RSS प्रमुख मोहन भागवत का लखनऊ में बड़ा बयान “हिंदुओं को 3 बच्चे पैदा करने चाहिए, घर वापसी तेज हो, घुसपैठियों को डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट करें”
RSS प्रमुख का लखनऊ में बयान: हिंदू जनसंख्या चिंता, मतांतरण रोकें, घुसपैठियों को डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट, सद्भाव बढ़ाएं
Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मंगलवार 17 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने कई महत्वपूर्ण और चर्चा में आने वाले बयान दिए। मोहन भागवत ने हिंदू समाज से तीन बच्चे पैदा करने की अपील की और कहा कि हिंदुओं की घटती जनसंख्या चिंता का विषय है। उन्होंने लालच और जबरदस्ती से हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही और घर वापसी के काम को तेज करने पर जोर दिया। बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा तथा उन्हें रोजगार नहीं देना है।
इस कार्यक्रम में सिक्ख, बौद्ध, जैन समाज के साथ ही रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में हिंदू समाज को संगठित और सशक्त होने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमको किसी से खतरा नहीं है लेकिन सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने विदेशी शक्तियों के प्रति भी आगाह किया और कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं।
Mohan Bhagwat: हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए
सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने जनसंख्या के मुद्दे पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। इस बयान के पीछे का तर्क देते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों के एक अध्ययन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसार जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। डॉ भागवत ने कहा कि यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए। उन्होंने विवाह के उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विवाह का उद्देश्य सृष्टि को आगे बढ़ाना होना चाहिए, न कि केवल वासना पूर्ति। उन्होंने कहा कि इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है। यह बयान सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में जनसंख्या नियंत्रण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि से संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। लेकिन आरएसएस प्रमुख का यह बयान धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में दिया गया है।
घर वापसी का काम तेज होना चाहिए
मोहन भागवत ने मतांतरण और घर वापसी के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि लालच और जबरदस्ती से हो रहे मतांतरण पर रोक लगनी चाहिए। घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। घर वापसी से तात्पर्य उन लोगों को हिंदू धर्म में वापस लाना है जो किसी कारणवश अन्य धर्म अपना चुके हैं। डॉ भागवत ने कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा। उन्हें समाज में पूरी तरह से स्वीकार करना होगा और उनकी देखभाल करनी होगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें। मतांतरण का मुद्दा भारत में लंबे समय से विवादास्पद रहा है। कई राज्यों में मतांतरण विरोधी कानून बनाए गए हैं। आरएसएस और उससे जुड़े संगठन लंबे समय से घर वापसी कार्यक्रम चलाते रहे हैं। मोहन भागवत का यह बयान इसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।
Mohan Bhagwat: डिलीट और डिपोर्ट करना होगा
बढ़ती घुसपैठ पर गंभीर चिंता जताते हुए मोहन भागवत ने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। यह एक मजबूत और स्पष्ट बयान था। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को रोजगार नहीं देना है। यदि उन्हें रोजगार मिलता रहेगा तो वे देश में बने रहेंगे। इसलिए समाज को सचेत रहना होगा और घुसपैठियों को किसी भी तरह की मदद नहीं देनी है। डिटेक्ट का मतलब है पहचान करना कि कौन घुसपैठिया है। डिलीट का अर्थ है उनकी पहचान को सरकारी दस्तावेजों से हटाना। डिपोर्ट का मतलब है उन्हें वापस उनके देश भेजना। यह एक व्यापक रणनीति है जिसे लागू करने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। घुसपैठ का मुद्दा विशेष रूप से बांग्लादेश की सीमा से लगे राज्यों में गंभीर है। असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में यह एक प्रमुख चुनावी और सामाजिक मुद्दा रहा है।
भेदभाव समाप्त करें
मोहन भागवत ने सामाजिक सद्भाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सद्भाव न रहने से भेदभाव होता है। हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं। उन्होंने कहा कि एक समय भेद नहीं था लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है जिसे दूर करना होगा। डॉ भागवत ने कहा कि सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है। जो विरोधी हैं उन्हें मिटाना है, ऐसा हम नहीं मानते। एक ही सत्य सर्वत्र है। इस दर्शन को समझकर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा। उन्होंने बस्ती स्तर पर सामाजिक सद्भाव की बैठकें नियमित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम आपस में मिलेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी। इस प्रकार की बैठकों में रूढ़ियों से मुक्त होने पर चर्चा होनी चाहिए। जो समस्याएं सामने आएं उनको दूर करने का प्रयास होना चाहिए। जो दुर्बल है उनकी सहायता करनी चाहिए।
Mohan Bhagwat: मातृशक्ति परिवार का आधार
मोहन भागवत ने महिलाओं की भूमिका पर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि घर परिवार का आधार मातृशक्ति है। हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था लेकिन खर्च कैसे हो, यह मातायें तय करती थी। मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है। उन्होंने कहा कि महिला को हमें अबला नहीं मानना है, वह असुर मर्दिनी है। हमने स्त्री की, प्रकृति की जो कल्पना की, वह बलशाली है। डॉ भागवत ने कहा कि महिलाओं को आत्म संरक्षण का प्रशिक्षण होना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण सुझाव है विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के संदर्भ में। उन्होंने पश्चिमी और भारतीय दृष्टिकोण में अंतर बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से है, हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है। उनका सौंदर्य नहीं, वात्सल्य देखा जाता है। यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है।
कानून सभी को मानना चाहिए
यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में मोहन भागवत ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो उसे बदलने का उपाय भी संविधान में है। लोकतांत्रिक तरीके से कानून में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने जाति व्यवस्था पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जातियां झगड़े का कारण नहीं बननी चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी। जो नीचे गिरे हैं उन्हें झुककर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए। डॉ भागवत ने कहा कि संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है। एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए। यह संदेश सामाजिक समरसता और समानता का है।
Mohan Bhagwat: भारत विश्व का मार्गदर्शन करेगा
मोहन भागवत ने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है। यह आत्मविश्वास से भरा बयान था। हालांकि उन्होंने विदेशी शक्तियों के प्रति भी सावधान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा। एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा। यह संदेश राष्ट्रीय एकता और सतर्कता का है।
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