इंसान नहीं कौवे साफ कर रहे हैं सड़कें! स्वीडन में अनोखा प्रयोग, सिगरेट के टुकड़े उठाने पर कौवों को मूंगफली का इनाम, सफाई खर्च में 75% की बचत, पर्यावरणविदों ने जताई चिंता
स्वीडन के सोडर्टेलजे में कौवे उठा रहे सिगरेट के टुकड़े, मशीन में डालने पर मूंगफली का इनाम, सफाई खर्च में 75% की बचत
Crows cleaning streets: दुनिया में सफाई के लिए तरह-तरह के अनोखे तरीके अपनाए जाते हैं, लेकिन स्वीडन ने जो तरकीब निकाली है वह सचमुच हैरान कर देने वाली है। स्वीडन के सोडर्टेलजे शहर में इंसानों की जगह कौवों को सफाईकर्मी के रूप में काम पर लगाया गया है। ये कौवे सड़कों पर बिखरे सिगरेट के टुकड़े उठाकर खास मशीनों में डालते हैं और बदले में उन्हें इनाम के तौर पर खाना मिलता है। यह अनोखा प्रयोग न सिर्फ शहर की सफाई में मदद कर रहा है बल्कि सफाई के खर्च को भी बड़े पैमाने पर कम कर रहा है।
Crows cleaning streets: इंसान की लापरवाही और प्रकृति की सजा
मनुष्य ने तरक्की तो बहुत की है लेकिन इस तरक्की के साथ-साथ उसने अपने आसपास के वातावरण को भी बुरी तरह प्रदूषित किया है। सड़कों पर कूड़ा फेंकना, सिगरेट के बट इधर-उधर गिराना जैसी आदतें पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। स्वीडन जैसा साफ-सुथरा और विकसित देश भी इस समस्या से जूझ रहा है। आंकड़ों के अनुसार स्वीडन की सड़कों पर हर साल एक अरब से भी अधिक सिगरेट के बट फेंके जाते हैं। इन्हें इंसानों के जरिए साफ करवाना बेहद महंगा और समय लेने वाला काम है। इसी समस्या का एक अनोखा और किफायती समाधान निकाला है Corvid Cleaning नामक एक स्वीडिश स्टार्टअप ने।
Crows cleaning streets: कैसे काम करती है यह पूरी व्यवस्था
Corvid Cleaning ने एक खास तरह की स्वचालित मशीन तैयार की है जो कौवों के व्यवहार और मनोविज्ञान पर आधारित है। इस मशीन को सड़क किनारे ऐसी जगहों पर लगाया जाता है जहां कूड़ा अधिक फैला रहता है। कौवे सड़क पर गिरा सिगरेट का टुकड़ा उठाते हैं और उसे इस मशीन में बने एक खास खाने में डाल देते हैं। जैसे ही कौवा सिगरेट का बट मशीन में डालता है, मशीन उस कचरे की पहचान करती है और तुरंत कौवे के लिए मूंगफली का एक दाना बाहर निकाल देती है।
लेकिन यह मशीन उतनी सरल नहीं है जितनी दिखती है। अगर कौवा सिगरेट की जगह कोई पत्थर, पत्ता या कोई और चीज मशीन में डालने की कोशिश करता है तो उसे कोई इनाम नहीं मिलता। यानी मशीन पूरी तरह से सिगरेट के बट की पहचान करने में सक्षम है और सिर्फ सही काम करने पर ही इनाम देती है।
Crows cleaning streets: कौवों को ही क्यों चुना गया इस काम के लिए
यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर इस काम के लिए किसी और पक्षी या जानवर को क्यों नहीं चुना गया। इसका जवाब कौवों की असाधारण बौद्धिक क्षमता में छुपा है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार कौवे और मैगपाई जैसे पक्षी जो कोर्विड परिवार से ताल्लुक रखते हैं, दुनिया के सबसे बुद्धिमान प्राणियों में से एक माने जाते हैं। इनकी सीखने और समझने की क्षमता लगभग सात साल के बच्चे के बराबर होती है। कौवों में एक और खास बात यह है कि वे एक-दूसरे को देखकर बहुत जल्दी नई चीजें सीख लेते हैं।
Crows cleaning streets: करोड़ों की बचत करेंगे ये काले पक्षी
इस प्रयोग का सबसे बड़ा फायदा आर्थिक पहलू से जुड़ा है। Corvid Cleaning के संस्थापक क्रिश्चियन गुंथर-हैनसेन के अनुसार कौवों की मदद से सफाई में होने वाले खर्च में 75 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है। स्वीडन में इंसानों द्वारा सड़कों की सफाई पर भारी-भरकम रकम खर्च होती है। कौवों का यह दस्ता उस खर्च के एक बड़े हिस्से को बचा सकता है। यह पैसा शहर के अन्य विकास कार्यों पर लगाया जा सकता है। इस प्रयोग की एक और खास बात यह है कि इसमें कौवों को किसी भी तरह से प्रशिक्षण शिविर में बंद नहीं किया जाता।
Crows cleaning streets: पर्यावरणविदों ने जताई यह चिंता
हालांकि इस प्रयोग को लेकर कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों ने अपनी चिंता भी जाहिर की है। उनका कहना है कि सिगरेट के बट में निकोटीन और कई तरह के हानिकारक रसायन होते हैं। इन्हें बार-बार उठाने और छूने से कौवों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। अगर कौवा गलती से सिगरेट का बट निगल ले तो यह उसके लिए जानलेवा भी हो सकता है। इन चिंताओं पर Corvid Cleaning टीम का कहना है कि वे अपने पक्षियों की सेहत का पूरा ख्याल रख रहे हैं। मशीन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कौवे कचरे को मशीन में डालें, उसे निगलें नहीं।
Crows cleaning streets: संस्थापक की सफाई और निगरानी
संस्थापक क्रिश्चियन ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से स्वैच्छिक प्रक्रिया है। कौवों को किसी भी तरह से इस काम के लिए बाध्य नहीं किया जाता। उन्हें सिर्फ एक विकल्प दिया जाता है और वे अपनी समझ से उसे अपनाते हैं। टीम लगातार इन पक्षियों की निगरानी कर रही है और किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या दिखने पर तुरंत कदम उठाया जाता है। यह अभिनव प्रयोग स्वीडन के सोडर्टेलजे शहर में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ है।
Crows cleaning streets: दुनिया के लिए एक नई सीख
स्वीडन का यह प्रयोग पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन सकता है। भारत जैसे देश में जहां सड़कों पर कूड़ा फेंकना आम बात है और सफाई का खर्च बहुत अधिक है, वहां इस तरह के अभिनव प्रयोगों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। प्रकृति के साथ मिलकर काम करने का यह तरीका पर्यावरण के लिए भी बेहतर है और समाज के लिए भी फायदेमंद है। सोडर्टेलजे शहर का यह पायलट प्रोजेक्ट अगर सफल रहा तो इसे स्वीडन के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है।
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