मुंबई वॉटर मेट्रो दिसंबर 2026 से होगी शुरू, 1200 करोड़ की परियोजना से 40 मिनट में पहुंचेंगे एयरपोर्ट, जानें पूरी डिटेल
1200 करोड़ की परियोजना, 6-8 रूट पर इलेक्ट्रिक नावें, गेटवे ऑफ इंडिया से नवी मुंबई एयरपोर्ट 40 मिनट में, कोच्चि मॉडल से प्रेरित
Mumbai Water Metro: भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में यातायात की समस्या से निपटने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना को दिसंबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की घोषणा की है। यह जानकारी महाराष्ट्र के बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने सोमवार 16 फरवरी 2026 को दी। यह परियोजना मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और एक पर्यावरण अनुकूल परिवहन विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। वॉटर मेट्रो एक आधुनिक जल परिवहन प्रणाली है जिसमें बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक नावों के माध्यम से शहर के विभिन्न हिस्सों को जलमार्ग से जोड़ा जाएगा।
इस परियोजना की कुल लागत लगभग 1200 करोड़ रुपये है। मंत्री नितेश राणे ने बताया कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी एमएमआर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर 28 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत कर दी जाएगी। इसके बाद विभिन्न रूट्स की व्यवहार्यता पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। पहले चरण में दो चयनित मार्गों पर काम शुरू होगा। यह परियोजना कोच्चि वॉटर मेट्रो मॉडल से प्रेरित है जो केरल में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। मुंबई वॉटर मेट्रो के शुरू होने से न केवल सड़क यातायात का दबाव घटेगा बल्कि शहर को एक आधुनिक, टिकाऊ और स्मार्ट परिवहन विकल्प भी मिलेगा। सबसे बड़ी खासियत यह है कि वॉटर मेट्रो के माध्यम से दक्षिण मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक मात्र 40 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।
6 से 8 रूट पर चलेगी इलेक्ट्रिक नावों का नेटवर्क
मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के तहत मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में कुल छह से आठ रूट चिह्नित किए गए हैं। इन सभी रूट्स को बैटरी से चलने वाली आधुनिक इलेक्ट्रिक नावों के व्यापक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन इलेक्ट्रिक नावों की खासियत यह है कि ये पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होंगी। इनसे कोई प्रदूषण नहीं होगा क्योंकि ये बैटरी से संचालित होंगी। डीजल या पेट्रोल से चलने वाली पारंपरिक नावों की तुलना में ये बहुत अधिक शांत भी होंगी। इन नावों की डिजाइन आधुनिक और यात्री अनुकूल होगी। मंत्री नितेश राणे ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना की शुरुआत मुंबई शहर से की जाएगी।
पहले चरण में मुंबई के भीतर रूट शुरू किए जाएंगे। उसके बाद धीरे धीरे इसे पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन तक विस्तारित किया जाएगा। इसमें ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण डोंबिवली और अन्य उपनगरीय क्षेत्र शामिल होंगे। विस्तार योजना के तहत धीरे धीरे नए रूट जोड़े जाएंगे जिससे पूरे एमएमआर क्षेत्र में एक व्यापक जल परिवहन नेटवर्क तैयार हो सके। परियोजना की कुल लागत लगभग 1200 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह राशि नावों की खरीद, जेट्टी का निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास और संचालन व्यवस्था स्थापित करने में खर्च होगी।
Mumbai Water Metro: नरीमन पॉइंट से वर्सोवा तक कॉरिडोर
मुंबई शहर के भीतर प्रस्तावित वॉटर मेट्रो सेवाएं मुख्य रूप से एक प्रमुख कॉरिडोर पर केंद्रित होंगी। यह कॉरिडोर नरीमन पॉइंट से शुरू होकर वर्ली, बांद्रा, जुहू होते हुए वर्सोवा तक जाएगा। यह मुंबई का पश्चिमी तटीय मार्ग है जो शहर के कुछ सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ता है। नरीमन पॉइंट मुंबई का प्रमुख व्यावसायिक जिला है जहां हजारों कार्यालय स्थित हैं। वर्ली में भी कई महत्वपूर्ण कार्यालय और आवासीय परिसर हैं। बांद्रा मुंबई का प्रमुख उपनगर है जो मनोरंजन, खरीदारी और व्यवसाय का केंद्र है। जुहू एक लोकप्रिय समुद्र तट और आवासीय क्षेत्र है।
वर्सोवा भी एक महत्वपूर्ण उपनगरीय क्षेत्र है। इन सभी स्थानों को जलमार्ग से जोड़ने का मतलब है कि हजारों यात्री रोजाना सड़क की बजाय समुद्री मार्ग से यात्रा कर सकेंगे। पहले चरण में इस कॉरिडोर पर दो रूट चालू किए जाएंगे। अधिकारियों ने अभी यह नहीं बताया कि वे दो रूट कौन से होंगे लेकिन संभावना है कि एक रूट दक्षिण मुंबई को उत्तरी उपनगरों से जोड़ेगा। इन रूट्स पर नियमित अंतराल पर नावें चलेंगी। यात्री निर्धारित जेट्टी से टिकट लेकर नाव में सवार हो सकेंगे। यह प्रणाली मेट्रो रेल की तरह ही होगी लेकिन पानी पर।
