विशाखापत्तनम में आज दिखेगी भारत की नौसैनिक शक्ति, राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी 71 युद्धपोतों का निरीक्षण, 50 लड़ाकू विमानों का होगा फ्लाई-पास्ट
'मिलन 2026' अभ्यास के तहत विदेशी नौसेनाओं के साथ संयुक्त प्रदर्शन, स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत होगा मुख्य आकर्षण, MARCOS दिखाएंगे युद्ध कौशल
MILAN 2026: भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने वाली भारतीय नौसेना आज अपनी अत्याधुनिक युद्धक क्षमता का भव्य प्रदर्शन करने जा रही है। आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम, जिसे ‘सिटी ऑफ डेस्टिनी’ के नाम से जाना जाता है, के समुद्री तट पर आज एक ऐतिहासिक नौसैनिक समीक्षा का आयोजन होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज भारतीय नौसेना के साथ-साथ विभिन्न मित्र राष्ट्रों के कुल 71 युद्धपोतों और पनडुब्बियों की अंतरराष्ट्रीय बेड़े की सलामी लेंगी। यह आयोजन न केवल भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति को प्रदर्शित करेगा बल्कि वैश्विक समुद्री सहयोग को भी मजबूत करेगा। इस विशाल समुद्री परेड में 50 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर फ्लाई-पास्ट करेंगे, जो आकाश में शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। आइए जानते हैं इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सभी विस्तृत जानकारी।
MILAN 2026: क्या है आज के कार्यक्रम की खासियत?
आज विशाखापत्तनम के समुद्री तट पर होने वाली यह नौसैनिक समीक्षा कई मायनों में विशेष और महत्वपूर्ण है। यह केवल एक औपचारिक परेड नहीं बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का जीवंत प्रदर्शन है।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी: इस समीक्षा में भारतीय नौसेना के अलावा कई मित्र देशों की नौसेनाओं के जहाज भी शामिल हैं। यह ‘मिलन 2026’ अभ्यास का हिस्सा है, जो विभिन्न देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
विशाल बेड़ा: कुल 71 युद्धपोत और पनडुब्बियां इस समीक्षा में भाग ले रही हैं। यह संख्या अपने आप में इस आयोजन की भव्यता को दर्शाती है। इतनी बड़ी संख्या में जहाजों का एक साथ समुद्र में खड़ा होना एक दुर्लभ और प्रभावशाली दृश्य होगा।
हवाई शक्ति प्रदर्शन: 50 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर फ्लाई-पास्ट करेंगे। इनमें मिग-29के जैसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान, स्वदेशी एलसीए तेजस, पी-8आई टोही विमान और सी-किंग हेलिकॉप्टर शामिल हैं।
स्वदेशी गौरव: भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण होगा। यह जहाज भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता का प्रतीक है।
विशेष बल प्रदर्शन: भारतीय नौसेना के विशेष बल MARCOS, जिन्हें दुनिया के सबसे घातक समुद्री कमांडो में गिना जाता है, अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
राष्ट्रपति मुर्मू कैसे करेंगी समीक्षा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जो भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं, एक विशेष तरीके से इस विशाल बेड़े की समीक्षा करेंगी।
स्वदेशी युद्धपोत पर सवारी: राष्ट्रपति स्वदेशी युद्धपोत INS सुमेधा पर सवार होंगी। यह जहाज भारत में ही निर्मित एक आधुनिक युद्धपोत है जो भारत की जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है।
समुद्र में निरीक्षण: राष्ट्रपति मुर्मू INS सुमेधा पर सवार होकर समुद्र के बीच खड़े विशाल बेड़े का निरीक्षण करेंगी। जहाज समुद्र में पंक्तिबद्ध खड़े होंगे और राष्ट्रपति का युद्धपोत उनके बीच से गुजरेगा।
21 तोपों की सलामी: पारंपरिक सैन्य परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। यह सर्वोच्च सम्मान है जो किसी को दिया जाता है। तोपों की गर्जना समुद्र और आकाश में गूंजेगी।
जहाजों द्वारा सलामी: जब राष्ट्रपति का जहाज अन्य युद्धपोतों के पास से गुजरेगा, तो सभी जहाज उन्हें विशेष नौसैनिक सलामी देंगे। नाविक अपनी वर्दी में पंक्तिबद्ध खड़े होकर सलामी देंगे।
