Mandu Tourism: नवंबर में घूमने जाएं मध्य प्रदेश का मांडू, जहाज महल और रानी रूपमती की प्रेम कहानी है खास
गुलाबी ठंड में मांडू के ऐतिहासिक महलों, रानी रूपमती मंडप, हिंडोला महल और होशंग शाह के मकबरे की सैर करें। जानें पहुंचने का रास्ता और जरूरी ट्रैवल टिप्स।
Mandu Tourism: नवंबर का महीना शुरू होते ही जब मौसम में हल्की गुलाबी ठंडक घुलने लगती है, तब देश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की रौनक अपने चरम पर पहुंच जाती है। यदि आप भी इस बदलते मौसम में किसी ऐसी जगह की सैर करना चाहते हैं जहां इतिहास के पन्ने, बादलों से बात करती पहाड़ियां और प्राचीन महलों की बेजोड़ वास्तुकला एक साथ देखने को मिले, तो मध्य प्रदेश का मांडू आपके लिए सबसे मुफीद ठिकाना साबित हो सकता है। विंध्याचल की हरी-भरी पर्वतमालाओं के बीच समुद्र तल से करीब दो हजार फीट की ऊंचाई पर बसा यह प्राचीन शहर अपनी अनूठी इमारतों के साथ-साथ सुल्तान बाज बहादुर और संगीत-साधिका रानी रूपमती के अमर प्रेम की दास्तान के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है।
Mandu Tourism: मुंज और कपूर तालाब के बीच तैरता नजर आता है भव्य जहाज महल
मांडू के प्रमुख आकर्षणों में जहाज महल का नाम सबसे पहले लिया जाता है। 15वीं सदी के उत्तरार्ध में सुल्तान गियासुद्दीन खिलजी के दौर में बनी यह दो मंजिला ऐतिहासिक इमारत मुंज तालाब और कपूर तालाब के ठीक बीच में स्थापित की गई है। जब दोनों तालाब पानी से लबालब भरे होते हैं, तो दूर से देखने पर ऐसा जादुई नजारा बनता है मानो कोई विशालकाय पानी का जहाज शांत लहरों पर तैर रहा हो। महल के भीतर बनी विशाल मेहराबें, हवादार बालकनियां, खुले मंडप और छतों पर बने सुंदर गुंबद उस जमाने की अफगान वास्तुकला की असाधारण मिसाल पेश करते हैं। इतिहास और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी सपने से कम नहीं लगती।
रानी रूपमती का मंडप और बाज बहादुर के अमर प्रेम की अनकही दास्तान
मांडू केवल पत्थरों की नक्काशी और किलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मालवा के शासक बाज बहादुर और रानी रूपमती की अटूट प्रेम कहानी का गवाह भी रहा है। मांडू के दक्षिणी छोर पर ऊंची पहाड़ी पर बना रानी रूपमती का मंडप पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींच लेता है। इतिहास और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रानी रूपमती मां नर्मदा की अनन्य भक्त थीं और वे प्रतिदिन इसी मंडप से नर्मदा के पावन दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती थीं। मंडप की बालकनी से नीचे निमाड़ के विशाल मैदानों और विंध्य की गहरी घाटियों का जो मनोरम दृश्य दिखाई देता है, वह शाम के समय पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
हिंडोला महल की झुकी हुई दीवारें और होशंग शाह का संगमरमरी मकबरा
मांडू भ्रमण के दौरान हिंडोला महल को देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है। इस विशाल दरबार की बाहरी दीवारें 77 डिग्री के कोण पर बाहर की ओर झुकी हुई हैं, जिसके चलते इसे देखने पर ऐसा आभास होता है कि पूरी इमारत किसी झूले की तरह झूल रही है। इसके अलावा सफेद संगमरमर से बना होशंग शाह का मकबरा भी देश के सबसे पुराने संगमरमरी स्मारकों में गिना जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, मुगल बादशाह शाहजहां ने आगरा में ताजमहल बनवाने से पहले अपने प्रमुख वास्तुकारों को इसी मकबरे की संरचना और संगमरमर के काम का अध्ययन करने के लिए मांडू भेजा था। इसके ठीक सामने स्थित जामा मस्जिद और अशर्फी महल भी अपनी भव्यता से पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं।
Mandu Tourism: नवंबर के महीने में मांडू पहुंचने का सुगम रास्ता और जरूरी सुझाव
मांडू तक का सफर तय करने के लिए मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर सबसे सुविधाजनक केंद्र है। इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। मांडू में सीधे कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए ट्रेन से यात्रा करने वाले सैलानी इंदौर या रतलाम रेलवे स्टेशन तक का टिकट ले सकते हैं। वहां से नियमित सरकारी बसें, प्राइवेट गाड़ियां और टैक्सियां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिनसे ढाई से तीन घंटे में मांडू पहुंचा जा सकता है। नवंबर से फरवरी के बीच यहां का तापमान बेहद सुहावना रहता है, जिससे महलों के बड़े परिसरों में पैदल घूमना काफी आसान हो जाता है। यात्रा की योजना बनाते समय होटल और ठहरने के साधनों की अग्रिम बुकिंग करा लेना अधिक सुरक्षित रहता है।
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