केंद्रीय सरकार का कांग्रेस को बड़ा झटका, 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड दफ्तर 28 मार्च तक खाली करने का अंतिम नोटिस, पार्टी ने कोर्ट जाने की बनाई रणनीति
28 मार्च तक दफ्तर खाली करने का आदेश, कांग्रेस कोर्ट जाने की तैयारी में
Congress office eviction: केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के संपदा विभाग ने कांग्रेस पार्टी को नई दिल्ली के 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड स्थित अपने दोनों कार्यालय 28 मार्च 2026 तक खाली करने का अंतिम नोटिस जारी किया है। पार्टी को एक हफ्ते से भी कम समय दिया गया है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस नोटिस को अदालत में चुनौती दे सकती है। 48 साल तक एक पार्टी का इतिहास जिस इमारत की दीवारों में समाया हो, उसे मात्र कुछ दिनों की नोटिस पर खाली करने का आदेश राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर हलचल मचाने के लिए काफी है। अकबर रोड का यह दफ्तर अब सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि भारतीय राजनीति की एक पूरी युग की गवाही है।
Congress office eviction: किन दफ्तरों को खाली करने का मिला है आदेश?
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाले संपदा विभाग ने कांग्रेस पार्टी को दो स्थानों पर स्थित उसके कार्यालय खाली करने का आदेश दिया है। पहला स्थान 24 अकबर रोड है जो दशकों से पार्टी का मुख्यालय रहा है और दूसरा स्थान 5 रायसीना रोड है जहां भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के दफ्तर संचालित होते हैं। दोनों ही दफ्तरों को 28 मार्च 2026 तक खाली करने का आदेश दिया गया है। यह नोटिस कुछ दिन पहले ही जारी किया गया और पार्टी को इसमें एक सप्ताह से भी कम का समय दिया गया है।
24 अकबर रोड: कांग्रेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पता?
24 अकबर रोड का यह बंगला 1978 से कांग्रेस का मुख्यालय रहा है। यानी पिछले पूरे 48 वर्षों तक इस इमारत में पार्टी की तमाम बैठकें हुईं, रणनीतियां तय हुईं और कई बड़े राजनीतिक फैसले लिए गए। इंदिरा गांधी के कार्यकाल से लेकर राजीव गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व तक इस दफ्तर ने भारतीय राजनीति के अनेक उतार चढ़ाव देखे हैं। यह स्थान केवल एक प्रशासनिक केंद्र नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर की तरह रहा है।
‘इंदिरा भवन’: कांग्रेस का नया आधुनिक मुख्यालय
पिछले साल कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के कोटला मार्ग पर 9ए में इंदिरा भवन नाम से अपना नया आधुनिक मुख्यालय बना लिया है। इस भवन का उद्घाटन 15 जनवरी 2025 को पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने किया था। लगभग 242 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पांच मंजिला इमारत 2100 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली है। इसमें 276 सीटों वाला ऑडिटोरियम, अनेक बैठक कक्ष और कॉन्फ्रेंस हॉल हैं। भवन की दीवारों पर कांग्रेस और भारत के इतिहास से जुड़ी 246 दुर्लभ तस्वीरें लगाई गई हैं। एक पुस्तकालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम पर रखा गया है।
Congress office eviction: नोटिस की समयसीमा पर कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस पार्टी ने इस नोटिस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है लेकिन पार्टी के भीतर से आ रहे संकेत स्पष्ट हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व इस अचानक आए नोटिस के खिलाफ रणनीति बना रहा है और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेगा। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “सरकार को अपने नियम सभी पर समान रूप से लागू करने चाहिए। किसी एक पार्टी को निशाना नहीं बनाना चाहिए।” यह बयान पार्टी की उस भावना को व्यक्त करता है कि इस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हो सकते हैं।
Congress office eviction: युवा कांग्रेस और NSUI के सामने नई चुनौती
5 रायसीना रोड पर स्थित दफ्तर में भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई यानी नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के कार्यालय संचालित हैं। ये दोनों संगठन कांग्रेस के युवा और छात्र विंग हैं जो देशभर में सक्रिय रहते हैं। इन संगठनों के लिए इतनी कम अवधि में नया ठिकाना खोजना व्यावहारिक रूप से बड़ी चुनौती होगी। कानूनी जानकारों के अनुसार, इतनी कम समय सीमा में किसी भी संगठन को खाली करने का आदेश देना न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। कांग्रेस के पास इसे अदालत में चुनौती देने के ठोस आधार हो सकते हैं।
Congress office eviction: राजनीतिक गलियारों में चर्चा और कानूनी विकल्प
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। विपक्षी दलों के दफ्तरों और संसाधनों को लेकर समय-समय पर विवाद होते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के नोटिस जब किसी प्रमुख विपक्षी दल को मिलते हैं तो इसका एक व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी होता है। यदि कांग्रेस अदालत का रुख करती है तो वह इस नोटिस की समयसीमा पर स्थगन मांग सकती है। पार्टी यह तर्क दे सकती है कि इतनी कम अवधि में एक बड़े राजनीतिक दल के कार्यालय को स्थानांतरित करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। अदालत यदि नोटिस पर रोक लगाती है तो मामला लंबे समय तक विचाराधीन रह सकता है।
निष्कर्ष
अकबर रोड का दफ्तर केवल एक सरकारी बंगला नहीं था, वह भारत के लोकतंत्र की एक जीती जागती स्मृति था जहां दशकों की राजनीति ने आकार लिया। इस नोटिस के साथ उठे सवाल सिर्फ एक दफ्तर के भविष्य तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह इस बात की परीक्षा भी है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष के अधिकारों और संस्थागत स्थानों की रक्षा किस तरकेंद्रीय सरकार का कांग्रेस को बड़ा झटका, 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड दफ्तर 28 मार्च तक खाली करने का अंतिम नोटिस, पार्टी ने कोर्ट जाने की बनाई रणनीतिकेंद्रीय सरकार का कांग्रेस को बड़ा झटका, 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड दफ्तर 28 मार्च तक खाली करने का अंतिम नोटिस, पार्टी ने कोर्ट जाने की बनाई रणनीतिह होती है। आने वाले दिनों में यह मामला न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर सुर्खियां बनाए रखेगा।
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