संदेश और संबोधन: समीक्षा के बाद राष्ट्रपति संभवतः नौसेना कर्मियों को संबोधित करेंगी और उनके समर्पण की सराहना करेंगी।
INS विक्रांत – गौरव का प्रतीक (MILAN 2026)
इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत होगा। यह जहाज भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
क्या है विमानवाहक पोत: विमानवाहक पोत एक विशाल युद्धपोत होता है जिसके डेक (ऊपरी सतह) पर लड़ाकू विमान उड़ान भर सकते हैं और उतर सकते हैं। यह समुद्र में एक तैरता हुआ हवाई अड्डा है।
स्वदेशी निर्माण: INS विक्रांत पूरी तरह से भारत में कोचीन शिपयार्ड में बनाया गया है। इसके निर्माण में भारतीय इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और श्रमिकों का वर्षों का परिश्रम लगा है।
विशाल आकार: यह जहाज 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। इसका विस्थापन लगभग 45,000 टन है। इस पर 30 से अधिक विमान और हेलिकॉप्टर तैनात हो सकते हैं।
आत्मनिर्भरता का प्रतीक: INS विक्रांत भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक शानदार उदाहरण है। यह दिखाता है कि भारत अब जटिल सैन्य उपकरण स्वयं बना सकता है।
सामरिक महत्व: विमानवाहक पोत किसी भी नौसेना की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। दुनिया में केवल कुछ देशों के पास ही विमानवाहक पोत हैं। INS विक्रांत के साथ भारत इस विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है।
71 युद्धपोत और पनडुब्बियां – विविधता का प्रदर्शन
इस समीक्षा में कुल 71 जहाज और पनडुब्बियां भाग ले रही हैं। यह संख्या भारतीय नौसेना की विविधता और मित्र देशों के साथ मजबूत संबंधों को दर्शाती है।
भारतीय युद्धपोत: भारतीय नौसेना के विभिन्न प्रकार के जहाज इस समीक्षा में शामिल हैं। इनमें विध्वंसक (destroyers), फ्रिगेट, कार्वेट, पेट्रोल वेसल, और सपोर्ट शिप्स शामिल हैं।
पनडुब्बियां: भारतीय नौसेना की पारंपरिक और परमाणु पनडुब्बियां भी इस समीक्षा का हिस्सा होंगी। पनडुब्बियां समुद्र के नीचे से दुश्मन पर हमला कर सकती हैं और रक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
विदेशी जहाज: ‘मिलन 2026’ अभ्यास के तहत कई मित्र देशों के नौसैनिक जहाज भी इस समीक्षा में भाग ले रहे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग का प्रतीक है।
विभिन्न क्षमताएं: इन जहाजों में विभिन्न प्रकार की क्षमताएं हैं – कुछ वायु रक्षा में विशेषज्ञ हैं, कुछ पनडुब्बी रोधी युद्ध में, कुछ सतह युद्ध में, और कुछ निगरानी और टोही में।
आधुनिक हथियार: ये जहाज आधुनिक मिसाइलों, तोपों, टारपीडो और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस हैं।
MILAN 2026: 50 लड़ाकू विमानों का फ्लाई-पास्ट
समुद्री समीक्षा के साथ-साथ आकाश में भी शक्ति का प्रदर्शन होगा। 50 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर फ्लाई-पास्ट करेंगे।
मिग-29के: ये नौसेना के मुख्य लड़ाकू विमान हैं जो विमानवाहक पोत से उड़ान भरते हैं। रूसी मूल के ये विमान बेहद शक्तिशाली और युद्धक्षम हैं।
एलसीए तेजस: यह भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है। नेवी वर्जन को विशेष रूप से विमानवाहक पोत से उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका फ्लाई-पास्ट भारत की स्वदेशी विमानन क्षमता को दिखाएगा।
पी-8आई पॉसिडॉन: यह एक लंबी दूरी का समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी विमान है। यह समुद्र में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखता है और पनडुब्बियों को ट्रैक करता है।
सी-किंग हेलिकॉप्टर: ये बहुउद्देशीय हेलिकॉप्टर हैं जो बचाव कार्य, पनडुब्बी रोधी युद्ध, और माल परिवहन में उपयोग होते हैं।
फॉर्मेशन फ्लाइंग: विमान विभिन्न फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे जो देखने में बेहद प्रभावशाली होगा। आकाश में इन विमानों की गड़गड़ाहट वातावरण को रोमांचक बना देगी।
MARCOS का विशेष प्रदर्शन
भारतीय नौसेना के विशेष बल MARCOS (Marine Commandos) इस कार्यक्रम में अपने अद्भुत युद्ध कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
