अगस्त को यह रियायती बिक्री शुरू हुई थी, तब अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत लगभग 48.50 रुपये प्रति किलो थी, जो 5 सितंबर तक बढ़कर लगभग 50.79 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। इससे स्पष्ट होता है कि सरकारी बिक्री से कुछ विशेष केंद्रों पर जरूर राहत मिल रही है, किंतु संपूर्ण देश के खुले बाजार तक इसका व्यापक असर पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है।

Onion Price Update: सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम? आपूर्ति में बाधा और बढ़ती कीमतें

प्याज के दाम में अचानक आए उछाल के पीछे मुख्य रूप से कृषि और आपूर्ति से जुड़ी कुछ चुनौतियां जिम्मेदार हैं। हाल ही में हुई मानसूनी बारिश के कारण देश के कुछ हिस्सों में नई फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे मंडियों में प्याज की दैनिक आवक और बाजार में उसकी समग्र उपलब्धता प्रभावित हुई है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के असंतुलन को पाटने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतों में अचानक तेजी आने पर बफर स्टॉक को बाजार में उतारना सरकार के पारंपरिक मूल्य स्थिरीकरण उपायों का एक अहम हिस्सा रहा है। इस बार भी केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को सीधी राहत देने के उद्देश्य से चुनिंदा शहरों में प्याज 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर उपलब्ध कराने की पुख्ता व्यवस्था की है। सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल कम कीमत पर प्याज बेचना ही नहीं, बल्कि बाजार में सरकारी स्टॉक की सक्रिय मौजूदगी दिखाकर कीमतों पर मनोवैज्ञानिक और वास्तविक दोनों तरह का दबाव बनाना है ताकि जमाखोरी और अनावश्यक मूल्य वृद्धि पर लगाम लगाई जा सके।

‘कंडा एक्सप्रेस’ और विशेष रेल रेक के जरिए अलग-अलग राज्यों तक पहुंच रहा है प्याज

केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, रियायती बिक्री के पहले 10 दिनों के भीतर ही करीब 4,000 टन प्याज 17 विभिन्न शहरों में सफलतापूर्वक वितरित किया जा चुका है। उपभोक्ता मामलों के विभाग की सीधी देखरेख में केंद्रीय एजेंसियां उत्पादक राज्यों से प्याज उठाकर उन उपभोग केंद्रों पर भेज रही हैं जहां कीमतें सबसे ज्यादा दबाव में हैं।

वर्तमान में सरकार के पास वर्ष 2026 के लिए लगभग 1.21 लाख टन प्याज का विशाल बफर स्टॉक सुरक्षित है। लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचाने के लिए ट्रकों के साथ-साथ विशेष रेल रेक का भी भरपूर उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में विशेष रूप से संचालित ‘कंडा एक्सप्रेस’ ट्रेनों के माध्यम से बड़े महानगरों तक प्याज की भारी खेप भेजी जा रही है। दिल्ली और चेन्नई के लिए आवश्यक खेप पहले ही पहुंचाई जा चुकी है, जबकि पूर्वोत्तर के प्रमुख केंद्र गुवाहाटी के लिए भी आगे की खेप भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

किन राज्यों और शहरों में मिल रहा है 35 रुपये प्रति किलो वाला सस्ता प्याज?

सरकार की इस रियायती प्याज बिक्री योजना का विस्तार कई राज्यों तक किया गया है। वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, पंजाब और ओडिशा समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में सरकारी एजेंसियां बफर स्टॉक की खुदरा बिक्री कर रही हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि 35 रुपये प्रति किलो की यह निश्चित दर सभी स्थानों पर एक समान लागू हो, यह जरूरी नहीं है; बिक्री का प्रारूप स्थानीय परिवहन लागत और प्रशासनिक व्यवस्था के आधार पर थोड़ा भिन्न हो सकता है।

