गुजरात में बिना मां-बाप की इजाजत नहीं कर पाएंगे शादी, विवाह रजिस्ट्रेशन के नियमों में बड़ा बदलाव

विवाह रजिस्ट्रेशन में बड़ा बदलाव, 30 दिन की प्रतीक्षा, माता-पिता को सूचना अनिवार्य, लव जिहाद पर सख्ती

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Gujrat News: गुजरात में प्रेमी जोड़ों के लिए बड़ी खबर। अब राज्य में माता-पिता की सहमति के बिना शादी करना मुश्किल हो जाएगा। गुजरात सरकार विवाह रजिस्ट्रेशन के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है।

Gujrat News: नियमों में बदलाव की मुख्य वजह

डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष संघवी ने विधानसभा में इस प्रस्ताव की घोषणा करते हुए निम्नलिखित कारण बताए:

  • लड़कियों की सुरक्षा: “मासूम लड़कियों को फंसाने” की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

  • लव जिहाद और सांस्कृतिक हमला: संघवी ने इसे “सांस्कृतिक हमला” बताया और कहा कि BJP सरकार अब इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

  • सामाजिक मांग: कई सामाजिक संगठनों ने मौजूदा प्रणाली की खामियों को दूर करने की अपील की है।

Gujrat News: 30 दिन के लिए मांगे गए सुझाव

सरकार ने इन प्रस्तावित बदलावों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाते हुए जनता से राय मांगी है:

  • समयावधि: नागरिकों और संगठनों के पास अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 30 दिनों का समय है।

  • माध्यम: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की वेबसाइट पर सुझाव दर्ज किए जा सकते हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही नए नियम लागू किए जाएंगे।

Gujrat News: क्या हैं प्रस्तावित नए नियम

प्रस्तावित नए नियम विवाह रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक विस्तृत बनाते हैं:

  1. माता-पिता की जानकारी अनिवार्य: आवेदन के साथ एक घोषणापत्र देना होगा जिसमें माता-पिता की जानकारी और उन्हें सूचित करने का विवरण हो।

  2. पूरा विवरण: दूल्हा-दुल्हन को अपने माता-पिता के नाम, पते, आधार और संपर्क विवरण देने होंगे।

  3. माता-पिता को सूचना: असिस्टेंट रजिस्ट्रार द्वारा दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता को 10 कार्य दिवसों के भीतर सूचित किया जाएगा।

  4. 30 दिन की प्रतीक्षा: रजिस्ट्रार की संतुष्टि के 30 दिन बाद ही शादी रजिस्टर होगी, जो हस्तक्षेप के लिए समय प्रदान करती है।

  5. ऑनलाइन पोर्टल: सभी विवरण सरकार द्वारा बनाए जाने वाले एक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।

Gujrat News: राजनीतिक समर्थन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सवाल

  • विधायकों की प्रतिक्रिया: आम आदमी पार्टी (AAP) और BJP दोनों के विधायकों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है और इसे “समय की जरूरत” बताया है।

  • संवैधानिक चिंताएं: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आलोचकों का कहना है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 (जीवनसाथी चुनने का अधिकार) का उल्लंघन कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में स्पष्ट किया है कि वयस्क नागरिकों की शादी में माता-पिता का वीटो अधिकार नहीं है।

निष्कर्ष: यदि ये नियम कानूनी रूप ले लेते हैं, तो गुजरात में अंतर-धार्मिक विवाह या माता-पिता की मर्जी के खिलाफ शादी करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। आने वाले 30 दिनों की आपत्तियां और सरकार की उन पर प्रतिक्रिया इस विषय की नई दिशा तय करेगी।

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