कौन हैं MARCOS: MARCOS भारतीय नौसेना के विशेष बल हैं जिन्हें दुनिया के सबसे घातक समुद्री कमांडो में गिना जाता है। इन्हें “दाधी वाले” के नाम से भी जाना जाता है।
विशेष प्रशिक्षण: MARCOS को अत्यंत कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। वे समुद्र, जमीन और हवा – तीनों में ऑपरेशन कर सकते हैं। उनका प्रशिक्षण दुनिया के सबसे कठिन प्रशिक्षणों में से एक माना जाता है।
क्या दिखाएंगे: MARCOS समुद्र के बीच अपने विशेष युद्ध कौशल और ‘कॉम्बैट पावर’ का प्रदर्शन करेंगे। इसमें तेज नौकाओं से की जाने वाली कार्रवाई, समुद्र में डाइविंग ऑपरेशन, और विशेष हथियारों का उपयोग शामिल हो सकता है।
महत्व: MARCOS का यह प्रदर्शन दुश्मनों को संदेश देगा कि भारत के पास विशेष बल हैं जो किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।
‘MILAN 2026’ – अंतरराष्ट्रीय सहयोग
यह पूरा आयोजन ‘मिलन 2026’ अभ्यास का हिस्सा है, जो भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है।
क्या है मिलन: ‘मिलन’ शब्द का अर्थ है मिलना या एकजुट होना। यह भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास है जो हर कुछ वर्षों में होता है।
उद्देश्य: इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा, आपसी सहयोग और मित्रता को मजबूत करना है।
भागीदार देश: कई मित्र देश इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। इनमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देश, दक्षिण एशियाई देश, और अन्य मित्र राष्ट्र शामिल हैं।
गतिविधियां: समीक्षा के अलावा, विभिन्न नौसेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास, सेमिनार, खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
कूटनीतिक महत्व: यह कार्यक्रम भारत के मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को दर्शाता है और समुद्री सुरक्षा में भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है।
भारत की समुद्री शक्ति का महत्व
यह आयोजन भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति को प्रदर्शित करता है, जो देश की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लंबी तटरेखा: भारत की तटरेखा लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी है। इसकी सुरक्षा करना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
व्यापार मार्ग: भारत के अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। इन मार्गों की सुरक्षा अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।
हिंद महासागर: भारत हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित है जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां भारत की मजबूत उपस्थिति जरूरी है।
बढ़ती चुनौतियां: समुद्री डकैती, आतंकवाद, और क्षेत्रीय विवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत नौसेना आवश्यक है।
आत्मनिर्भरता: भारत अब अपने युद्धपोत, पनडुब्बियां और हथियार स्वयं बना रहा है, जो रक्षा में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम है।
MILAN 2026: निष्कर्ष
आज विशाखापत्तनम में होने वाली यह नौसैनिक समीक्षा भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक शानदार प्रदर्शन होगा। 71 युद्धपोतों और पनडुब्बियों का विशाल बेड़ा, 50 से अधिक लड़ाकू विमानों का फ्लाई-पास्ट, INS विक्रांत जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत की उपस्थिति, और MARCOS का विशेष प्रदर्शन – ये सभी तत्व मिलकर इसे एक यादगार आयोजन बनाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की जाने वाली यह समीक्षा न केवल भारतीय नौसेना की उपलब्धियों को सम्मान देगी बल्कि देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में लगे जवानों का मनोबल भी बढ़ाएगी। ‘मिलन 2026’ के माध्यम से भारत विश्व को यह संदेश दे रहा है कि वह न केवल अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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