Noida Engineer Death: नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबने से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांच की प्रबल संभावना है। यह मामला जो पहले से ही विवादों में घिरा है, अब नए मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। शनिवार को विशेष जांच दल (SIT) की जांच का अंतिम दिन है।
Noida Engineer Death: सेक्टर 150 स्पोर्ट्स सिटी पहले से CBI के रडार पर
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सेक्टर-150 में स्थित स्पोर्ट्स सिटी का मामला पहले से ही सीबीआई के पास विचाराधीन है। यहां निवेश करने वाले बिल्डरों, प्राधिकरण की आवंटन प्रक्रिया और धन हस्तांतरण (फंड डायवर्जन) की जांच पहले से ही सीबीआई संचालित कर रही है।
चूंकि यह क्षेत्र पहले से ही सीबीआई की जांच के दायरे में है, इसलिए युवराज मेहता की मौत के मामले को भी उसी जांच एजेंसी को सौंपने की संभावना बढ़ गई है। यह कदम जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा सकता है।
SIT की संरचना और जांच का दायरा

उत्तर प्रदेश शासन ने युवराज मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में उच्च स्तरीय अधिकारी शामिल हैं जिनमें एडीजी मेरठ जोन, मंडलायुक्त मेरठ और लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता सम्मिलित हैं।
SIT की जांच का दायरा प्रमुख रूप से तीन विभागों को कवर करता है – नोएडा प्राधिकरण, गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट और जिला प्रशासन। इन सभी विभागों की भूमिका और जिम्मेदारियों की गहन जांच की जा रही है।
Noida Engineer Death: जांच में हीलाहवाली की आशंका
चिंता का विषय यह है कि SIT में शामिल तीनों विभागों में वरिष्ठ अधिकारी हैं। इन विभागों के बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की संभावना के कारण जांच में देरी या पक्षपात की आशंका जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यही कारण है कि अब युवराज की मौत का मामला सीबीआई के पास भेजने की चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि एक केंद्रीय जांच एजेंसी स्थानीय प्रभावों से मुक्त होकर अधिक प्रभावी जांच कर सकती है।
अवैध खनन और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अवैध खनन से लेकर अधिकारियों की मिलीभगत तक के खुलासे हो रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार तीन महीने की अनुमति के विरुद्ध वर्षों तक खनन जारी रहा।
यह गंभीर चूक दर्शाती है कि प्राधिकरण और प्रशासन द्वारा नियमों और विनियमों की अनदेखी की गई। इस लापरवाही का परिणाम युवराज मेहता की दुखद मृत्यु के रूप में सामने आया।
Noida Engineer Death: प्रशासनिक उदासीनता उजागर
जांच से यह भी उजागर हुआ है कि सेक्टर-150 का यह घातक मोड़ पहले से ही चिह्नित था, फिर भी कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। युवराज के परिवार ने IGRS (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) से लेकर सांसद तक कई बार गुहार लगाई थी, परंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
रिपोर्टें बनती रहीं और फाइलें चलती रहीं, परंतु जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ। यह प्रशासनिक उदासीनता और सिस्टम की विफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
SIT की जांच का आज अंतिम दिन
शनिवार 24 जनवरी 2026 को SIT की जांच का अंतिम दिन है। टीम को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत के साक्ष्य मिलते हैं, तो मामले को सीबीआई को सौंपने की संभावना और बढ़ जाएगी।
Noida Engineer Death: जनता में आक्रोश
युवराज मेहता की मौत ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश उत्पन्न किया है। लोग मांग कर रहे हैं कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सख्त उपाय किए जाएं। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सुरक्षा के व्यापक मुद्दों को उठाता है।
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