India-US Trade Deal: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर मंगलवार देर रात एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। व्हाइट हाउस ने इस डील की संशोधित फैक्ट शीट जारी की है जिसमें पहले वाले संस्करण की तुलना में कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे उल्लेखनीय परिवर्तन यह है कि अमेरिका से दालों के आयात का जिक्र पूरी तरह से हटा दिया गया है। यह वह मुद्दा था जिस पर भारत में व्यापक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था और विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला था। एक दिन पहले जारी फैक्ट शीट में “कुछ दालों” (certain pulses) का स्पष्ट उल्लेख था, लेकिन अब इसे पूरी तरह से हटा दिया गया है। इसके अलावा, 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों की खरीद के संदर्भ में भी भाषा में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
पहले कहा गया था कि भारत इन उत्पादों की खरीद करने के लिए “प्रतिबद्ध” (committed) है, लेकिन अब इसे बदलकर “इरादा रखता है” (intends) कर दिया गया है। यह सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव भारत पर किसी भी प्रकार की बाध्यता को समाप्त करता है। यह संशोधन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत की चिंताओं को गंभीरता से लिया है और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर अधिक सावधानी बरतने का निर्णय लिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस संशोधित फैक्ट शीट में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं और इनका क्या महत्व है।
India-US Trade Deal: दाल आयात का पूर्णत: हटाया गया उल्लेख
संशोधित फैक्ट शीट में सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दालों के आयात से संबंधित है। पहले जारी किए गए संस्करण में अमेरिका से “कुछ दालों” के आयात का स्पष्ट उल्लेख था।
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यह उल्लेख भारत में तीव्र राजनीतिक विवाद का कारण बना था। विपक्षी दलों ने इसे भारतीय किसानों के हितों के विरुद्ध बताते हुए सरकार पर जमकर हमला किया था।
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दालें भारत में अत्यंत संवेदनशील कृषि उत्पाद मानी जाती हैं। भारत दुनिया में दाल का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है और करोड़ों किसान दाल की खेती पर निर्भर हैं।
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दालों पर टैरिफ में कोई भी बदलाव या आयात में वृद्धि सीधे तौर पर घरेलू किसानों की आजीविका और घरेलू बाजार की कीमतों को प्रभावित कर सकती थी।
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भारत सरकार ने एक दिन पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय कृषि और किसानों के लिए संवेदनशील किसी भी प्रकार के अनाजों का आयात नहीं खोला जा रहा है।
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अब संशोधित फैक्ट शीट में दालों का उल्लेख पूरी तरह हटा देना यह संकेत देता है कि अमेरिका ने भारत की इस चिंता को स्वीकार किया है और इस मुद्दे पर पीछे हटने का निर्णय लिया है।
India-US Trade Deal: 500 अरब डॉलर की खरीद, प्रतिबद्धता से इरादे में बदलाव
दूसरा बड़ा परिवर्तन 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों की खरीद से संबंधित भाषा में किया गया है। यह बदलाव भले ही सूक्ष्म लगे, लेकिन इसके निहितार्थ बहुत महत्वपूर्ण हैं।
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पहली फैक्ट शीट में कहा गया था कि भारत अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों की खरीद करने के लिए “प्रतिबद्ध” (committed) है।
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प्रतिबद्धता शब्द एक प्रकार की बाध्यता का संकेत देता है। इसका अर्थ होता है कि भारत पर यह दायित्व है कि वह यह खरीदारी करे।
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संशोधित संस्करण में इसे बदलकर कहा गया है कि भारत इन उत्पादों को खरीदने का “इरादा रखता है” (intends to purchase)।
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इरादा रखना और प्रतिबद्ध होना दोनों में बड़ा अंतर है। इरादा एक इच्छा या योजना है, जबकि प्रतिबद्धता एक बाध्यकारी वादा है।
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यह बदलाव भारत को अधिक लचीलापन प्रदान करता है। यदि परिस्थितियां बदलती हैं या घरेलू जरूरतें अलग हों तो भारत इस “इरादे” को संशोधित कर सकता है बिना किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता का उल्लंघन किए।
डिजिटल सर्विसेज टैक्स पर नरम रुख
तीसरा महत्वपूर्ण संशोधन डिजिटल सेवाओं पर कर (Digital Services Tax) से संबंधित है। यह भी एक संवेदनशील मुद्दा था जिस पर अमेरिका और भारत के बीच मतभेद रहे हैं।
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पहली फैक्ट शीट में दावा किया गया था कि भारत अपना डिजिटल सर्विसेज टैक्स हटा देगा। यह एकतरफा घोषणा थी जो भारत की संप्रभुता के मुद्दे को उठाती थी।
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संशोधित फैक्ट शीट में यह दावा पूरी तरह हटा दिया गया है। अब केवल इतना कहा गया है कि दोनों देश डिजिटल व्यापार नियमों पर “मजबूत द्विपक्षीय बातचीत” (robust bilateral dialogue) करेंगे।
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यह बातचीत “भेदभावपूर्ण प्रथाओं और बाधाओं को दूर करने” पर केंद्रित होगी। यानी यह एक वार्ता की प्रक्रिया है, न कि एकतरफा निर्णय।
India-US Trade Deal: विपक्ष का हंगामा और सरकार की स्थिति
पहली फैक्ट शीट जारी होने के बाद भारतीय संसद में विपक्षी दलों ने सरकार पर जमकर हमला बोला था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस डील को भारत के हितों के विरुद्ध बताया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस डील को “ट्रैप डील” (जाल समझौता) कहा था। हालांकि, भारत सरकार ने शुरू से ही स्पष्ट किया था कि किसी भी संवेदनशील कृषि उत्पाद के आयात की अनुमति नहीं दी गई है। अब संशोधित फैक्ट शीट के जारी होने से सरकार की स्थिति मजबूत हुई है।
ट्रंप प्रशासन का लचीला रुख
इन संशोधनों से यह स्पष्ट होता है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ संबंधों में अधिक लचीलापन दिखाया है। ये परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच हुई वार्ता के चार दिनों बाद जारी मूल संयुक्त बयान के अधिक अनुरूप हैं। जब भारत सरकार ने इस पर असहजता व्यक्त की तो अमेरिका ने तुरंत संशोधित संस्करण जारी किया। यह दोनों देशों के बीच मजबूत राजनयिक संवाद को दर्शाता है।
India-US Trade Deal: निष्कर्ष
India-US Trade Deal की संशोधित फैक्ट शीट भारत की राजनयिक जीत है। दाल आयात का उल्लेख हटना, 500 अरब डॉलर की खरीद में “प्रतिबद्धता” से “इरादे” में बदलाव और डिजिटल टैक्स पर नरम रुख – ये सभी परिवर्तन भारत के पक्ष में हैं। यह दर्शाता है कि मोदी सरकार ने अपने हितों की रक्षा करते हुए समझौता किया है। ट्रंप प्रशासन की यह लचीलापन भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती को दिखाता है।
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