उपभोक्ताओं तक यह प्याज आसानी से पहुंचे, इसके लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें मोबाइल वैन, केंद्रीय भंडार, मदर डेयरी के सफल आउटलेट्स, राज्य सहकारी संस्थाएं और स्थानीय प्रशासन द्वारा चिन्हित विशेष बिक्री केंद्र शामिल हैं। इसका मूल उद्देश्य उन घनी आबादी वाले और महंगे इलाकों में सीधे पहुंचना है जहां खुले बाजार में व्यापारियों द्वारा प्याज सामान्य से काफी ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। राजधानी दिल्ली में भी बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए अतिरिक्त सरकारी स्टॉक की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

NCCF की अहम भूमिका: अकेले 1,500 टन बफर प्याज की खुदरा बिक्री

सरकारी अभियान के तहत नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) ने सबसे आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अकेले NCCF ने विभिन्न शहरों में लगभग 1,500 टन बफर प्याज की खुदरा बिक्री सीधे आम जनता को की है। एजेंसी का पूरा फोकस बिचौलियों को दरकिनार करते हुए उपभोक्ताओं को रियायती दर पर गुणवत्तापूर्ण प्याज उपलब्ध कराने पर है।

NCCF कई राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर इस वितरण तंत्र को और मजबूत बना रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में प्याज की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई (Sorting), ग्रेडिंग, मजबूत पैकिंग और समय पर परिवहन (Transportation) का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उत्पादक राज्यों से लेकर उपभोग केंद्रों तक तालमेल बिठाने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच एक प्रभावी कार्य प्रणाली स्थापित की गई है।

प्रमुख महानगरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई) में क्या रहा प्याज का ताजा भाव?

5 सितंबर के आधिकारिक खुदरा आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के अलग-अलग हिस्सों में प्याज की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला:

  • दिल्ली: औसत खुदरा कीमत लगभग 58 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।

  • मुंबई: औसत खुदरा कीमत लगभग 53 रुपये प्रति किलो रही।

  • चेन्नई: औसत खुदरा कीमत सबसे अधिक लगभग 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

  • रांची: तुलनात्मक रूप से यहां बाजार में राहत थी और कीमत करीब 40 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।

  • अखिल भारतीय थोक औसत: इस दौरान प्याज का औसत थोक मूल्य लगभग 42.79 रुपये प्रति किलो के आसपास बना हुआ था।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट हो जाता है कि देश का प्याज बाजार एक समान नहीं है। जिन क्षेत्रों में स्थानीय आवक या उत्पादक राज्यों से नजदीकियां हैं, वहां कीमतें नियंत्रण में हैं; किंतु जिन महानगरों को लंबी दूरी से परिवहन करके प्याज मंगाना पड़ता है, वहां फ्रेट और लॉजिस्टिक्स लागत के कारण खुदरा मूल्य ऊंचे बने हुए हैं।

Onion Price Update: क्या आम आदमी को मिल रही है वास्तविक राहत?

35 रुपये प्रति किलो की दर पर मिलने वाला सरकारी प्याज उन विशेष उपभोक्ताओं और परिवारों के लिए एक बड़ा संबल है जो कतारों में लगकर या सरकारी मोबाइल वैन से इसकी खरीद कर रहे हैं। खुले बाजार में जहां प्याज 50 से 60 रुपये या उससे अधिक भाव पर बिक रहा है, वहां यह रियायती बिक्री घरेलू बजट के असंतुलन को कुछ हद तक संतुलित करती है।

किंतु संपूर्ण देश के पैमाने पर देखें तो केवल चुनिंदा शहरों में सीमित मात्रा में की जाने वाली यह खुदरा बिक्री पूरे देश के बाजार भाव को रातों-रात नीचे लाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निरंतर आपूर्ति श्रृंखला, पारदर्शी वितरण और अक्टूबर के मध्य में नई फसल की समय पर बंपर आवक का होना अनिवार्य है। तब तक सरकार के लिए बफर स्टॉक के माध्यम से बाजार में संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगा।

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