गेटवे ऑफ इंडिया से एयरपोर्ट तक 40 मिनट में पहुंचें
मुंबई वॉटर मेट्रो की सबसे बड़ी और सबसे आकर्षक विशेषता यह होगी कि यात्री दक्षिण मुंबई से नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक मात्र 40 मिनट में पहुंच सकेंगे। यह एक क्रांतिकारी बदलाव होगा। वर्तमान में सड़क मार्ग से गेटवे ऑफ इंडिया या दक्षिण मुंबई के अन्य क्षेत्रों से नवी मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने में ट्रैफिक के आधार पर दो से तीन घंटे या उससे भी अधिक समय लग सकता है। ट्रैफिक जाम मुंबई की एक प्रमुख समस्या है। खासकर पीक आवर्स में सड़कें पूरी तरह जाम रहती हैं। ऐसे में एयरपोर्ट पहुंचने के लिए यात्रियों को बहुत पहले निकलना पड़ता है। लेकिन वॉटर मेट्रो से यह समय घटकर केवल 40 मिनट रह जाएगा। यह संभव होगा क्योंकि समुद्री मार्ग में कोई ट्रैफिक नहीं होता। नाव सीधे और तेज गति से चलेगी।
दक्षिण मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास रेडियो क्लब जेट्टी का निर्माण किया जा रहा है। यह जेट्टी तैयार हो जाने के बाद वहां से वॉटर मेट्रो की सेवा शुरू होगी। यात्री रेडियो क्लब जेट्टी से नाव में बैठेंगे और 40 मिनट में नवी मुंबई एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे। यह सुविधा विशेष रूप से व्यावसायिक यात्रियों और पर्यटकों के लिए बहुत फायदेमंद होगी।
Mumbai Water Metro: कोच्चि वॉटर मेट्रो मॉडल से प्रेरित परियोजना
मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना कोच्चि वॉटर मेट्रो मॉडल से प्रेरित है। कोच्चि वॉटर मेट्रो केरल में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और इसे भारत में शहरी जल परिवहन का एक आदर्श मॉडल माना जाता है। कोच्चि में वॉटर मेट्रो ने शहर के विभिन्न द्वीपों और मुख्य भूमि को जोड़ा है। वहां इलेक्ट्रिक नावें चलती हैं जो पूरी तरह वातानुकूलित और आरामदायक हैं। कोच्चि वॉटर मेट्रो की सफलता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के लिए भी इसी तर्ज पर परियोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। कोच्चि मॉडल की कई विशेषताओं को मुंबई में भी अपनाया जाएगा।
इसमें पर्यावरण अनुकूल बैटरी संचालित नावें, आधुनिक जेट्टी, डिजिटल टिकटिंग सिस्टम और यात्री सुविधाएं शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार 6 मार्च 2026 को पेश होने वाले राज्य बजट में इस परियोजना की औपचारिक घोषणा कर सकती है। बजट में इस परियोजना के लिए आवंटन और वित्तीय योजना की जानकारी दी जा सकती है।
वॉटर मेट्रो क्या है और कैसे काम करती है?
वॉटर मेट्रो एक आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल जल परिवहन प्रणाली है। इसमें बैटरी संचालित या इलेक्ट्रिक फेरी और नौकाओं के माध्यम से शहर के विभिन्न हिस्सों को जलमार्ग से जोड़ा जाता है। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य सड़क यातायात की भीड़भाड़ को कम करना, तेज और सुविधाजनक यात्रा विकल्प प्रदान करना तथा पर्यावरण की रक्षा करना है। वॉटर मेट्रो शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण और समय की बर्बादी जैसी समस्याओं का एक प्रभावी समाधान है। यह कैसे काम करती है यह समझना आसान है। शहर के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर जेट्टी यानी नाव स्टॉप बनाए जाते हैं।
ये जेट्टी मेट्रो स्टेशन की तरह होते हैं। यात्री इन जेट्टी पर आते हैं, टिकट लेते हैं और निर्धारित समय पर नाव में सवार होते हैं। नाव एक जेट्टी से दूसरे जेट्टी तक यात्रियों को ले जाती है। पूरी प्रणाली समय सारणी के अनुसार संचालित होती है। मुंबई में भी यही प्रणाली अपनाई जाएगी।
Mumbai Water Metro: मुंबई के लिए वरदान साबित होगी परियोजना
मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना शहर के लिए कई मायनों में वरदान साबित होगी। सबसे पहले यह सड़क यातायात के दबाव को कम करेगी। मुंबई की सड़कें पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़ वाली हैं। वॉटर मेट्रो शुरू होने से हजारों यात्री सड़क की बजाय जलमार्ग का उपयोग करेंगे। दूसरा यह पर्यावरण के लिए अच्छा होगा। इलेक्ट्रिक नावों से कोई धुआं या प्रदूषण नहीं होगा। तीसरा यह समय की बचत करेगा। ट्रैफिक जाम में फंसने की बजाय यात्री तेजी से अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। चौथा यह मुंबई को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर के रूप में स्थापित करेगा।
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