मार्क जकरबर्ग का मेटावर्स सपना धराशायी, Meta ने Horizon Worlds बंद करने का लिया फैसला, 6.5 लाख करोड़ रुपये के भारी निवेश पर उठे सवाल, अब AI की ओर बढ़ेगा कंपनी का फोकस

मेटावर्स फेल, Meta अब AI पर फोकस बढ़ाने की तैयारी में

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Metaverse failure: जब पांच साल पहले मार्क जकरबर्ग ने मंच पर खड़े होकर कहा था कि वे इंटरनेट की अगली दुनिया बनाने जा रहे हैं, तो पूरी टेक इंडस्ट्री सांस रोककर सुन रही थी। आज उसी सपने की इमारत भरभरा कर गिरती दिख रही है।

Meta ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि Horizon Worlds को बंद किया जाएगा और वर्चुअल रिएलिटी अनुभव पर नए निवेश तथा विकास कार्यों को सीमित किया जाएगा। यह फैसला तब आया है जब दुनिया भर में मेटावर्स को लेकर उपभोक्ताओं की रुचि उम्मीद से कहीं कम साबित हुई।

Metaverse failure: मेटावर्स की शुरुआत कैसे हुई थी और क्यों इसे बड़ा दांव माना गया

अक्टूबर 2021 में मार्क जकरबर्ग ने एक बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने Facebook का नाम बदलकर Meta रख दिया और घोषणा की कि कंपनी अब एक ऐसी वर्चुअल दुनिया बनाएगी जहां लोग काम करेंगे, मिलेंगे, खेलेंगे और जीवन जीएंगे।

जकरबर्ग का तर्क था कि जिस तरह स्मार्टफोन ने इंटरनेट को बदला, उसी तरह मेटावर्स अगले दशक की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति होगी। Meta ने अपनी Reality Labs शाखा के तहत अरबों डॉलर का निवेश किया और Horizon Worlds को इस सपने की नींव बताया।

Metaverse failure: कितना पैसा बर्बाद हुआ और क्या मिला हाथ

Meta की Reality Labs ने पिछले कई वर्षों में करीब 6.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश मेटावर्स परियोजना में किया। इस राशि से पाकिस्तान जैसे देश का एक साल का सरकारी बजट आराम से चल सकता है।

इतने बड़े निवेश के बाद भी Horizon Worlds कभी भी उस स्तर तक नहीं पहुंच सका जिसकी उम्मीद थी। शुरुआती रिपोर्टों में सामने आया कि खुद Meta के कर्मचारी इस प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करते थे। यूजर इंटरफेस, ग्राफिक्स क्वालिटी और अनुभव को लेकर लगातार आलोचनाएं होती रहीं।

Metaverse failure: Horizon Worlds क्यों नहीं चल पाया आम लोगों के बीच

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार मेटावर्स की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि इसमें प्रवेश की बाधा बहुत अधिक थी। एक महंगा VR हेडसेट खरीदना, उसे सेटअप करना और फिर एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर समय बिताना जहां ज्यादा लोग हों ही नहीं, यह आम उपभोक्ता के लिए आकर्षक नहीं था।

इसके अलावा Horizon Worlds का यूजर अनुभव शुरू से ही काफी कमजोर रहा। अवतार बिना पैरों के दिखते थे, जो जकरबर्ग के लिए भी शर्मिंदगी का विषय बन गया था। Meta ने इसे सुधारने की कोशिश की लेकिन बुनियादी रुचि कभी नहीं बन पाई।

Metaverse failure: Meta के लिए यह फैसला व्यापारिक दृष्टि से क्या मायने रखता है

Meta के लिए यह सिर्फ एक प्लेटफॉर्म बंद करने का फैसला नहीं है। यह उस रणनीति की विफलता की स्वीकृति है जिसे कंपनी ने अपनी मुख्य पहचान बना ली थी। कंपनी ने एक दौर में Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे सफल उत्पादों से ध्यान हटाकर मेटावर्स में झोंक दिया था।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़ी तकनीकी कंपनी के लिए इतनी बड़ी राशि का नुकसान उठाना और फिर रणनीति पलटना एक साहसी लेकिन देर से आया फैसला है। समय रहते इस नुकसान को रोका जा सकता था।

Metaverse failure: AI की ओर मुड़ रही है Meta की नजर

मेटावर्स से मुंह फेरने के साथ ही Meta तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी ने AI में भारी निवेश का ऐलान किया है और अपने सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म पर AI फीचर्स जोड़ रही है।

Meta का Llama AI मॉडल पहले ही उद्योग में चर्चा का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि Meta की असली ताकत उसके तीन बड़े सोशल प्लेटफॉर्म हैं और AI के जरिए उन्हें मजबूत करना कंपनी के लिए कहीं अधिक समझदारी भरा कदम है।

Metaverse failure: दुनिया की अन्य कंपनियों ने मेटावर्स पर क्या रुख अपनाया

Meta अकेली नहीं है जिसने मेटावर्स को लेकर अपने कदम पीछे खींचे हैं। Microsoft ने भी अपना औद्योगिक मेटावर्स प्रोजेक्ट बंद कर दिया था और उससे जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों को निकाला था। Disney ने भी अपनी मेटावर्स टीम को भंग कर दिया था।

यह एक स्पष्ट संकेत है कि मेटावर्स की अवधारणा फिलहाल जनमानस में वह जगह नहीं बना पाई जिसकी कल्पना की गई थी। तकनीकी नवाचार और उपभोक्ता की तैयारी के बीच का फासला ही इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधा साबित हुआ।

निष्कर्ष

मार्क जकरबर्ग का मेटावर्स सपना टेक इतिहास की सबसे महंगी और चर्चित विफलताओं में दर्ज हो गया है। Horizon Worlds का बंद होना इस बात का प्रमाण है कि सिर्फ पैसा और महत्वाकांक्षा किसी तकनीक को सफल नहीं बना सकती, जब तक उपभोक्ता उसे अपनाने के लिए तैयार न हो। Meta का AI की ओर रुख करना एक व्यावहारिक निर्णय है, लेकिन यह सवाल हमेशा रहेगा कि इतने बड़े नुकसान से बचा जा सकता था। यह घटना हर उस कंपनी के लिए एक सबक है जो तकनीकी भविष्यवाणी के आधार पर खरबों रुपये दांव पर लगाने से पहले बाजार की तैयारी को परखना भूल जाती है।

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