ईरान-इजरायल युद्ध 2026 का बड़ा असर,- मिडिल ईस्ट में फंसे लाखों भारतीयों की ईद पड़ी फीकी, रद्द उड़ानें और आसमान छूते किराए बने घर वापसी में सबसे बड़ी बाधा; परिवार से दूर त्योहार मनाने को मजबूर प्रवासियों का दर्द

महंगे किराए और रद्द फ्लाइट्स से मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय परेशान

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Iran Israel war 2026: जब पूरा देश ईद की तैयारियों में जुटा है और बाजारों में रौनक है, तब मिडिल ईस्ट के देशों में काम करने वाले हजारों भारतीय अपने परिवारों से दूर, एक अजनबी देश में, बम धमाकों की आवाजों के बीच त्योहार मनाने को मजबूर हैं। इनके हाथों में रद्द टिकटों की पर्चियां हैं और आंखों में वो सपना है जो इस बार पूरा नहीं हो सका।

Iran Israel war 2026: ईरान-इजरायल युद्ध ने कब और कैसे बदल दी तस्वीर?

28 फरवरी 2026 को ईरान और इजरायल के बीच सीधे सशस्त्र संघर्ष की शुरुआत हुई। यह टकराव अचानक इतना तीव्र हो गया कि क्षेत्र के कई देशों में हवाई क्षेत्र को आंशिक या पूरी तरह बंद करना पड़ा। युद्ध को अब करीब तीन सप्ताह हो चुके हैं और अभी भी स्थिति सामान्य होने के कोई संकेत नहीं हैं। खाड़ी देशों से उड़ानें या तो रद्द हो रही हैं या उनका मार्ग बदला जा रहा है, जिसकी वजह से हवाई किराए कई गुना बढ़ गए हैं।

Iran Israel war 2026: कितना बढ़ा हवाई किराया और किन रूटों पर सबसे ज्यादा असर?

युद्ध से पहले खाड़ी देशों से भारत आने का साधारण हवाई किराया जहां काफी किफायती हुआ करता था, वहीं अब उसी टिकट के लिए कई गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। दुबई, शारजाह, कुवैत, ओमान और बहरीन से भारत आने वाली उड़ानों पर सबसे अधिक असर पड़ा है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध के दौरान हवाई मार्गों में बदलाव से उड़ान की अवधि बढ़ जाती है और एयरलाइंस को अतिरिक्त ईंधन खर्च करना पड़ता है, जिसका सीधा बोझ यात्रियों पर पड़ता है। इसके अलावा उड़ानों की संख्या कम होने से मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बिगड़ गया है।

Iran Israel war 2026: कौन हैं ये प्रभावित भारतीय और किन देशों में हैं?

मिडिल ईस्ट में भारतीय प्रवासियों की संख्या बेहद विशाल है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन जैसे देशों में निर्माण, स्वास्थ्य, आतिथ्य और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें से अधिकांश केरल, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों से आए हुए कम और मध्यम आय वर्ग के मजदूर और कर्मचारी हैं। ये लोग साल में एक या दो बार ही घर आ पाते हैं और ईद जैसे बड़े त्योहार पर घर लौटना इनकी सबसे बड़ी इच्छा होती है।

Iran Israel war 2026: टिकट रद्द होने पर भारतीयों को क्या नुकसान हो रहा है?

अनेक प्रवासी भारतीयों ने बताया कि उन्होंने महीनों पहले टिकट बुक कर लिए थे, पर युद्ध शुरू होने के बाद एयरलाइंस ने उनकी उड़ानें रद्द कर दीं। कुछ को रिफंड मिला लेकिन नए किराए पर दोबारा टिकट खरीदना उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर हो गया। “टिकट कैंसिल हो गया, अब घर में नहीं मनेगी ईद” यह दर्द उन तमाम भारतीयों की जुबान पर है जो परिवार से दूर रहकर त्योहार मनाने को मजबूर हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना दुख साझा करते हुए सरकार से मदद की गुहार भी लगाई है।

Iran Israel war 2026: क्या भारत सरकार ने कोई कदम उठाया है?

भारत सरकार मिडिल ईस्ट में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। विदेश मंत्रालय ने उन देशों में स्थित भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को प्रभावित नागरिकों की मदद के लिए सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। विदेश नीति विश्लेषकों के अनुसार ऐसे संकटों में भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। इससे पहले भी भारत ने ऑपरेशन गंगा और वंदे भारत मिशन जैसे अभियानों के जरिए संकट में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

Iran Israel war 2026: परिवारों पर क्या मनोवैज्ञानिक और आर्थिक असर पड़ रहा है?

भारत में बैठे परिवार अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। केरल और उत्तर प्रदेश के उन गांवों में जहां प्रवासी भारतीयों की बड़ी संख्या है, इस बार ईद का माहौल सामान्य नहीं है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में विदेश में रहने वाले लोग अत्यधिक तनाव और अकेलेपन का सामना करते हैं। त्योहार के समय यह भावनात्मक पीड़ा और भी बढ़ जाती है, क्योंकि परिवार से मिलने की इच्छा और न मिल पाने की मजबूरी दोनों एक साथ होती हैं।

Iran Israel war 2026: क्या आने वाले दिनों में स्थिति सुधरने की उम्मीद है?

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं लेकिन युद्धविराम को लेकर अभी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा तब तक क्षेत्र में हवाई यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं होगा। ऐसे में खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों को अभी कुछ और समय के लिए धैर्य रखना होगा।

निष्कर्ष

ईद का त्योहार परिवार और अपनों के साथ मनाने का पर्व है। लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में रहने वाले हजारों भारतीय परिवारों के लिए यह ईद एक कठिन परीक्षा बनकर आई है। युद्ध की आग ने न केवल क्षेत्र की शांति को भंग किया है बल्कि उन गरीब और मेहनतकश भारतीयों के सपनों को भी जला दिया है जो साल भर पसीना बहाकर सिर्फ इस एक पल के लिए जीते थे। जब तक युद्ध की विभीषिका समाप्त नहीं होती, तब तक इन परिवारों की पीड़ा कम होना मुश्किल है।

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