Modi Government New Plan: संशोधित उड़ान स्कीम को कैबिनेट की मंजूरी, 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड बनेंगे, 4 करोड़ यात्रियों को मिलेगा सीधा फायदा

कैबिनेट का बड़ा फैसला, 100 एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड से 4 करोड़ यात्रियों को फायदा

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Modi Government New Plan: देश के किसी छोटे शहर या पहाड़ी कस्बे का रहने वाला अगर किसी बड़े शहर तक हवाई जहाज से पहुंचना चाहे तो अब उसे अपने सपने को सपना ही नहीं रहने देना होगा। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संशोधित उड़ान स्कीम को मंजूरी देकर देश के हवाई यात्रा के नक्शे को पूरी तरह बदल देने की योजना पर मुहर लगा दी है। यह फैसला भारत के एविएशन सेक्टर के लिए एक नई इबारत लिखने जैसा है।

विजन 2036: संशोधित उड़ान स्कीम का स्वरूप और विस्तार

उड़ान यानी उड़े देश का आम नागरिक योजना की शुरुआत पहले ही हो चुकी थी लेकिन अब इसे संशोधित और विस्तारित रूप में नए सिरे से लागू किया जा रहा है। इस बार इस योजना का दायरा पहले से कहीं अधिक बड़ा है।

संशोधित योजना में 100 नए एयरपोर्ट निर्माण, 200 हेलीपैड स्थापना, 120 नए हवाई मार्ग और एयरलाइन कंपनियों को वित्तीय सहायता जैसे बड़े प्रावधान शामिल हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2035-36 तक लागू रहेगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट: 100 नए एयरपोर्ट्स का निर्माण और आवश्यकता

सरकार की योजना है कि मौजूदा छोटी एयरस्ट्रिप और हवाई पट्टियों को विकसित कर पूर्ण एयरपोर्ट का दर्जा दिया जाए। यह उन शहरों और कस्बों में होगा जहां हवाई सुविधा अब तक नहीं थी या बेहद सीमित थी।

एविएशन उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अभी भी सैकड़ों ऐसे जिले हैं जहां निकटतम एयरपोर्ट तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में नए एयरपोर्ट टियर-2 और टियर-3 शहरों के व्यापारिक और सामाजिक विकास को नई गति देंगे।

कनेक्टिविटी बूस्ट: दुर्गम क्षेत्रों के लिए 200 हेलीपैड का महत्व

200 नए हेलीपैड का निर्माण विशेष रूप से पहाड़ी, दुर्गम और दूरस्थ इलाकों में किया जाएगा। प्रत्येक हेलीपैड पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे और पूरे हेलीपैड नेटवर्क के लिए 3,661 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में हेलीपैड बनने से न केवल यात्री सुविधा बढ़ेगी बल्कि आपदा राहत, चिकित्सा आपातकाल और सैन्य आपूर्ति भी तेज और प्रभावी होगी।

एयरलाइंस को प्रोत्साहन: वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का प्रावधान

जब कोई हवाई मार्ग नया होता है या कम यात्री संख्या वाला होता है तो एयरलाइन कंपनियां उस पर उड़ान भरने से कतराती हैं क्योंकि वहां मुनाफा कम होता है। ऐसे में सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग के जरिए एयरलाइंस को आर्थिक सहायता देती है।

संशोधित उड़ान स्कीम में अगले 10 वर्षों में इस मद में 10,043 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इससे एयरलाइंस नए और कम लाभदायक रूट पर भी उड़ान भरने के लिए प्रोत्साहित होंगी और यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे।

क्षेत्रीय विकास: टियर-2 और टियर-3 शहरों पर प्रभाव

इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी वर्ग टियर-2 और टियर-3 शहरों के लोग होंगे। जब इन शहरों से सीधी उड़ानें शुरू होंगी तो वहां के व्यापारियों को बड़े शहरों तक पहुंचना आसान होगा और निवेश आकर्षित होगा।

पर्यटन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि छोटे शहरों में हवाई सेवा शुरू होने से घरेलू पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। जिन ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों तक पहुंचना कठिन था, वे अब पर्यटकों की पहुंच में आ जाएंगे।

बजट आवंटन: 28,840 करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप

इस योजना का कुल बजट 28,840 करोड़ रुपये है जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक यानी 10 वर्षों में खर्च किया जाएगा। इसमें नए एयरपोर्ट निर्माण पर करीब 12,159 करोड़ रुपये, हेलीपैड नेटवर्क पर 3,661 करोड़ रुपये और वायबिलिटी गैप फंडिंग पर 10,043 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

एविएशन अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इस निवेश का बहुगुणित प्रभाव होगा क्योंकि बेहतर हवाई संपर्क से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में नई जान आती है और रोजगार के अवसर कई गुना बढ़ जाते हैं।

कार्यान्वयन रणनीति: चुनौतियां और भविष्य की राह

100 नए एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय जरूरी होगा। पहाड़ी इलाकों में हेलीपैड निर्माण में तकनीकी कठिनाइयां भी आ सकती हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय की विशेष व्यवस्था की जाएगी और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। तेज गति से कार्यान्वयन के लिए एक समर्पित निगरानी तंत्र भी स्थापित किया जाएगा।

निष्कर्ष

संशोधित उड़ान स्कीम केवल एक सरकारी योजना नहीं है, यह भारत की उस बदलती तस्वीर का हिस्सा है जहां हवाई यात्रा अब केवल अमीरों का विशेषाधिकार नहीं रहेगी। जब देश के हर कोने से उड़ान संभव होगी तो न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि देश का आर्थिक और सामाजिक विकास भी नई ऊंचाइयां छुएगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी कैबिनेट के आधिकारिक निर्णयों और एविएशन सेक्टर के विश्लेषण पर आधारित है।

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