Navratri 2026: गुजरात में क्यों खास होती है नवरात्रि? गरबा, चनिया-चोली और गर्बो की समृद्ध परंपरा जानें
जानें गुजरात की नवरात्रि में गरबा, चनिया-चोली, गर्बो और पारंपरिक खानपान का महत्व
Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे भारतवर्ष में बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाया जाता है, लेकिन पश्चिमी भारत के राज्य गुजरात में इस उत्सव का रंग और उमंग पूरी दुनिया से बिल्कुल जुदा होता है। नौ रातों तक चलने वाला यह महापर्व गुजरात में केवल देवी उपासना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लोक कला, पारंपरिक संगीत, वेशभूषा और सामूहिक उल्लास का एक ऐसा भव्य उत्सव बन जाता है जिसकी मिसाल विश्व भर में कहीं और नहीं मिलती। ढोल की गूंजती थाप, डांडिया की मधुर खनक, हजारों लोगों के एक साथ थिरकते कदम और माता जगदंबा की भक्ति का यह संगम पूरे राज्य को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।
Navratri 2026: गरबा और डांडिया रास
गुजरात में नवरात्रि की शाम ढलते ही हर गली, मोहल्ले और विशाल खेल मैदानों में गरबा की सुरम्य धुनें गूंजने लगती हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोक गायकों की ताल पर हजारों लोग एक साथ विशाल गोलाकार घेरे में घूमते हुए ताली बजाकर गरबा नृत्य करते हैं। यह लोकनृत्य मां आद्यशक्ति अम्बे की आराधना का एक जीवंत माध्यम है, जहां नर्तक सृष्टि के चक्र और जीवन की गतिशीलता को अपने कदमों से व्यक्त करते हैं। डांडिया रास में नक्काशीदार लकड़ी की छोटी छड़ियों का उपयोग किया जाता है, जो देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए धर्म युद्ध का प्रतीकात्मक चित्रण मानी जाती हैं। गुजरात के गरबा की इस अप्रतिम सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने वर्ष 2023 में इसे ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की सूची में शामिल करके इसे वैश्विक गौरव प्रदान किया था।
चनिया-चोली और केडियूं: बहुरंगी पारंपरिक परिधानों की अनूठी छटा
गुजरात की नवरात्रि में परिधानों की सुंदरता देखने लायक होती है, जहां हर कोई अपनी समृद्ध लोक परंपरा को शान से पहनता है। महिलाएं और युवतियां कई मीटर घेर वाली पारंपरिक चनिया-चोली धारण करती हैं, जिन पर बारीक कच्छी कढ़ाई, आभला वर्क यानी असली शीशे का काम, कौड़ियों की सजावट और बांधनी प्रिंट का अद्भुत काम होता है। इसके साथ हाथों और गले में भारी विंटेज ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर जूलरी, कमर में लटकता कमरबंद और मांगटीका पूरे स्वरूप को राजसी बना देता है। वहीं दूसरी ओर पुरुष विशेष रूप से तैयार किया गया केडियूं पहनते हैं, जो कमर से नीचे की ओर फ्रिल वाला एक कढ़ाईदार अंगरखा होता है। इसे पारंपरिक गुजराती धोती या चूड़ीदार पायजामे के साथ पहना जाता है, और सिर पर बांधी गई रंगीन बंधेज पगड़ी गुजराती आन-बान-शान को दर्शाती है।
गर्बो का आध्यात्मिक रहस्य और महाआरती का पावन दृश्य
धार्मिक और दार्शनिक दृष्टि से ‘गरबा’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘गर्भ’ शब्द से हुई है। इस परंपरा के केंद्र में मिट्टी का एक विशेष छिद्रयुक्त घड़ा होता है जिसे स्थानीय भाषा में ‘गर्बो’ कहा जाता है। इस घड़े के भीतर गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का अखंड दीपक प्रज्वलित किया जाता है और इसे पूजा के मुख्य स्थान पर स्थापित किया जाता है। घड़े के छिद्रों से निकलने वाली प्रकाश किरणें इस बात का प्रतीक हैं कि यह मानव शरीर केवल एक मिट्टी का पात्र है और इसके भीतर साक्षात ईश्वरीय ज्योति यानी आत्मा निवास करती है। गरबा खेलते समय लोग इसी गर्बो और मां भगवती की प्रतिमा के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। आधी रात के समय जब विशाल मैदानों में हजारों लोग एक साथ हाथों में दीप थाल लेकर देवी की महाआरती गाते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक और विहंगम प्रतीत होता है।
अहमदाबाद और वडोदरा: भव्य गरबा आयोजनों के वैश्विक केंद्र
नवरात्रि के दौरान गुजरात के सांस्कृतिक नगर वडोदरा (बड़ौदा) और अहमदाबाद में इस उत्सव की भव्यता अपने चरम पर पहुंच जाती है। वडोदरा को पारंपरिक और प्रामाणिक गरबा की राजधानी माना जाता है, जहां यूनाइटेड वे जैसे विशाल मैदानों में एक साथ चालीस से पचास हजार से अधिक लोग एक ही लय और ताल पर पारंपरिक गरबा गीतों पर थिरकते हैं। यहां आधुनिक डीजे संगीत के बजाय शास्त्रीय रागों और प्राचीन लोक भजनों को प्राथमिकता दी जाती है। वहीं राजधानी गांधीनगर और अहमदाबाद में आधुनिक थीम, लेजर लाइट्स और विशाल पंडालों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है, जहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस सांस्कृतिक वैभव के साक्षी बनते हैं।
Navratri 2026: गुजराती खानपान और लजीज फलाहारी व्यंजनों का स्वाद
रातभर गरबा खेलने के बाद ऊर्जा बनाए रखने के लिए गुजराती व्यंजनों का स्वाद इस उत्सव का अभिन्न हिस्सा बन जाता है। आयोजन स्थलों के बाहर देर रात तक गर्म-गर्म फाफड़ा, जलेबी, खमण ढोकला, दाबेली और मसाला चाय के स्टॉल्स सजे रहते हैं। जो श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखते हैं, उनके लिए साबूदाना खिचड़ी, मोरधन की पूरी, सिंघाड़े के आटे के व्यंजन और विशेष रूप से तैयार की गई फलाहारी चाट के विस्तृत विकल्प मिलते हैं। सामूहिक रूप से खानपान का यह दौर देर रात तक चलता है, जो सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक जुड़ाव को और गहरा बनाता है।
Read More Here
Natural Hair Care Tips: बालों के लिए घर पर बनाएं DIY कंडीशनर, इन 4 चीजों से करें तैयार