मेष संक्रांति 2026: 14 अप्रैल को सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और करने योग्य विशेष कार्य, खरमास समाप्ति के साथ मांगलिक कार्य शुरू

14 अप्रैल 2026 को मेष संक्रांति, सूर्य देव मेष राशि में गोचर करेंगे, शुभ मुहूर्त में स्नान-दान और पूजा से मिलेगा विशेष पुण्य, खरमास समाप्ति के बाद मांगलिक कार्य शुरू

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Mesh Sankranti 2026: हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति तिथियों का विशेष महत्व होता है। इनमें मेष संक्रांति को अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं। साल 2026 में मेष संक्रांति 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। मेष संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त होता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। सूर्य की उपासना, स्नान और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2026 को होगी। सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में गोचर करेंगे। इस दिन के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • पुण्य काल: सुबह 6 बजकर 22 मिनट से दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक।

  • महा पुण्य काल: सुबह 7 बजकर 33 मिनट से सुबह 11 बजकर 44 मिनट तक।

  • विशेष: ज्योतिषियों का मानना है कि इस महा पुण्य काल में स्नान, दान और सूर्य पूजा करने से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है।

Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हिंदू धर्म में मेष संक्रांति को सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष सूर्य की उच्च राशि है, इसलिए इस दिन सूर्य की पूजा से व्यक्ति के तेज, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है। खरमास की समाप्ति के बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्य बिना किसी रोक-तोक के किए जा सकते हैं। यह दिन नई शुरुआत के लिए भी शुभ होता है।

Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति के दिन स्नान का महत्व और विधि

मेष संक्रांति के दिन स्नान को विशेष पुण्यदायी माना गया है। यदि संभव हो तो गंगा, यमुना या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करें। घर पर ही शुभ मुहूर्त में स्नान करने वाले लोग पानी में गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर सूर्य देव की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, कुमकुम और चावल डालें। फिर “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें।

दान-पुण्य: मेष संक्रांति पर क्या दान करें

दान मेष संक्रांति का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस दिन दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। शुभ फल के लिए निम्नलिखित वस्तुओं का दान करें:

  • गेहूं और चने की दाल

  • पीले वस्त्र और हल्दी

  • तिल

  • पानी से भरा मिट्टी का घड़ा

  • पंखा

  • गुड़ और सत्तू

Mesh Sankranti 2026: सूर्य देव की उपासना और पूजा विधि

मेष संक्रांति पर सूर्य देव की आराधना का सबसे अधिक महत्व है। भोर में उठकर स्नान के बाद लाल या पीले वस्त्र पहनें। तांबे के लोटे में जल, कुमकुम, लाल फूल और अक्षत डालकर अर्घ्य दें। पूजा के दौरान गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्र “ॐ सूर्याय नमः, ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का जाप करें। सूर्य चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। सूर्य देव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में तेज, प्रतिष्ठा और सफलता बढ़ती है।

Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति पर क्या न करें

इस शुभ दिन पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • क्रोध, झूठ बोलना या किसी को कष्ट पहुंचाना वर्जित है।

  • मांसाहार और मदिरा से दूर रहें।

  • विवाद या नकारात्मक बातचीत से बचें।

  • दान करते समय किसी भी वस्तु को गिनकर न दें, जितना हो सके उदारता से दें।

Mesh Sankranti 2026: अन्य राशियों पर मेष संक्रांति का प्रभाव

ज्योतिष के अनुसार मेष संक्रांति हर राशि पर अलग-अलग प्रभाव डालती है। मेष, सिंह और धनु राशि वालों के लिए यह समय और भी शुभ रहेगा। इन राशियों के लोगों को करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अन्य राशि वालों को भी सूर्य उपासना से फायदा होगा और जीवन में ऊर्जा का संचार होगा।

निष्कर्ष

मेष संक्रांति 2026 एक ऐसा पावन अवसर है जो सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने का सुनहरा मौका देता है। 14 अप्रैल को किए गए स्नान, दान और उपासना से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आएगी। भक्ति भाव से सूर्य देव को अर्घ्य दें और सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करें।

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