NPS वात्सल्य योजना में बड़ा बदलाव, PFRDA ने 100% इक्विटी निवेश की दी अनुमति, बच्चों का पेंशन कॉर्पस तेजी से बढ़ेगा, डेटा शेयरिंग से फंड मैनेजर बनाएंगे बेहतर रणनीति
PFRDA ने 100% इक्विटी निवेश की दी अनुमति, बच्चों का पेंशन कॉर्पस तेजी से बढ़ेगा, डेटा शेयरिंग से फंड मैनेजर बनाएंगे बेहतर रणनीति
NPS Vatsalya Scheme: बच्चों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित और मजबूत बनाने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई एनपीएस वात्सल्य योजना में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी बदलाव किया गया है। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी पीएफआरडीए ने 23 फरवरी 2026 को जारी एक आधिकारिक सर्कुलर के जरिए इस योजना के अंतर्गत पेंशन फंड्स को पूरी निवेश राशि को इक्विटी में लगाने की अनुमति दे दी है। यानी अब कोई भी पेंशन फंड चाहे तो अपनी पूरी 100 प्रतिशत रकम शेयर बाजार में निवेश कर सकता है। पहले इस तरह की सीमाएं थीं जो फंड मैनेजरों के हाथ बांधती थीं। इस बदलाव से बच्चों के लिए बनाए जा रहे पेंशन कॉर्पस में लंबी अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है हालांकि इसके साथ जोखिम का पहलू भी जुड़ा हुआ है। आइए इस पूरे बदलाव को विस्तार से समझते हैं।
NPS Vatsalya Scheme: क्या है एनपीएस वात्सल्य योजना?
एनपीएस वात्सल्य एक ऐसी पेंशन बचत योजना है जो 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नाम पर उनके माता-पिता द्वारा संचालित की जाती है। इसका मूल विचार यह है कि जितनी जल्दी निवेश की शुरुआत होगी उतना ही अधिक समय चक्रवृद्धि ब्याज को काम करने का मिलेगा और बच्चे के वयस्क होने तक एक मजबूत वित्तीय आधार तैयार हो जाएगा। यह योजना राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी NPS की एक विशेष शाखा है जिसे बच्चों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। चूंकि निवेश की अवधि बहुत लंबी होती है इसलिए इक्विटी में अधिक निवेश करने पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है और दीर्घकाल में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनती है।
100% इक्विटी निवेश की अनुमति का क्या मतलब है
पहले एनपीएस वात्सल्य के अंतर्गत फंड मैनेजरों के लिए यह सीमा तय थी कि वे अपने पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा इक्विटी में लगा सकते हैं। इस बाधा को हटाकर पीएफआरडीए ने फंड मैनेजरों को पूरी स्वतंत्रता दे दी है। एनपीएस वात्सल्य दिशा-निर्देश 2025 के पैरा 12 के अनुसार अब प्रत्येक पेंशन फंड अपनी निवेश शैली खुद तय कर सकता है। वे चाहें तो नियामक द्वारा सुझाए गए सामान्य एसेट एलोकेशन मॉडल को अपनाएं या फिर अपनी अलग और स्वतंत्र रणनीति बनाएं। इसका एक स्वाभाविक परिणाम यह होगा कि अलग-अलग फंड्स का प्रदर्शन और जोखिम का स्तर भी अलग-अलग दिखाई देगा। माता-पिता को अब अपने बच्चे के लिए फंड चुनते समय उसकी निवेश रणनीति और जोखिम प्रोफाइल को ध्यान से देखना होगा।
NPS Vatsalya Scheme: डेटा साझाकरण से बढ़ेगी फंड की रणनीतिक क्षमता
इस सर्कुलर में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है जो योजना की दक्षता को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। नए नियमों के अनुसार अब केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां पेंशन फंड्स के साथ कुछ चुनिंदा और सीमित जानकारी साझा करेंगी। इसमें मुख्य रूप से यह शामिल होगा कि निवेश करने वाले माता-पिता कौन हैं, खाताधारक बच्चे का लिंग क्या है, राशि किस माध्यम से जमा की जा रही है और निवेशक किस राज्य या क्षेत्र से संबंधित हैं। इन आंकड़ों का विश्लेषण करके पेंशन फंड यह समझ सकेंगे कि किन क्षेत्रों में योजना की पहुंच अधिक है, कौन सा सामाजिक वर्ग अधिक निवेश कर रहा है और किन इलाकों में जागरूकता की कमी है। इस जानकारी के आधार पर फंड मैनेजर सही समय पर सही लोगों तक पहुंचकर अधिक परिवारों को इस योजना का लाभ दिला सकेंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
पीएफआरडीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन सभी बदलावों का केंद्रीय उद्देश्य योजना को अधिक आकर्षक, पारदर्शी और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है। डेटा पर आधारित निर्णय प्रक्रिया से न केवल फंड का प्रदर्शन बेहतर होगा बल्कि यदि कहीं कोई कमी या विचलन दिखे तो समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। नियामक ने यह भी कड़ी चेतावनी दी है कि यदि कोई पेंशन फंड या बिचौलिया इन निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कठोर नियामकीय कार्रवाई की जाएगी।
NPS Vatsalya Scheme: माता-पिता के लिए क्या है सलाह
इक्विटी में 100 प्रतिशत तक निवेश की अनुमति एक दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ यह लंबी अवधि में उच्च रिटर्न की संभावना देती है तो दूसरी तरफ बाजार की अस्थिरता का जोखिम भी बढ़ जाता है। जो माता-पिता अपने बच्चे के लिए एनपीएस वात्सल्य में निवेश करना चाहते हैं या पहले से कर रहे हैं उन्हें अपनी जोखिम सहनशीलता और बच्चे की उम्र को देखते हुए फंड का चुनाव करना चाहिए। यदि बच्चा बहुत छोटा है और निवेश की अवधि लंबी है तो अधिक इक्विटी एक्सपोजर समझदारी हो सकती है। लेकिन यदि बच्चा 15 से 17 साल का है तो कम जोखिम वाले विकल्प अधिक उपयुक्त रहेंगे। किसी भी निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
कुल मिलाकर पीएफआरडीए का यह कदम भारत में बाल वित्तीय सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल है जो भारतीय परिवारों को अपने बच्चों के भविष्य के लिए अधिक सशक्त और लचीले निवेश विकल्प प्रदान करती है।
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