बिहार में NBPDCL के अभियंता मनोज रजक पर EOU का बड़ा एक्शन, 7 ठिकानों पर छापे, 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का खुलासा, नेपाल तक फैला नेटवर्क

EOU की छापेमारी में 7 ठिकानों से संपत्ति, बिहार से नेपाल तक फैला नेटवर्क

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NBPDCL engineer raid: एक सरकारी अभियंता जो 2009 में सहायक अभियंता के रूप में एक साधारण नौकरी में आया, उसके नाम पर 15 साल में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति। यह सुनकर भले ही अविश्वसनीय लगे, लेकिन बिहार की आर्थिक अपराध इकाई की ताजा कार्रवाई ने इसी सच्चाई को उजागर किया है। NBPDCL में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात मनोज कुमार रजक के खिलाफ इस छापेमारी ने पूरे बिजली विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

NBPDCL engineer raid: EOU ने किन ठिकानों पर और कैसे की छापेमारी?

आर्थिक अपराध इकाई की टीमों ने एक सुनियोजित अभियान के तहत एक साथ सात स्थानों पर छापेमारी की। इन ठिकानों में बिहार के मधुबनी, दरभंगा, सुपौल जिले के निर्मली और करजाइन शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी एक साथ तलाशी ली गई।

अधिकारियों ने कई घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया और भारी मात्रा में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। इतने बड़े पैमाने पर और अलग अलग राज्यों में एक साथ की गई यह छापेमारी यह संकेत देती है कि जांच एजेंसियों के पास पहले से पुख्ता जानकारी मौजूद थी।

NBPDCL engineer raid: मनोज रजक के पास क्या क्या संपत्ति मिली है?

जांच में जो संपत्तियां सामने आई हैं वे हैरान करने वाली हैं। सुपौल के करजाइन में तीन मकान और एक गोदाम मिला है। निर्मली में एक और गोदाम की पहचान हुई है और दरभंगा में एक आलीशान मकान भी उनकी संपत्तियों में शामिल है।

इसके अलावा दार्जिलिंग के एक चाय बागान में साझेदारी के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। अभियंता की पत्नी के नाम पर दरभंगा और बिरौल को जोड़ने वाले मार्ग पर पेट्रोल पंप के लिए जमीन लीज पर ली गई थी। कुल 17 जमीन संबंधी दस्तावेज मिले हैं जो बिहार के अररिया, दरभंगा, सुपौल और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से संबंधित हैं।

NBPDCL engineer raid: नेपाल तक कैसे फैला है यह संपत्ति नेटवर्क?

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली जानकारी नेपाल से जुड़ी है। जांच में सामने आया है कि मनोज रजक की एक महिला परिचित नेपाल में रहती हैं और वहां उनके लिए एक मकान भी बनवाया गया है।

यह खुलासा होते ही जांच एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं। भ्रष्टाचार विरोधी विशेषज्ञों के अनुसार जब कोई सरकारी अधिकारी दूसरे देश में संपत्ति बनाता है तो यह न केवल आय से अधिक संपत्ति का मामला होता है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जांच का विषय भी बन जाता है।

NBPDCL engineer raid: नकदी और बैंक खातों में क्या मिला?

छापेमारी के दौरान मौके से लगभग 1.05 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके साथ ही बैंक खातों की जांच में करीब सवा चार लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली है।

हालांकि नकद राशि अपेक्षाकृत कम लग सकती है, लेकिन जांच एजेंसियों का ध्यान मुख्य रूप से अचल संपत्तियों, जमीन के दस्तावेजों और व्यावसायिक साझेदारियों पर केंद्रित है। जांच अधिकारियों के अनुसार आय से अधिक संपत्ति का वास्तविक आंकड़ा जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और बड़ा होता जाएगा।

NBPDCL engineer raid: मनोज रजक की नौकरी की पृष्ठभूमि क्या है?

मनोज कुमार रजक ने साल 2009 में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में सहायक अभियंता के पद से अपनी सरकारी सेवा शुरू की थी। धीरे-धीरे पदोन्नति के जरिए वे कार्यपालक अभियंता के पद तक पहुंचे।

NBPDCL बिहार के उत्तरी भाग में बिजली वितरण का काम करने वाली एक प्रमुख सरकारी कंपनी है। इस कंपनी में इंजीनियरों के पास ठेके, खरीद प्रक्रिया और बिजली संबंधी अनुमतियों का व्यापक नियंत्रण होता है जो भ्रष्टाचार के अवसर प्रदान कर सकता है।

NBPDCL engineer raid: EOU क्या है और यह मामला उसके पास कैसे पहुंचा?

बिहार की आर्थिक अपराध इकाई यानी Economic Offences Unit एक विशेष जांच एजेंसी है जो राज्य में वित्तीय धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच करती है। यह इकाई सीधे राज्य के गृह विभाग के अधीन काम करती है।

भ्रष्टाचार निरोधक कानून के जानकारों के अनुसार जब किसी सरकारी अधिकारी की संपत्ति उसकी वैध आय से कई गुना अधिक पाई जाती है तो यह आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है जो एक संज्ञेय और गंभीर अपराध है। इसमें कठोर दंड का प्रावधान है।

NBPDCL engineer raid: इस कार्रवाई का बिहार के सरकारी विभागों पर क्या असर होगा?

इस छापेमारी ने बिहार के बिजली विभाग में हलचल मचा दी है। विभाग के अन्य अधिकारियों में भी बेचैनी देखी जा रही है। जानकारों का कहना है कि यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि सरकारी पद का दुरुपयोग करके संपत्ति बनाने वाले अफसर जांच एजेंसियों की नजर से बच नहीं सकते।

भ्रष्टाचार विरोधी संगठनों के अनुसार बिजली वितरण क्षेत्र में इस तरह के मामले अक्सर सामने आते हैं क्योंकि इस क्षेत्र में ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और अभियंताओं के बीच बड़े पैमाने पर लेनदेन होता है। इस मामले से इस क्षेत्र में पारदर्शिता की जरूरत एक बार फिर रेखांकित हुई है।

निष्कर्ष

बिहार में मनोज कुमार रजक पर हुई यह कार्रवाई सिर्फ एक अभियंता के भ्रष्टाचार की कहानी नहीं है। यह उस व्यापक समस्या का प्रतिबिंब है जो सरकारी तंत्र में जड़ें जमाए बैठी है। 2009 में एक साधारण अभियंता के रूप में शुरू हुआ सफर 15 साल में 100 करोड़ की संपत्ति तक पहुंचा। इस मामले में EOU की सक्रियता यह संदेश देती है कि जांच एजेंसियां अब सतर्क हैं और सरकारी पद का दुरुपयोग करने वाले किसी भी अधिकारी के लिए कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं है।

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