March Pradosh Vrat 2026: 16 मार्च को रखा जाएगा व्रत, शाम 6:48 से रात 9:12 बजे तक है पूजा मुहूर्त, जानें शिव मंत्र, पूजा विधि और सभी शुभ मुहूर्त

16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत, शाम 6:48 से 9:12 बजे तक प्रदोष काल में करें भगवान शिव की पूजा

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March Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और फलदायी अवसर माना जाता है। प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। मार्च 2026 में अगला प्रदोष व्रत 16 मार्च सोमवार को पड़ रहा है। चूंकि यह प्रदोष सोमवार के दिन आ रहा है इसलिए इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा। सोम प्रदोष का महत्व अन्य प्रदोष व्रतों से भी अधिक माना जाता है क्योंकि सोमवार स्वयं भगवान शिव का प्रिय दिन है। आइए जानते हैं इस व्रत की सही तारीख, पूजा मुहूर्त, विधि और शिव मंत्रों के बारे में।

प्रदोष व्रत क्या है? संक्षिप्त परिचय

प्रदोष का शाब्दिक अर्थ है संध्या काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय। त्रयोदशी तिथि के दिन संध्या काल में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना प्रदोष व्रत का मूल है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और नंदी, गणेश, कार्तिकेय समेत सभी देवगण उनके साथ होते हैं। इस विशेष समय में की गई पूजा सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-सौभाग्य की वृद्धि होती है, संतान सुख मिलता है, रोग-दुख दूर होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो भक्त किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है उसे अपार शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

March Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत 2026 की सही तारीख

पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर होगा और त्रयोदशी तिथि का समापन 17 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 23 मिनट पर होगा।

विवरण दिनांक और समय
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ 16 मार्च 2026, सुबह 9:40 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त 17 मार्च 2026, सुबह 9:23 बजे
प्रदोष व्रत की तारीख 16 मार्च 2026 (सोमवार)
प्रदोष का नाम सोम प्रदोष
पूजा मुहूर्त शाम 6:48 से रात 9:12 बजे तक

सोम प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त

16 मार्च 2026 को सोम प्रदोष की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 48 मिनट से रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। यही प्रदोष काल है और इसी समय भगवान शिव की पूजा करना सर्वाधिक फलदायी है। पूजा के लिए यह करीब सवा दो घंटे का समय मिलेगा।

March Pradosh Vrat 2026: 16 मार्च 2026 के सभी शुभ मुहूर्त

मुहूर्त समय
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:10 से 5:58 बजे
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:23 से 1:11 बजे
विजय मुहूर्त दोपहर 2:48 से 3:36 बजे
गोधूलि मुहूर्त शाम 6:46 से 7:10 बजे
सायाह्न संध्या शाम 6:48 से 8:00 बजे
अमृत काल शाम 7:47 से रात 9:24 बजे
निशिता मुहूर्त 17 मार्च रात 12:23 से 1:11 बजे

सोम प्रदोष का विशेष महत्व

वैसे तो हर प्रदोष व्रत का अपना महत्व है लेकिन जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसके दो प्रमुख कारण हैं।

पहला कारण यह है कि सोमवार स्वयं भगवान शिव को समर्पित है। सोम का अर्थ चंद्रमा भी है और भगवान शिव अपने मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं। इसीलिए सोमवार शिव जी का सबसे प्रिय दिन है।

दूसरा कारण यह है कि जब सोमवार और त्रयोदशी दोनों एक साथ आते हैं तो यह दोहरा शुभ संयोग बनता है। इस दिन व्रत रखने और शिव पूजा करने से दोगुना फल मिलता है। विशेषकर संतान सुख, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और स्वास्थ्य लाभ के लिए सोम प्रदोष व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

March Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पूजा विधि

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधिवत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा की विधि इस प्रकार है।

प्रातःकाल: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक रहें और मन में शुभ विचार रखें।

संध्या काल मुख्य पूजा: शाम 6:48 बजे के बाद प्रदोष काल में पूजा शुरू करें। शिवलिंग को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। भगवान शिव को बिल्वपत्र, धतूरा, सफेद फूल, चंदन, भस्म और रुद्राक्ष अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं। प्रदोष काल में शिवलिंग की परिक्रमा करें। परिक्रमा हमेशा आधी ही करें यानी जलाधारी को पार न करें।

मंत्र जप: पूजा के समय भगवान शिव के मंत्रों का जप करें। पूजा के अंत में शिव जी की आरती करें।

भोजन: व्रत के दिन एक बार फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। नमक और अनाज से बनी चीजें न खाएं।

सोम प्रदोष पर इन शिव मंत्रों का करें जाप

भगवान शिव के इन पवित्र मंत्रों का जाप प्रदोष व्रत के दिन विशेष फलदायी होता है।

पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय

यह भगवान शिव का सबसे सरल और सर्वाधिक प्रचलित मंत्र है। इसे 108 बार जपने से विशेष लाभ होता है।

षडक्षर मंत्र: ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः

यह मंत्र भगवान शिव के सदाशिव स्वरूप को समर्पित है और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष प्रभावशाली माना जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

यह मंत्र स्वास्थ्य लाभ, दीर्घायु और मृत्युभय से मुक्ति के लिए जपा जाता है। किसी बीमार व्यक्ति के लिए यह मंत्र विशेष रूप से लाभकारी है।

कर्पूर गौरम मंत्र: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥

यह मंत्र भगवान शिव और माँ पार्वती दोनों को एक साथ समर्पित है। इसे जपने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है।

March Pradosh Vrat 2026: किसके लिए कितना फलदायी है सोम प्रदोष

जो लोग संतान सुख की कामना रखते हैं उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी है। विवाह में देरी हो रही हो या वैवाहिक जीवन में कलह हो तो यह व्रत संबंधों में मधुरता लाता है। स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए महामृत्युंजय मंत्र के साथ यह व्रत लाभकारी है। नौकरी और व्यापार में उन्नति के लिए भी यह व्रत शुभ फल देता है।

अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक आस्था और पारंपरिक लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठकगण इसे केवल आस्था की दृष्टि से पढ़ें और अपने विवेक से निर्णय लें।

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